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झूठ—फरेब, धोखाधड़ी की राजनीति

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क्या भाजपा की राजनीति इवेंट मैनेजमेंट मात्र के सहारे चल रही है? क्या भाजपा के नेता और सरकारों द्वारा योजनाओं के नाम बदलने के अलावा अपनी कोई योजना और विजन नहीं है? या फिर भाजपा की राजनीति बड़े—बड़े झूठे वायदे और लोक लुभावन नारे और स्लोगन ही उसकी पहचान बन गए हैं? अथवा अपने मनगढ़ंत झूठे आंकड़ों का प्रचार प्रसार ही उसकी उपलब्धियों की सूची में दर्ज कराया जा रहा है? क्या उसके नेताओं द्वारा छल कपट से चुनाव जीत कर सत्ता पर कब्जा किया हुआ है? एक नहीं अब अनगिनत सवाल ऐसे हैं जो विपक्षी दलों के नेताओं के लिए तो बड़े राजनीतिक मुद्दे बन ही चुके हैं बल्कि यह सवाल अब आदमी के मन को भी झकझोर रहे है। अभी—अभी केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मनरेगा का नाम बदल दिया गया और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम को हटा दिया गया। सवाल यह है कि सरकार को इसका नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? अगर सरकार को इस योजना में कुछ बदलाव ही करना था तो वह कर सकती थी इसे लेकर तमाम विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए यही इस योजना के नियम कानून में जो बदलाव किया गया उन्हें लेकर भी तमाम आपत्तियां दर्ज कराई जा रही है। अब सरकार द्वारा योजना आयोग की तरह प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमआ) का नाम भी बदल दिया गया है तथा अब पीएमओ को सेवा तीर्थ के नाम से जाना जाएगा। सरकार द्वारा इस तरह के जितने भी फैसले किए जाते रहे हैं उनके पीछे सरकार का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ एक बेवजह का बखेड़ा खड़ा कर लोगों का ध्यान मुख्य मुद्दों से हटाना और विपक्ष को ऐसे ही निरर्थक मुद्दों में उलझाए रखने के सिवाय कुछ नहीं है। देश में की गई नोटबंदी से लेकर जीएसटी तक के अहम फैसले देश की आम जनता और व्यापार तथा उघोग जगत के लिए कितने कल्याणकारी साबित हुए या फिर उन्होंने कैसे आम आदमी की कमर तोड़ी है अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है उघोग धंधों को चौपट किया है तथा लोगों की परेशानियों को कितना बड़ा सामना करना पड़ा है इसको आज हर आदमी भी महसूस कर रहा है। मनरेगा का नाम बदलने से उसके नए नाम पर पोस्टर बैनर और जाब बंाड से लेकर तमाम दस्तावेजों को बदलने पर ही कई हजार करोड़ खर्च हो जाएगा। पीएमओ का नाम बदलकर सेवा तीर्थ किए जाने पर शंकराचार्य अवीमुक्तेश्वर नंद ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पीएम को खत लिखा है कि तीर्थ मतलब क्या होता है? तीर्थ सनातन में उस स्थान को कहा जाता है जहां पानी में नहाने और आचमन करने से हमारे सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। पीएमओ जहां हर तरह के अनैतिक काम हो रहे हैं लोग चमड़े का जूता पहनकर जाते हैं और टिफिन में मांस ले जाते हैं और वहीं बैठकर खाते हैं तब पीएमओ कैसे तीर्थ हो सकता है। उनकी नाराजगी तो यहां तक है कि आप अपने आप को हिंदू बताते हैं और हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं हमें लगता है कि आप हिंदू है ही नहीं। वह कहते हैं पहले आप खुद को हिंदू बनाये। देश की राजनीति में इन दिनों सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर जो अहम मुद्दे तूल पकड़े हुए हैं जिसमें देश में कराई जा रही एस आई आर और वोट चोरी जैसे मुद्दे शामिल है। नेता विपक्ष जिन मुद्दों को अब इतना बड़ा बना चुके हैं कि दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली होती है और संसद में चुनाव सुधारो मेंं एक ऐसी चर्चा जिसमें सत्ता पक्ष के नेताओं को किसी भी सवाल का जवाब देते नहीं बनता है। और वह सार्थक बहस की वजाय अभद्र भाषा और हंगामे पर उतर आते हैं। ऐसे समय में अब सत्ता के पास कुछ खास बचा नहीं है। विकसित राष्ट्र, एक राष्ट्र एक चुनाव, एक विधान और सेवा तीर्थ जैसे मुद्दों पर बात करना और वंदे मातरम जैसे मुद्दों पर संसद में चर्चा करा कर सरकार समय तथा जनता के पैसों की बर्बादी ही कर रही है।

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