Home उत्तराखंड देहरादून वोटर की नाराजगी किस पर भारी

वोटर की नाराजगी किस पर भारी

0
26


वर्तमान समय में चल रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में सबसे अधिक चर्चा बंपर मतदान को लेकर हो रही है। इन चुनावों के लिए जो कार्यक्रम तय किया गया था उसमें असम, केरल और पांडुचेरी के चुनाव एक ही चरण में संपन्न हो चुके हैं जबकि तमिलनाडु का चुनाव दो चरणों में होने के साथ 23 अप्रैल को पूरा हो चुका है। पश्चिम बंगाल का चुनाव जो दो चरणों में है उसका अब अंतिम चरण का मतदान 29 को होना ही शेष बचा है। इन सभी चुनावोंं में अब तक मतदान का प्रतिशत सामान्य से अधिक रहा है। खास बात यह है कि पश्चिम बंगाल के चुनाव के पहले चरण में वोटरर्स की जो सुनामी देखी गई उसने सारे रिकॉर्ड तोड़कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है यहां पहले चरण में हुए 94 फीसदी मतदान ने सियासी दलों के नेताओं की नींदें उड़ा दी है। इन सभी राज्यों में पश्चिम बंगाल का चुनाव इसलिए सबसे अधिक खास चुनाव बना हुआ है क्योंकि केंद्रीय सत्ता पर आसीन भाजपा पिछले दो विधानसभा चुनावो में ममता बनर्जी और उनकी टीएमसी की सरकार को उखाड़ फेंकने की तमाम कोशिशों में नाकाम रही है। ममता बनर्जी जो 15 सालों से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर कब्जा किए हुए हैं भाजपा के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बनी हुई है। भाजपा इस बार ममता को हर हाल में सत्ता से बाहर करना चाहती है अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ही उसने संसद का विशेष सत्र बुलाया था लेकिन वह अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सकी। पश्चिम बंगाल के चुनाव में केंद्रीय सुरक्षा बलों की 24 कंपनियां की तैनाती से लेकर एसआईआर में 90 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने तथा तमाम बड़े अधिकारियों को बदलने तक वह सब कुछ किया गया है जो भी वह कर सकती थी। लेकिन इन तमाम कामों से आम आदमी को जिस तरह की समस्याओं से दो—चार होना पड़ा है तथा लाखों लोगों के सामने अपने संवैधानिक अधिकार छीने जाने का जो संभावित खतरा पैदा हो गया है उससे वह अत्यंत ही भयभीत है। यही कारण है कि वह अब सत्ता में बैठे लोगों को अपने वोट की ताकत से अपनी ताकत का एहसास कराने पर आमादा है। पहले चरण में इन मतदाताआें के इतनी बड़ी संख्या में वोट डालने के लिए निकलना भाजपा के लिए बड़ी खतरे की घंटी है इस चरण में कुछ पोलिंग बूथ तो ऐसे भी हैं जहां 98—99 फीसदी तक मतदान हुआ है। लोग वोट डालने के लिए सुबह 7 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक लाइनों में खड़े दिखाई दिए। 29 अप्रैल को अंतिम चरण में भी यहां इतनी ही अधिक मतदान की उम्मीद है। जिसके कारण अब पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के वह डराने धमकाने वाले भाषण भी बन सकते हैं जिसमें वह टीएमसी कार्यकर्ताओं को गुंडे बताने से लेकर उन्हें उल्टा लटका कर सीधा कर देने की बात खुले मंचों से कर रहे हैं तथा सीएम ममता बनर्जी को भी अपने उसी लहजे में दीदी ओ दीदी तथा बंगाल के पुलिस कर्मियों को भी अबे और ओबे जैसे शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं भाजपा नेताओं की यह खीज अब उन पर ही भारी पड़ सकती है चुनावी रिजल्ट पर जो भी सर्वे आ रहे हैं उसमें टीएमसी की जीत के संकेत मिल रहे हैं लेकिन इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा यहां हरियाणा व महाराष्ट्र तथा बिहार की तरह कोई बड़ा खेला भी कर सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here