May 27, 2026देश की युवा शक्ति सरकार और सिस्टम से इस कदर नाराज है कि अब उसका आक्रोश सड़कों पर उतर आया है। युवाओं का यह गुस्सा बेवजह नहीं है। दिन—रात मेहनत करने के बाद उन्हें अपना भविष्य अंधकार मेंं दिख रहा है। अभी बीते दिनों नीट की परीक्षा का पेपर लीक हो गया जिसके कारण 50 लाख युवाओं की मेहनत पर पानी फिर गया अब नीट की परीक्षा दोबारा होगी। अभी सीबीएसई के पेपर में धांधली की खबरें आई थी। अपने परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट छात्रों ने जब पुर्न मूल्यांकन के लिए अपनी परीक्षा पुस्तिका मांगी तो वार्डन ने उन्हें ऐसी कॉपियां थमा दी जिसमें पहला पन्ना उनके नाम और रोल नंबर का, बाकी अंदर किसी अन्य छात्र की उत्तर पुस्तिकाएं थी कई मामले इस तरह के सामने आने पर अभी हंगामा चल ही रहा था कि एसएससी कांस्टेबल जीडी की परीक्षा जो बीते कल होनी थी उसके परीक्षा केंद्रो पर क्षमता से दो—दो गुने ज्यादा छात्रों को बुला लिए जाने से जो हंगामा हुआ तो युवाओं ने परीक्षा केंद्रो पर भारी तोड़फोड़ की कंप्यूटर से लेकर सीपीयू और फर्नीचर सबको तोड़फोड़ डाला गया तथा हाईवे तक को जाम कर दिया गया इस परीक्षा में 50 लाख से अधिक छात्र—छात्राओं को परीक्षा देनी थी लेकिन यूपी से लेकर बिहार तक भयंकर अव्यवस्थाओं और नकल के चलते इतना हंगामा बरपा कि इस परीक्षा को भी रद्द करना पड़ा। जो बेरोजगार इससे आस लगाए बैठे थे कि उन्हें रोजगार मिलेगा वह यह कहते दिखे कि सरकार और सिस्टम ने सचमुच में हमें कॉकरोच बना दिया है। जो अपने भविष्य की तलाश में सालों साल इधर—उधर भटकते रहते हैं और सरकार तथा उसका सिस्टम इस कदर नकारा निकम्मा या फेल हो चुका है कि वह एक परीक्षा भी ठीक से नहीं करा सकता है ऐसी सरकार और व्यवस्था का क्या फायदा है। पहले जैसे तैसे अपनी पढ़ाई पूरी करो और जब काम के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करो और जब परीक्षा के समय आए तो कभी पेपर लीक तो कभी यह अव्यवस्था और परीक्षा रद्द। और फिर इसी क्रम को क्रमशः दोहराते रहो। अभी जब नीट का पेपर लीक हुआ था तब छात्रों के आत्महत्याओं के कई मामले सामने आए जो लगातार जारी हैं। कई छात्रों के सुसाइड नोट तो दिल दहलाने वाले थे। देश की शिक्षा व्यवस्था और कर्मचारी चयन आयोग में व्याप्त भ्रष्टाचार द्वारा देश के युवाओं के साथ जिस तरह से खिलवाड़ किया जा रहा है वह वास्तव में उनके लिए अब असहनीय हो चुका है। सिस्टम पर सवाल उठाने वालों पर पुलिस की लाठियां चलाई जा रही है ऐसी स्थिति में अब अगर न्यायपालिका उन्हें परजीवी व कॉकरोच जैसी शब्दावली से नवाज रही है तो इन युवा कॉकरोचो की भीड़ का सड़कों पर तांडव स्वाभाविक है। कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने लाखों समर्थकों को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है लेकिन सरकार मौन साधे हुए हैं शायद उसे लग रहा है कि शिक्षा मंत्री को हटाया तो कॉकरोचों का हमला और अधिक तेज हो जाएगा। लेकिन सत्ता में बैठे इन नेताओं को इस मुगालते में भी नहीं रहना चाहिए कि वह किसी हिट से इन्हें हिट करेंगे तो वह मर जाएंगे या कहीं छिपने की भी जगह उन्हें नहीं मिलेगी। देश की 50 करोड़ की इस युवा आबादी की बात सत्ता में बैठे लोगों को सुननी चाहिए। रोजगार मेलों का आयोजन कर पीएम व सीएम हजार—दो हजार लोगों को कई सालों इंतजार के बाद नियुक्ति पत्र देकर अपनी नाकामी को नहीं छुपा सकते। कॉकरोचों से पंगा सरकार को बहुत भारी भी पड़ सकता है।
