देश के संसदीय इतिहास में उत्तराखंड राज्य के नाम यूं तो अनेक उपलब्धियां दर्ज हैं लेकिन अब इस राज्य के नाम एक और नया रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग देश का पहला ऐसा आयोग बन गया है जिस पर देश की सर्वाेच्च अदालत द्वारा नियम विरुद्ध काम करने का दोषी पाए जाने के कारण दो लाख रूपये का जुर्माना ठोक दिया गया है। सही मायने में यह वोट चोरी का ही एक ऐसा मामला है जिसे कांग्रेस नेताओं की सजकता के कारण पकड़ा जा सका है। आपको याद होगा कि अभी राज्य में जब त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हुए थे तब वोटर लिस्ट में एक व्यक्ति का नाम कई जगह होने का मामला सामने आया था जिसे लेकर कांग्रेस ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, हाई कोर्ट द्वारा इस पर सुनवाई करते हुए निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए गए थे कि वह चुनाव को रद्द तो नहीं कर सकते लेकिन चुनाव पंचायत एक्ट के नियमों के अनुसार ही होने चाहिए। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद भी राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा एक सरकुलेशन जारी किया गया कि जिन लोगों के अलग—अलग मतदाता सूचियों में कई जगह नाम दर्ज हैं उनके नामांकन पत्रों को खारिज नहीं किया जाए और हुआ भी वैसा ही। लेकिन जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो उसने इसे एक ही झटके में गलत बताते हुए कहा कि जब एक व्यक्ति एक वोट का संवैधानिक अधिकार है तो यह कैसे हो सकता है कि कोई व्यक्ति दो जगह वोट डाल सके यह तो गलत है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश का भी परीक्षण किया। तो उसमें भी साफ कहा गया था कि चुनाव पंचायती एक्ट के नियम के कानून के दायरे में ही होने चाहिए। दरअसल इसके पीछे की कहानी बहुत दिलचस्प है। पंचायत चुनाव से पूर्व हुए निकाय चुनाव जीतने के लिए गांवों से बड़ी संख्या मेे राज्य में मतदाताओं के नाम शहरों की मतदाता सूची में जोड़े गए थे। लेकिन पंचायत एक्ट की 916 तथा 917 में दर्ज व्यवस्था में 6 माह में एक ही पते में रहने वाले नाम ही दोबारा सूची में जुड़वाये जा सकते थे जिसके लिए समय पूरा न हो होने के कारण इन मतदाताओं के नाम नए वोटर के तौर पर ही जुड़वा दिए गए बस यही कहानी खराब हो गई। कांग्रेस ने ऐसे तमाम वोटरों की सूची बना डाली जिनके नाम दो—दो, तीन—तीन सूचियाें में दर्ज थे। कांग्रेस नेताओं ने इस खेल को पकड़ ही नहीं लिया गया सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया और भाजपा के उसे रहस्य से पर्दा उठ ही गया कि भाजपा कैसे हर चुनाव जीत जाती है। पीएम मोदी व गृहमंत्री अमित शाह जो संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष को 50 साल तक विपक्ष में बैठने की आदत डालने की जो बात कहते हैं उनके पास यह ताकत आती कहां से है? वह क्यों इतनी आसानी से कह देते हैं कि तुम किसी को भी वोट डाल दो जीतेगी तो भाजपा ही। दरअसल मुख्य निर्वाचन आयोग में आयुक्त की नियुक्तियाेंं से लेकर राज्य निर्वाचन आयोग तक जो भाजपा की पकड़ है तथा यूथ से लेकर पन्ना प्रमुख तक चौकसी है। गांव के मतदाताओं को शहर तक और शहर के मतदाताओं को गांव तक पहुंचाने का जो मैनेजमेंट है वहीं भाजपा की डबल इंजन व ट्रिपल इंजन सरकारों का रहस्य है जो अब परत दद परत सामने आ रहा है।




