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अंकिता मर्डर केस पर बड़ा खुलासा

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वर्ष 2025 जाते—जाते एक बार फिर उत्तराखंड की सियासत को झकझोर चुका है, 3 साल पूर्व जिस अंकिता भंडारी हत्याकांड ने प्रदेश की जनता को सड़कों को उतरने पर मजबूर कर दिया था उसी सनसनीखेज वारदात में एक वीआईपी का नाम जो अब तक मिस्ट्री बना हुआ था उस पर एक पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की पत्नी के एक वायरल ऑडियो ने तहलका मचा दिया है। जिसको आधार बनाकर बीते कल कांग्रेस के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल द्वारा दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता कर न सिर्फ उस वीआईपी के नाम का खुलासा कर दिया गया है बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे चुनौती दी है कि अगर आरोपी गटृू को गिरफ्तार नहीं किया जाता है और इस मामले की जांच सीबीआई से नहीं कराई जाती है तो कांग्रेस इस मुद्दे पर आर—पार की लड़ाई लड़ेगी। गोदियाल साफ करते हैं कि यह आरोप वह नहीं लगा रहे हैं बल्कि खुद बीजेपी की कार्यकर्ता और नेताओं के हैं। उनका कहना है कि भाजपा की धामी सरकार द्वारा इस मामले को दबाने का हर संभव प्रयास किया गया है। इसका खुलासा करने वाली उर्मिला सनावर सुरेश राठौर की पहली पत्नी है। 17 सितंबर 2022 की इस घटना की सीबीआई जांच की मांग को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जब खारिज कर दिया गया था तब याचिकाकर्ता ने अंकिता के नाम एक खुला खत लिखकर खेद जताया था कि वह उसे न्याय दिलाने और उस वीआईपी को तलाशने में असफल रहे हैं। याचिकाकर्ता का यह पत्र लंबे समय तक चर्चाओं में रहा था। अब देखना होगा कि बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाले पीएम मोदी क्या अपने इस बड़े नेता के खिलाफ सीबीआई जांच की चुनौती को स्वीकार करते हैं या नहीं। रही बात इस वीआईपी के नाम का खुलासा करने वाली उर्मिला सनावर के दावे के सच की तो वह इस बात पर दृढ़ है कि उनके पास इस बात के पक्के सबूत है कि 19 सितंबर 2022 को वनंत्रा में ठहरने वाला वीआईपी कोई और नहीं बल्कि भाजपा का एक बड़ा नेता ही था जो लंबे समय से प्रदेश भाजपा में उच्च पद पर आसीन है। इस मामले में एक बात बड़ी साफ है कि इस मर्डर केस का मोटिव एकदम साफ है। आरोपियों ने अंकिता भंडारी पर इस वीआईपी को स्पेशल सर्विस के लिए दबाव बनाया गया इसका साक्ष्य अंकिता भंडारी के उसे चैट मैसेज से मिलता है जो उसने घटना से पूर्व अपने मित्र पुष्पदीप को किया था। तथा कोर्ट में एक होटल कर्मचारी भी इसकी पुष्टि कर चुका है कि अंकिता ने फोन कर इसकी जानकारी दी थी। यह हैरान करने वाली बात है कि एसआईटी और पुलिस ने इस मामले की जांच सरकार व नेताओं की दबाव में आकर ठीक से नहीं की जिसके कारण अब तक इस वीआईपी का नाम से पर्दा नहीं उठ सका। बात सिर्फ अंकिता भंडारी के मर्डर तक सीमित नहीं है सूबे की राजनीति में अभी एक भाजपा नेत्री अपनी ही नाबालिक बेटी को देह व्यवसाय में धकेलने के मामले में चर्चाओं में रह चुकी है। वहीं भाजपा के नेताओं के हाईवे पर खुले में सेक्स करने से लेकर बिहार चुनाव में नेताओं को लड़कियां उपलब्ध कराई जाने और उनके मौज मस्ती के बड़े मामले का खुलासा दैनिक भास्कर अखबार ने एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए किया था। यहां हम विश्व की राजनीति में चर्चा का विषय बनी एस्टीन फाइल का जिक्र नहीं करना चाहते हैं। देश से लेकर विदेशों तक में चर्चाओं के केंद्र में रहने वाले देश के नेताओं से ही जब बेटीयंा सुरक्षित नहीं है तो फिर आप किस मुंह से महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की बात करते हैं यह एक विचारणीय सवाल है।

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