May 26, 2026देहरादून। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि मौसम विज्ञान केन्द्र से जारी पूर्वनुमान के अनुसार उत्तराखण्ड राज्य में आगामी दिनों में तापमान में वृद्धि की सम्भावना है।आज यहां राजपुर रोड स्थित वन विभाग के मुख्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि पृथ्वी के बढते तापमान लम्बे समय तक सूखा, अनियमित मॉनसून, अल नीनो और अन्य कारणों से उत्तराखण्ड के वनों में वनाग्नि की घटनाएं बढी हैं। उन्होंने बताया कि वनाग्नि की स्थित से निपटने के लिए उत्तराखण्ड शासन द्वारा वर्ष 2003 में ट्टवनाग्नि’ को ट्टदैवीय आपदा’ की श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मौसम विज्ञान केन्द्र से जारी पूर्वनुमान के अनुसार उत्तराखण्ड राज्य में आगामी दिनों में तापमान में वृद्धि की सम्भावना है। विगत वर्षो की वनाग्नि घटनाओं के अनुसार हर एक—दो साल के अन्तराल बाद वनाग्नि घटनाओं में वृद्धि देखी गयी है। उनियाल ने बताया कि वनाग्नि प्रबन्धन व नियंत्रण हेतु वन विभाग, उत्तराखण्ड शासन के साथ—साथ विभिन्न संस्थाओं, एजेंसियों, स्थानीय स्तर पर जन जागरूकता अभियान, प्रचार—प्रसार एवं आम—जन—मानस के सहयोग एवं समन्वय से वनाग्नि नियंत्रण के प्रयास एवं नवाचारों को अपनाने का कार्य कर रहा है। उनियाल ने बताया कि प्रदेश के समस्त जनपदों में वनाग्नि मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। वन विभाग के उच्चाधिकारियों को जनपद नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया जिससे वनाग्नि शमन हेतु अन्य विभागों से समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
May 26, 2026नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सघः प्रकाशित पुस्तक ‘अपनापन नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ के लोकार्पण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।आज यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में आयोजित केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सघः प्रकाशित पुस्तक ट्टअपनापन नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ के लोकार्पण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। यह गरिमामयी समारोह भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू तथा पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। ट्टअपनापन’ एक प्रेरणादायी कृति है, जिसमें शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ विभिन्न भूमिकाओं में प्राप्त अनुभवों का सजीव वर्णन किया गया है। पुस्तक में नेतृत्व, सेवा, सुशासन एवं राष्ट्र—निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण विचारों को सरल एवं प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया गया है। मुख्यमंत्री ने पुस्तक के प्रकाशन पर शिवराज सिंह चौहान को शुभकामनाएं दीं तथा इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, भारत सरकार के अनेक मंत्री, विधायक, सांसद, समाजसेवी, लेखक—पत्रकार एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
