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थम नहीं रही तबाही

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आधा सितंबर माह बीत चुका है लेकिन उत्तराखंड में आसमान से बरस रही आफत थमने का नाम नहीं ले रही है। राज्य के पहाड़ी जिलों का तो हाल बेहाल है ही, सूबे के मैदानी जिलों में भी इस मानसूनी आपदा का भारी असर देखने को मिल रहा है। बीती रात देहरादून के कई क्षेत्रों में भारी बारिश से लोगों की जान पर बन आई। मसूरी मे मलबे में  दब कर एक मजदूर की मौत हो गई वहीं देहरादून के सहस्त्रधारा के एक गांव में बादल फटने से बाजार में भारी मलवा आ गया और दो—तीन होटल तथा आधा दर्जन से अधिक दुकानों को नुकसान पहुंचा है। क्षेत्र वासियों ने 100 से अधिक लोगों को रेस्क्यू कर बाहर निकाला जबकि दो लोग अभी भी लापता बताये जा रहे हैं। यह घटना रात 12 बजे की बताई जा रही है। कंट्रोल रूम को इसकी सूचना तो मिली लेकिन राहत व बचाव टीमें आईटी पार्क क्षेत्र में भारी बारिश से आए मलवे के कारण दुर्घटना स्थल तक तत्काल नहीं पहुंच सकी। उधर कैंट क्षेत्र में भारी बारिश से तमसा नदी में आए भारी पानी से प्रसिद्ध टपकेश्वर महादेव मंदिर परिसर में कई फीट पानी भर गया। गुफा और मंदिर परिसर में भारी पानी आने से पुजारी और साधु संतों ने जैसे तैसे अपनी जान बचाई। राज्य में इस साल बारिश ने बीते समय के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं राज्य में 100 फीसदी से भी अधिक बारिश हो चुकी है। तथा इस दौरान राज्य के लोग धराली और थराली तथा बागेश्वर जैसी आपदा का सामना कर चुके हैं। जहां अभी तक स्थितियां सामान्य नहीं हो सकी है। राज्य की तमाम प्रमुख सड़कों सहित कई सड़के बंद पड़ी हैं। चार धाम यात्रा पर बीते एक माह से ब्रेक लगा हुआ है। बीती रात देहरादून में हुई भीषण बारिश के करण तमसा और सौंग नदी का रौद्र रूप लोगों को डरा रहा है। खास बात यह है कि अभी भी राज्य में आपदा का कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है। राजधानी दून के सभी 12वीं तक के स्कूलों को आज बंद रखने के आदेश दिए गए हैं क्योंकि मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। राज्य की सभी प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान पर है तथा तराई और मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। राज्य को इस साल इस आपदा के कारण भारी जनधन की नुकसान हुआ है उसे देखते हुए जो राहत उन्हें दी जा रही है वह ऊंट के मुंह में जीरा ही साबित हो रही है। राज्य के कई गांवों का मुख्यालय से संपर्क कट जाने के कारण लोगों के पास आवश्यक जरूरत का सामान भी नहीं पहुंच पा रहा है। कई क्षेत्रों में बिजली और पेयजल का भी संकट पैदा हो चुका है। खास बात यह है कि बचाव राहत का काम भी हर रोज होने वाली बारिश के कारण प्रभावित हो रहा है। बंद सड़कों को खोलने का काम करने में पुरी सरकारी मशीनरी लगी हुई है लेकिन एक जगह रास्ता खुलता है तो दो अन्य जगह बंद हो जाता है। बारिश का यह दौर जब तक नहीं रुकेगा स्थिति में किसी भी तरह के सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती है। हालांकि अब जल्द मानसून की विदाई की बात कही जा रही है लेकिन अभी इसकी कोई भी एक निश्चित तिथि तय नहीं है।

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