मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्या युवाओं का आंदोलन खत्म कर युवाओं के साथ मिलकर युवाओं के साथ ही कोई बड़ा राजनीतिक खेला कर दिया है? या फिर इसके पीछे कोई अन्य राजनीतिक खिचड़ी पकाई जा रही है। इस तरह के सवाल बेवजह नहीं उठ रहे हैं। यह तो आम लोग भी जानते हैं कि किसी भी राज्य सरकार को सीबीआई जांच कराने का अधिकार नहीं है। राज्य सरकार तो सिर्फ सीबीआई जांच का प्रस्ताव भर केंद्र सरकार को भेज सकती है। जब तक केंद्र सरकार खास तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय अगर इसकी मंजूरी नहीं देता है तो फिर राज्य सरकार भी कुछ नहीं कर सकती है। लोगों का कहना है कि जो सरकार पेपर लीक की घटना को पेपर लीक की घटना ही मानने को तैयार नहीं थी वह सरकार अगर केंद्र सरकार को अपनी संस्तुति में इसे सामान्य नकल मामले की सीबीआई जांच के तौर पर पेश करती है तो स्वाभाविक बात है कि सीबीआई इस तरह के मामलों की जांच तो नहीं करेगी लोगों का यह भी सोचना है की युवा बेरोजगारों का नेतृत्व करने वाले बाबी पंवार और मुख्यमंत्री धामी के बीच कुछ तो ऐसा है जिसे आम आदमी नहीं समझ सका, क्या बॉबी पवार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह के लिए बैटिंग कर रहे हैं। या फिर युवा बेरोजगारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। दरअसल यह सभी अच्छी तरह से जानते समझते हैं कि ऐसे तमाम मामले बीते दिनों धामी सरकार के लिए मुश्किल पेश करते रहे हैं जिसकी वजह से उनकी छवि का ग्राफ नीचे आया है। आपदा प्रबंधन से लेकर बीते समय में जमीनों के तमाम घोटाले सामने आते रहे हैं। वही एक युवक की आत्महत्या के मामले में भी सरकार पर सवाल उठे थे। अभी सत्र के दौरान विपक्ष के साथ सरकार की तकरार भी सभी ने देखी थी वहीं इस दौरान युवाओं के आंदोलन के दौरान भी हरिद्वार से कुछ छात्रों को लाकर जो प्रयास किया गया उससे भी सरकार पर सवाल उठते रहे हैं। मुख्यमंत्री अपनी छवि को चमकाने के लिए जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा किस तरह से मीडिया मैनेजमेंट पर खर्च कर रहे हैं इसका भी खुलासा हो चुका है। धामी सरकार द्वारा प्रतिदिन 5—5 लाख रुपए के विज्ञापन देने की जानकारी भी सार्वजनिक हो चुकी है। यह स्वाभाविक है कि पार्टी के अंदर से नेताओं द्वारा धामी की घेराबंदी किए जाने से वह असहज तो थे। इन सभी मुद्दों को पीछे धकेलने के लिए सीबीआई जांच का दांव खेला जा सकता है, यह लोगों की सोच है। जो एक हद तक ठीक भी हो सकती है। क्योंकि सीबीआई जांच के फैसले के बाद अब अन्य सभी मुद्दे पीछे धकेल दिए गए हैं। युवा बेरोजगार भी धामी की जय जयकार कर रहे हैं और पार्टी के वह नेता जो इस मामले में उन्हें फंसा हुआ मान रहे थे वह भी सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद खामोश बैठ गए हैं।