May 26, 2026देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने ईद—उल—जुहा (बकरीद) के सार्वजनिक अवकाश की तारीख में बड़ा बदलाव किया है। शासन द्वारा जारी संशोधित अधिसूचना के अनुसार अब राज्य में 27 मई 2026 की जगह 28 मई 2026 (बृहस्पतिवार) को सार्वजनिक अवकाश रहेगा।उत्तराखंड शासन के प्रशासन विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि पहले जारी अधिसूचना के अनुसार बकरीद के लिए 27 मई 2026 को अवकाश घोषित किया गया था, लेकिन सम्यक विचार के बाद अब अवकाश की तारीख बदलकर 28 मई 2026 कर दी गई है। शासन ने निगोशिएबुल इन्स्ट्रूमेंट एक्ट 1881 की धारा 25 के तहत राज्य के सभी बैंक, कोषागार और उप—कोषागारों में भी 28 मई को अवकाश घोषित किया है। यानी इस दिन सरकारी दफ्तरों के साथ—साथ बैंकिंग सेवाएं भी प्रभावित रहेंगी। इस संबंध में शासन ने उत्तराखंड शासन के सभी प्रमुख सचिवों, जिलाध्रिकारियों, विभागाध्यक्षों, पुलिस महानिदेशक और रिजर्व बैंक समेत विभिन्न विभागों को आदेश की प्रतिलिपि भेज दी गयी है।
May 26, 2026चमोली/देहरादून। देशभर में लगातार बढ़ती तेल कीमतों के बीच उत्तराखंड में भी ईंधन संकट गहराने लगा है। खासतौर पर चारधाम यात्रा मार्ग पर पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। बदरीनाथ, केदारनाथ यात्रा मार्ग के कई पेट्रोल पंप सूख चुके हैं, जबकि कई जगह सीमित मात्रा में ही तेल दिया जा रहा है।चारधाम यात्रा के चरम पर पहुंचने के साथ ही चमोली जिले में ईंधन संकट गंभीर होता जा रहा है। बदरीनाथ स्थित जीएमवीएन पेट्रोल पंप पर प्रशासन ने पेट्रोल और डीजल की सीमा तय कर दी है। यहां एक वाहन को अधिकतम 800 रुपये का पेट्रोल और 1000 रुपये का डीजल ही दिया जा रहा है।ज्योतिर्मठ के एकमात्र पेट्रोल पंप पर तेल खत्म होने के बाद यात्रियों ने नाराजगी जताते हुए पुलिस के सामने नारेबाजी भी की। प्रशासन ने यात्रियों से अनावश्यक ईंधन भंडारण न करने और अफवाहों से बचने की अपील की है। वहीं चारधाम यात्रा मार्ग के प्रमुख पड़ावों पर भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। श्रीनगर शहर के पांच में से चार पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल खत्म हो गया। रुद्रप्रयाग में कई पंपों पर सीमित मात्रा में तेल दिया जा रहा है। पीपलकोटी और ज्योतिर्मठ में यात्रियों को लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है। यहंा कई यात्री घंटों इंतजार के बाद भी तेल नहीं भरवा सके।पूर्ति विभाग के अनुसार रविवार को ईंधन टैंकर समय पर नहीं पहुंच पाए, जिससे संकट और गहरा गया। प्रशासन का कहना है कि भुगतान और आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव के कारण अस्थायी समस्या उत्पन्न हुई है। हालांकि जल्द आपूर्ति सामान्य करने का दावा किया जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, कीमतें बढ़ने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन करीब 600 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। एलपीजी सिलेंडर पर भी कंपनियों को घाटा उठाना पड़ रहा है।
