आखिरकार वही हुआ जिसकी संभावना बहुत पहले समय से जताई जा रही थी। भले ही देश के प्रधानमंत्री इतनी बड़ी बात को कहने के राष्ट्रीय संबोधन का साहस न जुटा पाये हो जो महिलाओं के वोट के मुद्दे जैसे विषय पर राष्ट्र को संबोधित करने से भी न चूकते हो लेकिन अब उन्होंने अपने एक साधारण से संबोधन में जिस तरह से देश की अर्थव्यवस्था पर आने वाले या यह कहे की आ चुके संकट का ऐलान कर दिया है। देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जिंदगी पर इस संकट का असर किसी सुनामी से कम नहीं आंका जा सकता है। यह संकट कभी न कभी आना ही था यह अलग बात है कि सरकार को इसका ठीकरा खाड़ी युद्ध पर फोड़ने का एक सार्थक बहाना मिल गया है। पीएम मोदी ने चुनाव संपन्न होते ही अब इस बात का ऐलान की भारतीय अर्थव्यवस्था अत्यंत गंभीर संकट में फस गई है सीधेे—सीधे न करते हुए उन्होंने देशवासियों से देशभक्ति, राष्ट्रीय और धरती मां की सुरक्षा के लिए कुछ कुर्बानियां देने के लिए तैयार रहने की अपील के रूप में की गई है। मोदी ने कहा है कि देश के लोग एक साल तक सोना न खरीदे चाहे कुछ भी क्यों न हो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। वह कहते हैं पहले लोग राष्ट्रीय आपदा के समय अपना सोना चंडी दान कर देते थे वह दान करने के लिए नहीं कह रहे हैं वह राष्ट्रीय हित के लिए सोने न खरीदने की बात कह रहे हैं। देश के सर्राफा बाजार और सोना चांदी के व्यवसाय करने वालों का क्या होगा क्या अब उनकी दुकान भी बंद हो जाएगी। लोगों ने मोदी की यह बात मान ली तो इससे यह होना तय है। खाड़ी युद्ध के कारण भारत को हार्माेज का रास्ता बंद होने से न तो उर्वरक मिल रहे हैं न पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस। चुनाव के दौरान भले ही सरकार ने चुप्पी साधे रखकर अपनी राष्ट्रभक्ति का उदाहरण पेश किया हो लेकिन अब राष्ट्रीय शर्म त्याग कर जनता को सच बताना जरूरी और सरकार की मजबूरी हो गया है। पीएम का कहना है कि केमिकल की भरमार कर हमने धरती मां के साथ घोर अपराध किया है। लेकिन अब हमें उर्वरकों का प्रयोग रोककर धरती मां की रक्षा करने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से खाने के तेलों का भी कम से कम उपयोग करने की अपील की गई है। वहीं पेट्रोल—डीजल का उपयोग भी कम से कम करने और सौर ऊर्जा से काम चला कर राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की अपील की गई है। मोदी का कहना है कि लोगों को कम से कम पैसा खर्च करना चाहिए तथा देशाटन या विदेशी यात्राओं को भी फिलहाल रोके जाने की जरूरत है। मोदी के इस अपील से यह तो साफ है कि 95 रुपए तक एक डॉलर की कीमत हो जाने के कारण भारत के सामने यह संकट खड़ा हो गया है कि वह विदेशों से अब अपनी जरूरत की चीज खरीदने की स्थिति में भी नहीं रहा। कच्चे तेल की कीमतें 114 रुपए प्रति डॉलर पहुंचने तथा रसोई गैस की कीमतों में भारी इजाफे की संभावनाओं के बीच आवश्यक वस्तुओं की कमी होने और महंगाई की सुनामी आना तय हो चुका है। देश का घरेलू उत्पादन न्यूनतम स्तर पर आने तथा बेरोजगारी स्तर के उच्चतम स्तर पर पहुंचने से अब भारत की जीडीपी में भी भारी कमी आने की संभावना है। ग्लोबल ब्रोकरेज यूवीएस के अनुसार अब यह 6.7 फीसदी से गिरकर 6.2 फीसदी रहने की बात कही गई है। सवाल यह है कि क्या देश के लोगों के लिए अब इतने अच्छे दिन आ चुके हैं कि उन्हें अपने खाने—पीने में भी कटौती करनी पड़ेगी। आम आदमी की जेब तो पहले ही खाली हो चुकी है मोदी सोना न खरीदने की अपील कर रहे हैं लोग तो पहले ही अपना सोना बेज चुके हैं। अगर रोजी के बाद रोटी भी हाथ से छीन ली गई तो वह जिएंगे कैसे? मोदी को यह भी बताना चाहिए।




