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कांग्रेस ने बदला अपना गेम प्लान, अब मंदिर की सीढ़ियों से करेगी चुनावी शंखनाद

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  • ‘आस्था’ के द्वार से ‘सियासी’ दस्तक
  • कांग्रेस के लिए प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा का गढ़वाल दौरा अहम
  • उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल से इस बार से सियासत का नया अध्याय
  • कांग्रेस पार्टी अब आस्था के जरिए जनता से जुड़ने की कोशिश करेगी

देहरादून। उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल से इस बार सियासत का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। कांग्रेस ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर जैसे प्रमुख धामों से करने का फैसला लिया है, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस बार आस्था के केंद्र सियासी संदेशों के प्रमुख मंच बनेंगे।
कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा का गढ़वाल दौरा प्रमुख धार्मिक स्थलों पर केंद्रित रहेगा, जो यह संकेत देगा है कि पार्टी अब आस्था के जरिए जनता से जुड़ने की कोशिश करेगी। ज्ञात हो कि अब तक उत्तराखंड की राजनीति में धार्मिक मुद्दों और सनातन आस्था के प्रतीकों पर मुख्य रूप से भाजपा की पकड़ मजबूत मानी जाती रही है। भाजपा ने लंबे समय से धार्मिक आयोजनों और आस्था से जुड़े प्रतीकों को अपनी राजनीति का अहम हिस्सा बनाया है, लेकिन अब कांग्रेस भी उसी पिच पर उतरती नजर आ रही है, जिससे सियासी मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है।
बता दें कि कांग्रेस की गढ़वाल क्षेत्र के रुद्रप्रयाग, चमोली और अन्य जिलों में प्रस्तावित बैठकों को केवल संगठनात्मक गतिविधि के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह कार्यक्रम स्थानीय भावनाओं को समझने और उनसे जुड़ने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इन इलाकों में धार्मिक आस्था का गहरा प्रभाव है, ऐसे में यहां से सियासी संदेश देना बेहद प्रभावी माना जाता है। कुमारी शैलजा का यह दौरा 6 मई से शुरू होने जा रहा है। वह सबसे पहले )षिकेश पहुंचेंगी, जहां वह रात्रि विश्राम करेंगी। इसके बाद 7 मई से उनके राजनीतिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। इस दिन वह श्रीनगर में जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगी और संगठन की स्थिति का जायजा लेंगी।
8 मई को उनका कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब वह केदारनाथ धाम पहुंचेंगी और वहां पूजा-अर्चना करेंगी। यह दौरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक दृदृष्टि से भी अहम होगा। इसी दिन वह अगस्त्यमुनि में कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगी और इसके बाद रुद्रप्रयाग में भी जिला स्तर के नेताओं के साथ बैठक करेंगी। इसके अगले दिन यानी 9 मई को उनका दौरा चमोली जिले में रहेगा, जहां वह बदरीनाथ धाम पहुंचेंगी और वहीं रात्रि विश्राम करेंगी। 10 मई को सुबह वह बदरीनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी और इसके बाद जोशीमठ में कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगी। इस दौरान पार्टी की रणनीतियों और आगामी चुनावों को लेकर चर्चा की जाएगी।
11 मई को कुमारी शैलजा टिहरी गढ़वाल के चंबा में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगी। इस तरह करीब 5 से 6 दिनों के इस दौरे में वह पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी जैसे महत्वपूर्ण जिलों में जाकर संगठन की स्थिति का आकलन करेंगी और कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलेंगी। हालांकि इस पूरे दौरे का सबसे अहम पहलू बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में होने वाले कार्यक्रम हैं। यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि इसके जरिए कांग्रेस एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह भी आस्था और परंपरा के साथ खड़ी है और जनता की भावनाओं को समझती है।
उत्तराखंड की राजनीति में अब तक भाजपा को ही धर्म के मोर्चे पर मजबूत माना जाता रहा है, लेकिन कांग्रेस ने बदरीनाथ और केदारनाथ धाम से अपने अभियान की शुरुआत कर यह साफ कर दिया है कि वह अब गढ़वाल के धार्मिक महत्व को अपनी सियासत का मुख्य आधार बनाने जा रही है। यह महज एक यात्रा नहीं, बल्कि देवभूमि के जनमानस को यह बताने की कोशिश है कि आस्था पर किसी का एकाधिकार नहीं है।

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