- उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने खोला नया मोर्चा
- देवभूमि के सैन्य परंपरा वाले समाज के बीच अग्निवीर योजना को बनाया प्रमुख मुद्दा
- उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सैनिक परिवारों को साधने की रहेगी पूरी कोशिश
देहरादून। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अल्मोड़ा में आयोजित जनसभा को मोबाइल के माध्यम से संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की अग्निवीर योजना पर एक बार फिर सवाल खड़े किए। उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक केवल एक चुनावी टिप्पणी नहीं, बल्कि उत्तराखंड जैसे सैनिक बहुल राज्य में कांग्रेस की दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि अग्निवीर योजना युवाओं के भविष्य और सेना की पारंपरिक भर्ती व्यवस्था को प्रभावित कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चार साल की सेवा के बाद अधिकांश युवाओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। कांग्रेस लगातार इस योजना को युवाओं और सैनिक परिवारों के हितों के खिलाफ बताती रही है और उत्तराखंड दौरे में भी राहुल गांधी ने इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।
उत्तराखंड को देश के सबसे बड़े सैनिक योगदान देने वाले राज्यों में गिना जाता है। गढ़वाल और कुमाऊं के हजारों परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सेना से जुड़े हुए हैं। राज्य के लगभग हर गांव से युवा सेना में भर्ती होने का सपना देखते हैं। ऐसे में अग्निवीर योजना यहां केवल राष्ट्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक विषय भी बन गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी ने उत्तराखंड में इस मुद्दे को उठाकर सैनिक परिवारों और सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं तक सीधा संदेश पहुंचाने का प्रयास किया है। कांग्रेस का आकलन है कि सेना भर्ती की पुरानी व्यवस्था को लेकर युवाओं के बीच मौजूद असंतोष उसे राजनीतिक लाभ दिला सकता है।
दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अग्निवीर योजना सेना को आधुनिक बनाने और युवाओं को नए अवसर देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि योजना के माध्यम से युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण, अनुशासन और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं तथा कई राज्यों और संस्थानों ने अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था भी बनाई है।
दरअसल, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए कांग्रेस ऐसे मुद्दों की तलाश में है जो सीधे जनता के जीवन और भावनाओं से जुड़े हों। बेरोजगारी, पलायन, महंगाई और अग्निवीर जैसे विषय पार्टी की राजनीतिक रणनीति के केंद्र में दिखाई दे रहे हैं। राहुल गांधी के दौरे में अग्निवीर योजना पर विशेष फोकस इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले महीनों में उत्तराखंड की राजनीति में अग्निवीर मुद्दा और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। कांग्रेस इसे युवाओं और सैनिक परिवारों के बीच ले जाएगी, जबकि भाजपा इसके लाभ गिनाकर जवाबी अभियान चलाएगी। ऐसे में 2027 के चुनावी संग्राम में विकास, रोजगार और पलायन के साथ-साथ अग्निवीर योजना भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।
राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा केवल संगठनात्मक मजबूती तक सीमित नहीं दिखा। अग्निवीर योजना पर हमला कर उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की है कि कांग्रेस सैनिक बहुल राज्य में उन मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी, जो सीधे युवाओं और फौजी परिवारों से जुड़े हैं। अब देखना यह होगा कि यह मुद्दा चुनावी मैदान में कितना प्रभाव छोड़ पाता है।




