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जितेंद्र की आत्महत्या संवेदनशील मुद्दा

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  • आरोपी हिमांशु की हिमायत क्यों कर रही है भाजपा?
  • भाजपा स्वीकार करें आरोपी भाजपा का पदाधिकारी

देहरादून। डोईवाला निवासी जितेंद्र नेगी ने खुद को गोली मार कर भले ही अपनी जीवन लीला को समाप्त कर लिया गया। आत्महत्या से पूर्व मृतक ने खुद एक वीडियो बनाकर अपनी आत्महत्या के लिए जिस हिमांशु को सबूत सहित जिम्मेवार ठहराया गया है वह अब कानून की गिरफ्त में है। लेकिन प्रदेश के भाजपा नेता जिस तरह से हिमांशु को जानने पहचानने से इन्कार करते हुए अपना पल्ला झाड़ने की कोशिशें कर रहे हैं तथा विपक्ष और मीडिया पर राजनीति व निजी लाभ उठाने का आरोप लगाया जा रहा है वह अत्यंत ही हास्यास्पद है। जबकि प्रदेश भाजयुमो के अध्यक्ष शशांक रावत हिमांशु चमोली को प्रदेश भाजयूमो के मंत्री पद से हटाने का पत्र जारी करके खुद ही इस बात का सबूत दे चुके हैं कि वह भाजपा का सामान्य कार्यकर्ता नहीं प्रदेश संगठन में पदाधिकारी है। यह बात अलग है कि वह सीएम धामी का ओएसडी भले ही न हो। लेकिन हिमांशु की प्रधानमंत्री के साथ से लेकर तमाम बड़े केंद्रीय व प्रदेश के नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें इस बात की गवाही देती है कि उसकी भाजपा में कितनी गहरी पैठ है।
आत्महत्या करने वाले युवक का वीडियो और हिमांशु चमोली पर लगाए गए आरोप अत्यंत ही गंभीर है जो मरने वाले के साथ हुए अत्याचारों की गवाही खुद ही दे रहे हैं। भाजपा के नेता अब इस अति संवेदनशील मामले में भी अगर यह कहकर कि यह तो लेनदेन करने वाले की चूक है, अपना पल्ला भला कैसे झाड़ सकते हैं। यह वास्तव में कोई चूक नहीं एक प्रकार से ठगी है और जिसको अंजाम भाजपा के पदाधिकारी द्वारा किया गया है। हिमांशु चमोली को सिर्फ पद से हटाना काफी नहीं है। भाजपा नेताओं को तो इस तरह के गंभीर आरोपों में फंसे अपने पदाधिकारी को सजा दिलवाने और पीड़ित जितेंद्र नेगी के परिवार के साथ खड़ा होने की जरूरत थी। जिन्होंने अपने परिवार के युवा बेटे को खो दिया है।
भाजपा नेता इसके उलट लोगों को यह ज्ञान तो दे रहे हैं कि उन्हें किसी के भी साथ भी लेन—देन करने से पूर्व उस व्यक्ति की सत्यता को जांच करनी चाहिए। क्या भाजपा का यह उत्तरदायित्व नहीं है कि वह भी किसी को पद देने से पहले अपने कार्यकर्ताओं के आचरण की जांच पड़ताल करें। भले ही उन कार्यकर्ताओं की न सही जिनकी संख्या लाखों व करोडों बताई जाती है लेकिन कम से कम पदाधिकारी की जांच तो कर ही सकती है। रही बात कानून की तो कानून तो अपना काम करेगा ही। इस मामले में भाजपा की छवि को भी कुछ नुकसान होगा ही।

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