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कॉकरोचों के साथ हो गया खेला?

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देश और दुनिया की निगाहें 6 जून को होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन पर लगी थी वह अत्यंत ही सादगी सरलता और शांति के साथ निपट गया। संस्थापक अभिजीत दिपके की फ्लाइट दिल्ली में लैंड हुई और दिल्ली पुलिस के अधिकारी बिना मांगे ही जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति का पत्र लेकर एयरपोर्ट पर आ गए और किसी अति विशिष्ट व्यक्ति की तरह उन्हें सुरक्षा के घेरे में लेकर जंतर मंतर आए जहां उन्होंने अपने संक्षिप्त भाषण में सरकार और शिक्षा मंत्री को घेरते हुए उनके खिलाफ नारे लगवाए तथा उनके इस्तीफे के लिए 5 दिन की मोहलत देते हुए निर्धारित समय से पूर्व ही अपना कार्यक्रम संपन्न कर दिया। लेकिन अब इस कार्यक्रम को लेकर तमाम तरह की बातों पर सोशल मीडिया में बहस भी छिड़ी हुई है। कोई इसे अन्ना आंदोलन की तरह एक और राजनीतिक फिमोमना बता रहा है तो कोई आप की तरह सीजेपी को भाजपा की एक और बी टीम कह रहा है। तो कोई इसे राहुल गांधी के द्वारा सरकार के खिलाफ चलाई जा रही विरोध प्रदर्शनों की मुहिम को कमजोर करने के लिए अमित शाह का एक और षड्यंत्र के तौर पर देख रहा है। वहीं कुछ इसके इतर जेन जे के आंदोलन से डरी सरकार की मजबूरी बता रहा है तथा युवाओं से पंगा न लेने के तौर पर भी देख रहे हैं। इस पार्टी के गठन से लेकर अब तक कई ऐसे अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आ चुके हैं जो यह संकेत देते हैं कि जो कुछ हो रहा है वह सामान्य या स्वाभाविक तो कतई भी नहीं है इसके निःतार्थ में कुछ अत्यंत गूढ राजनीतिक सच छुपे हुए हैं। जिनसे अभी पर्दा उठना बाकी है। कॉकरोचों की मांग के अनुरूप अगर मोदी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेते हैं तो इसका मतलब साफ होगा कि सरकार के खिलाफ इस आवाज को दबाने में तथा जेन जे के द्वारा पहुंचाये जाने वाले नुकसान को वह लगभग खत्म कर चुके होंगे। सीजेपी को जिस तरह से जंतर मंतर पर आंदोलन की आसानी से अनुमति दे दी गई वह हैरानी की बात है। वह भाजपा सरकार जो अपने खिलाफ एक शब्द भी बोलने वालों को जेल पहुंचा देती है। वांगचुक प्रदर्शन में भी मौजूद थे खुद इसका प्रमाण है। वह सरकार जो किसानों को दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति तो छोड़िए सालों तक घुसने नहीं देती और रोकने के लिए सड़कों पर कीले ठोकने से लेकर उन पर आसमान से अश्रु गैस के गोले बरसाती है उसने दिपके में ऐसा क्या कुछ देखा कि पुलिस खुद अनुमति पत्र लेकर एयरपोर्ट पहुंच गई? यह सरकार की मर्जी और अनुमति के बिना संभव नहीं था। जिस दिपके का एक्स हैंडल आईबी द्वारा देश की संप्रभुता को खतरा बताने पर बैन कर दिया जाता है वह कुछ दिन बाद राष्ट्रभक्त मान लिया जाता है क्या यह हैरान करने वाली बात नहीं है। मोदी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लेते तब कॉकरोचों का आंदोलन जारी रहेगा या खत्म हो जाएगा? यह सवाल सीजेपी और युवाओं के लिए ही अहम नहीं है सभी के लिए है। इस्तीफे को लेकर सरकार उन्हें कह सकती है आपकी मांग मान ली गई है इसलिए अब शांति से बैठिए। बाकी की आपकी बातों पर भी आगे सोचा जाएगा। दरअसल सरकार द्वारा जो किया जा रहा है वह एक सोची समझी रणनीति ही प्रतीत होती है वह कांग्रेस के विरोध को दो हिस्सों में बांटने की रणनीति पर काम कर रही है उसे पता है कि कांग्रेस ही उसका कुछ बिगाड़ सकती है बाकी अन्य कोई कुछ नहीं कर सकता है। कांग्रेस जिन मुद्दों के जरिए सत्ता की ओर बढ़ रही है अगर सीजेपी की भी उसमें हिस्सेदारी हो जाती है तो इसका स्वाभाविक लाभ भाजपा को ही होगा। वैसे भी अभी सीजेपी तो अभी राजनीति में कहीं है ही नहीं जब आप जैसी पार्टियों का भाजपा ने वह हाल कर दिया है कि वह खत्म होने के कगार पर है तो सीजेपी जैसी ताकतों से भाजपा को क्या डर होगा लेकिन आने वाला समय जेन जे लिए कठिन परीक्षा का रहने वाला है।

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