देहरादून। ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक के विरोध में गांधी पार्क में धरना प्रदर्शन किया गया।
आज यहां गांधी पार्क में उत्तराखंड इंसानियत मंच एवं उत्तराखंड महिला मंच के संयुक्त तत्वावधान में एलजीबीटीक्यू एवं ट्रांसजेंडर समुदाय के समर्थन में एक शांतिपूर्ण धरना—प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह प्रदर्शन हाल ही में राज्यसभा में पारित ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक 2026 के विरोध में किया गया। प्रदर्शनकारियों ने इस विधेयक को ट्रांसजेंडर समुदाय के मौलिक अधिकारों, गरिमा, और आत्म—पहचान के अधिकार पर सीधा आघात बताया। विशेष रूप से वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की कि यह विधेयक आने वाली ट्रांसजेंडर पीढ़ी विशेषकर ट्रांसजेंडर बच्चों के भविष्य पर गंभीर खतरा पैदा करता है। उनका कहना है कि यह कानून सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान तक ही सीमित रहकर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अनावश्यक मेडिकल इंटरवेंशन की प्रक्रिया में धकेल सकता है, जिससे उनके निजता के अधिकार का हनन होता है। इसके अतिरिक्त, इस विधेयक के अंतर्गत सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और पारंपरिक पहचान पर भी कई प्रकार के प्रतिबंध लगाए जाने की आशंका जताई गई। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि कुछ प्रावधानों में 10 से 14 वर्ष तक के कठोर दंड का प्रावधान किया गया है, जो समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है। धरने के दौरान समुदाय के सदस्यों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से इस विधेयक को तत्काल वापस लेने की मांग की। विरोध स्वरूप विधेयक की प्रतीकात्मक प्रतिलिपि का दहन भी किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ट्रांसजेंडर समुदाय, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों ने भाग लिया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल एक समुदाय का नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त समानता, स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकारों की रक्षा का संघर्ष है। उनकी मांग है कि ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक 2026 को तत्काल वापस लिया जाए,आत्म—पहचान के अधिकार की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ट्रांसजेंडर बच्चों के भविष्य एवं निजता के अधिकार की रक्षा की जाए, समुदाय की भागीदारी से संवेदनशील और समावेशी नीति बनाई जाए, “हम अपने अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखेंगे।”




