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मलबे में दबे लोगों पर सड़क अपराधः गणेश गोदियाल

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  • कर्नल कोठियाल के खुलासे से भाजपा सरकार असहज

देहरादून। धराली आपदा पर कर्नल कोठियाल के बयान से सूबे की राजनीति में एक बार फिर हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई है। कांग्रेसी नेता इसे लेकर हमलावर है तो भाजपा के नेता भी असहज हो चुके हैं।
कर्नल कोठियाल के इस बयान को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि इस बयान ने भाजपा की प्रदेश सरकार के आपदा प्रबंधन की कलई खोल कर रख दी है। उनका कहना है कि कर्नल कोठियाल ने अपने बयान में लगभग डेढ़ सौ लोगों के व मलबे में दबे होने तथा सरकार द्वारा इस मलबे पर सड़क बनवा देने की घटना को एक गंभीर अमानवीय व्यवहार तथा अपराध बताते हुए धराली जाकर इस मामले की सत्यता जानने और उसकी रिपोर्ट तैयार करने की बात भी कही गई है। उनका कहना है कि वह सरकार से मांग करेंगे कि आपदा प्रभावितों की मदद के लिए काम करें।
कर्नल कोठियाल का कहना है कि सेना के जो 10 जवान इस आपदा में लापता हुए थे उनमें से सात के शव तलाश लिए गए लेकिन डेढ़ सौ आम नागरिकों के शव तलाश नहीं किए गए। निश्चित तौर पर शासन प्रशासन में बैठे लोगों तथा राज्य के आपदा प्रबंधन पर यह एक बड़ा सवालिया निशान है। कर्नल कोठियाल जो खुद भाजपा के नेता हैं उनके द्वारा दिए गए इस बयान को हल्के में नहीं लिया जा सकता है अगर कोई विपक्ष का नेता यह आरोप लगाता है तो यह उसका राजनीतिक फायदे के लिए दिया गया बयान बता दिया जाता। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि वह कर्नल कोठियाल से पूछेंगे कि उन्हें यह 147 लोगों के शव मलवे में दबे होने का आंकड़ा कहां से मिला। यहां उल्लेखनीय यह भी है कि आपदा के बाद इस क्षेत्र में शवों की तलाश की कोशिश तो की गई थी लेकिन दो—चार दिन बाद ही यह मान लिया गया था कि कई मीटर मलबे में शवों की तलाश संभव नहीं है। पीड़ित परिवारों ने इसे मजबूरी से संतोष कर लिया था क्योंकि वह भी इतने बड़े मलबे के ढेर में अपनों को नहीं ढूंढ सकते थे। रही बात सड़क बनाने की है तो सरकार को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम का रास्ता खोलने के लिए सड़कों का निर्माण तो करना ही था। लेकिन क्या यह मानवीय आधार से उचित है? दूसरा सवाल यह है कि क्या सरकार को शवों की तलाश को और अधिक गंभीरता से नहीं करना चाहिए था?

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