सुस्वागतम 2026

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भले ही नव वर्ष 2026 का आगाज बने कोहरे और आसमान में धुंध के बीच हुआ हो लेकिन नए साल का नया सूरज अब अपनी स्वर्णिम आभा के साथ हमारे सामने है। 2026 के आगाज से पूर्व देश और दुनिया के सामने बीते कुछ समय में ऐसी स्थितियां परिस्थितियां पेश आई है कि उन्होंने देश की सत्ताधारी मोदी सरकार और भाजपा के सामने जो गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी है उनसे भाजपा के वह नेता जिन्हें आपदा में भी अवसरों की तलाश करने में माहिर समझा जाता था उन्हें यह समझ ही नहीं आ पा रहा है कि वह 2026 का स्वागत किस अंदाज में करें। अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स में अगर पहले पन्ने पर लगातार दो दिन से आधे—आधे पेज के आर्टिकल छप रहे है तो यह कम बड़ी बात नहीं है जो अखबार पीएम मोदी के अमेरिका जाने पर एक कालम की खबर छापता हो वह पूरा पेज हिंदुस्तान की भाजपा और संघ तथा देश की राजनीतिक परिदृश्य में हो रहे बड़े बदलाव तथा टूटतेे धर्मनिरपेक्षता के ताने—बाने को लेकर अपनी चिंता जता रहा है तो यह कोई साधारण घटना नहीं है। नेताओं के सेक्स संबंधों को लेकर जो भी खुलासे अंतरराष्ट्रीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक हो रहे हैं उसने देश भर में भूचाल की स्थिति पैदा कर दी है। 2 साल पहले उत्तराखंड के अंकिता भंडारी केस में वीआईपी का नाम बाहर न आने देने और इसे अब एक निष्प्रभावी मुद्दा मान लिए जाने के बाद एक महिला द्वारा जारी ऑडियो वीडियो ने ऐसा तांडव खड़ा कर दिया कि अब भाजपा के सांसद, विधायक और मंत्री तक इस मामले की सीबीआई जांच की मांग के साथ दोषियों को कड़ी सजा कराने की बात कह रहे हैं। सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी जिन्होंने अथक 5 साल के परिश्रम और अकूत पैसा खर्च कर अपने चेहरे को सबसे चमकदार बना लिया था अब उन्हीं पर वीआईपी को बचाने का आरोप लगाया जा रहा है तथा सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर केंद्र के दिग्गज नेताओं की कुर्सियां तो हिलती दिख ही रही है राज्य के कई भाजपा नेता भी रडार पर आ चुके हैं। भाजपा के लिए अंकिता भंडारी का यह मुद्दा अब इतना उग्र रूप ले चुका है कि 2027 में भाजपा की वापसी की संभावनाओं पर पानी फिरता दिख रहा है। अब आने वाले दिनों में कोई न कोई नेता इसे लेकर लेटर बम फाड़ रहा है तो कोई किसी के इस्तीफे की मांग कर रहा है, कई तो इस्तीफे हो चुके हैं। केंद्रीय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक बहुत जल्द किसी बड़े ऑपरेशन की संभावनाओं से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। उधर विपक्ष की सभी ताकतें और सामाजिक संगठन इसे लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की दहलीज तक आ गये हैं और सभी का सिर्फ एक ही कहना है कि यह उनकी अपनी लड़ाई नहीं है राज्य की बेटियों की इज्जत की लड़ाई है जिसे हर राज्यवासी लड़ रहा है। हालात इतनी विकराल हो चुके हैं कि कभी कोई बड़ा धमाका इसे लेकर हो सकता है। देश में सांप्रदायिक हिंसा आगजनी की बढ़ती घटनाएं और उन पर देश से लेकर विदेशों तक से आ रही कड़ी प्रतिक्रियाओं ने भाजपा नेताओं के मानसिक संतुलन को इतना डावंाडोल कर दिया है कि उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए? अब चारों तरफ सवाल ही सवाल है और सत्ता में बैठे लोगों को अब कोई जवाब देते नहीं बन रहा है? इस बीच कुछ अदालती फैसले भी सरकार के लिए सर दर्द बने हुए हैं। ऐसे में भाजपा का 2026 का स्वागत उत्सव भी फीका पड़ गया है।

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