May 26, 2026जनतंत्र (लोकतंत्र) जनता पर आधारित शासन व्यवस्था होती है तथा किसी भी राष्ट्र में सत्ता द्वारा जन भावनाओं के अनुरूप काम करना ही उसकी लोकप्रियता को निर्धारित करता है। जनतंत्र में जनता को सिर्फ अपनी सरकार चुनने का ही अधिकार नहीं होता है अपितु समाज और राष्ट्रहित में काम न करने वाली सरकार को बदलने का भी अधिकार होता है। मगर आजादी के अमृतकाल में जनता को उसके सबसे बड़े संवैधानिक अधिकार से वंचित किया जा चुका है। वर्तमान दौर में सरकारें अगर जनमत से चुनी जा रही होती तो सत्ता में बैठे लोग इस बात का दावा नहीं कर सकते थे कि आप वोट चाहे जिसे दे सरकार तो भाजपा की ही बनेगी या फिर किसी भी समुदाय विशेष को यह कहकर धमका नहीं पाते कि उन्हें उनके वोट की जरूरत नहीं है। इसलिए अब किसी को भी इस मुगालते में रहने की जरूरत नहीं है कि देश में लोकतंत्र है और जब लोकतंत्र ही नहीं बचा है तो आपके संवैधानिक अधिकार की बात भी बेमानी हो जाती है। सत्ता का बेखौफ होना और मनमाने तरीके से फैसला लेना तथा किसी की भी बात को गंभीरता से न लेना स्वाभाविक ही है। सत्ता में बैठे लोगों को अब किसी भी विपक्ष दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं के विरोध—प्रदर्शनों तथा जनता के आक्रोश और गुस्से का भी उस पर कोई असर नहीं दिखाई देता है। आम जनता और विपक्ष के नेता सब सत्ता के ठेंगे पर हैं। इन दिनों काकरोच जनता पार्टी को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हो रही है। इनका सत्ता पर क्या असर पड़ा है इस सवाल को लेकर भले ही देश का सोशल मीडिया चिल्लाता रहे कि सरकार डर गई मगर यह झूठ है। दो करोड़ कॉकरोच अगर पेपर लीक मुद्दे को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और वह अपने पद पर बने हुए हैं या उन्हें हटाना भी सरकार जरूरी नहीं समझ रही है तो इसका सीधा अर्थ है कि सरकार को किसी भी बात या विरोध प्रदर्शन से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। ऐसा नहीं है कि यह कोई पहला मुद्दा है। देश में महिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोपों से घिरे बृजभूषण के खिलाफ सत्ता में बैठे लोगों ने कब किसकी बात सुनी थी। देश के जो किसान अपनी जायज मांगों को लेकर सालों तक सड़कों पर पड़े रहे और 700 किसान मर—खप गए तब क्या सत्ता ने उनकी बात सुनने या मानने की जरूरत समझी थी। जन उपेक्षा के इस तरह के एक नहीं तमाम उदाहरण मौजूद है। बीते 12 सालों में अब तक किसी एक भी मंत्री ने किसी बात की नैतिक जिम्मेवारी ली और अपने पद से इस्तीफा दिया या सरकार ने उससे इस्तीफा देने को कहा। मणिपुर में जो कुछ भी हुआ वह इतना अधिक शर्मनाक था कि देश ही नहीं विदेशों तक इन घटनाओं को लेकर भारत की छवि धूल दूषित हुई लेकिन केंद्र सरकार पर क्या कुछ फर्क पड़ा? हरियाणा, महाराष्ट्र तथा बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों को लेकर भले ही कितनी भी आपत्तियां निर्वाचन आयोग और न्यायालय तक पहुंची हो लेकिन इस पूरी कवायद का सरकार पर क्या कोई फर्क पड़ा? महिलाओं को खुश करने के लिए सरकार नारी वंदन बिल भले ही ले आई हो लेकिन क्या उन्हें आरक्षण मिल सका? महिलाओं के वोट बटोरने की तमाम ऐसी योजनाएं लाकर जिसमें चुनाव के दौरान उनके खातों में सीधे रकम भेजी गई क्या उस पर कोई पाबंदी लगा सका? सौ बातों की एक सीधी बात यह है कि जनता सत्ता के ठेंगे पर है। कोई भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। ऐसे में कॉकरोच भी क्या कर लेंगे? अभी सिर्फ उनके मीडिया अकाउंट बन्द किए गए हैं फिर भी नहीं मानेंगे तो जेल में डाल दिए जाएंगे। यही तो है इस देश का आज का लोकतंत्र।