राज्य में भू माफियाओं का आंतक लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन सरकार इन्हे रोकने में नाकाम साबित हो रही है। हालांकि भू माफियाओं पर लगाम कसने के लिए पुलिस प्रशासन के आलाधिकारियों द्वारा पूर्व समय में एसआईटी का गठन तो किया गया था लेकिन राज्य में सक्रिय भूमाफियाओं की एसआईटी में घुसपैठ को देखते हुए उसे बाद में उसे भंग कर दिया गया। ऐसे में यह बात सामने आयी राज्य में सक्रिय भूमाफियाओं की दादागिरी रोकने में सरकार असमर्थ है क्योंकि उन्हे राज्य के कुछ सफेदपोश लोगों का भी समर्थन प्राप्त है। बीते कुछ दिन पूर्व भूमाफियाओं की प्रताड़ना से परेशान होकर काशीपुर के एक किसान ने नैनीताल के गौलापार में आत्महत्या कर ली गयी थी। हालांकि उसने आत्महत्या से पहले एक वीडियो जारी कर भूमाफियाओं के साथ—साथ पुलिस प्रशासन पर भी गम्भीर आरोप लगाये गये थे। जिसके बाद नींद से जागे शासन प्रशासन द्वारा कुमांऊ आयुक्त की निगरानी में एक जांच समिति गठित की गयी जो अब पुलिस के उन अधिकारियों के बयान दर्ज करा रही है जिनके नाम मृतक किसान द्वारा वीडियों में लिये गये थे। राज्य में ऐसे एक नहीं अनेक मामले है। बात अगर राजधानी देहरादून की की जाये तो यहंा भी भूमाफियाओं द्वारा सफेदपोशों के संरक्षण में बहुत मात्रा में सरकारी और गैर सरकारी जमीनों पर कब्जा किया गया है। पछुवादून से लेकर परवादून में ही अनेको ऐसे मामले सामने आ चुके है जहंा सरकारी व गैर सरकारी जमीनों पर भू माफियाओं का कब्जा है। बीते वर्ष में जब भू माफिया द्वारा नालापानी क्षेत्र के बीचोबीच जंगल में कब्जा करने का प्रयास किया तो क्षेत्रीय जनता भड़क उठी और उन्होने जब इसका विरोध किया तब जाकर प्रशासन हरकत में आया और वह कब्जा छुड़ा दिया गया। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या राज्य सरकार ऐसे भू मफियाओं को रोकने के लिए कुछ करेगी भी या नहीं। या फिर यह भू माफिया सरकारी और गैर सरकारी जमीनों पर यूं ही कब्जा करते रहेगें यह सरकार को सोचने की जरूरत हैं।




