काशीपुर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ननकाना साहिब गुरूद्वारे में मत्था टेककर प्रदेश के सुख समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
आज यहां प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नानकमत्ता साहिब बड़ा गुरुद्वारा पहुँचे। मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारा में मत्था टेका व प्रदेश के सुख समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इसके उपरांत उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के चरणों में शत—शत नमन करते हुए, गुरु तेग बहादुर जी के 350 वें शहीदी दिवस पर आयोजित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, अमृतसर द्वारा आसाम से अमृतसर तक नगर कीर्तन (पदयात्रा) में आये सभी संगत सदस्यों एवं उपस्थित महानुभावों का देवभूमि उत्तराखंड के समस्त नागरिकों की ओर से हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि ये मेरा परम सौभाग्य है कि मुझे आज गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के पावन अवसर पर आयोजित शहीदी नगर कीर्तन यात्रा की संगत का हिस्सा बनने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि ये नगर कीर्तन यात्रा असम के श्री धोबड़ी साहिब से प्रारंभ होकर विभिन्न राज्यों से होते हुए श्री आनंदपुर साहिब पहुंचकर पूर्ण होगी जो कि लगभग 2500 किमी. की है। उन्होंने कहा कि ये केवल एक नगर कीर्तन यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, एकता और गुरु साहिब के संदेश जन—जन तक पहुंचाने का पवित्र अभियान है। सीएम धामी ने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने उस संकटपूर्ण कालखंड में अपने प्राणों की आहुति दी, जब हमारे देश की संस्कृति, धर्म और आत्मसम्मान पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था। उन्होंने कहा कि मात्र 14 वर्ष की अल्पायु में ही गुरु तेग बहादुर जी ने अपने पिता के साथ मुगलों के खिलाफ युद्ध में अद्वितीय वीरता का परिचय दिया, उनकी वीरता से प्रभावित होकर उनके पिता ने ही उनका नाम ट्टतेग बहादुर’ अर्थात ट्टतलवार का धनी’ रखा था। उन्होंने कहा कि तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों पर हो रहे औरंगजेब के अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए कहा था कि ट्टमैं हिंदुओं का पीर हूँ किसी हिन्दू से पहले मुझे मुस्लिम धर्म कबूल करा कर दिखाए..। औरंगजेब ने षड्यंत्रपूर्वक गुरु तेग बहादुर जी को दिल्ली बुलवाया और उन्हें बंदी बना लिया। फिर फरमान सुनाया या तो इस्लाम स्वीकार करो, या मृत्यु का वरण करो। जिस पर गुरु श्री तेग बहादुर जी ने कहा था, तिलक जंजू राखा प्रभ ताका। कीनो बडो कलू महिं साका। धरम हेत साका जिनि कीआ। सीसु दीआ परु सिररु न दीआ। उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी और उनके साथियों ने इस्लाम स्वीकार करने से इनकार कर दिया, तो उन पर घोर अत्याचार किए गए, उनके किसी शिष्य को खौलते हुए तेल में डाला गया, तो किसी को आरी से चीर दिया गया इतने से भी जी नहीं भरा तो किसी को जीवित ही जला डाला गया। अंततः, गुरु तेग बहादुर जी जैसे महान संत, धर्मरक्षक और मानवता के प्रहरी का शीश काट दिया गया परंतु गुरु साहब का साहस, बलिदान और संदेश अमर हो गया। उन्होंने कहा कि गुरु साहब के बलिदान ने ये बता दिया कि धर्म की रक्षा के लिए प्राण देना पुण्य है और अत्याचार के सामने सर झुकाना अधर्म है। यही कारण है कि उन्हें ट्टहिन्द दी चादर’ के रूप में याद किया जाता है। इस अवसर पर विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, मेयर दीपक बाली, दर्जा राज्यमंत्री अनिल कपूर डब्बू, फरजाना बेगम, पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीमा, राजेश शुक्ला जिलाध्यक्ष मनोज पाल, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा सहित ननकना साहिब बड़ा गुरुद्वारा के प्रबंधक कमेटी व अनेक श्रद्धालुगण मौजूद थे।




