- मारपीट, अपहरण और गोलीबारी से सनसनी
- हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान, डीएम को दिए निर्देश
देहरादून। उत्तराखंड में आज जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। लेकिन मतदान शुरू होने से पूर्व आज नेता विपक्ष यशपाल आर्य का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें उनके द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस पर गुंडागर्दी करने का आरोप लगाये जा रहे हैं। वह मीडिया के सामने कह रहे हैं कि लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई जा रही है। उनके पास पिस्टल है मारपीट कर रहे हैं। चार सदस्यों को जबरन घसीट कर अपहरण कर ले जाया गया है। कांग्रेस की महिला प्रत्याशी को थप्पड़ मारे गए हैं। मेरे साथ तथा संजीव आर्य व सुमित हृदेयश के साथ भी मारपीट की गई। ऐसा ही एक वीडियो उधम सिंह नगर से राजकुमार ठुकराल का आया है जो प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं कि विजयी सदस्यों को जिलाधिकारी द्वारा जीत का प्रमाण पत्र हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं दिया गया है।
सवाल यह है कि क्या उत्तराखंड भी उत्तर प्रदेश व बिहार, हरियाणा बन चुका है। जहां चुनाव में जिसकी लाठी उसकी भ्ौंस जैसी कहावतों को चरितार्थ होते देखा जाता रहा है। उधर आज एक और वीडियो बेतालघाट से सामने आया है जिसमे खुलेआम गोलियां चलाई जा रही है। अराजकता का ऐसा माहौल देवभूमि में शायद इससे पहले कभी नहीं देखा गया, जिस तरह की अराजकता इस चुनाव में देखी जा रही है।
अभी—अभी खबर मिली है कि इस तरह की घटनाओं के सामने आने पर नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार और नैनीताल के जिलाधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वह पूरी स्थिति से उन्हें अवगत कराये तथा अपहरण कर ले जाए गये जिला पंचायत के सभी सदस्यों की उपस्थिति का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा सुनिश्चित करें। दरअसल नैनीताल की घटना में यशपाल आर्य जब मीडिया को आप बीती सुना रहे होते हैं तभी उनका एक समर्थक फोन उनके हाथ में देते हुए कहता है कि डीजीपी है बात करो जो कुछ आर्य द्वारा पत्रकारों को बताया जा रहा था उसे डीजीपी भी फोन पर सुन रहे होते हैं। नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रूख अपनाते हुए चुनाव को रद्द करने तक की बात कह दी गई। अगर चुनाव ऐसे ही कराये जाने थे तो फिर चुनावी ड्रामे की जरूरत ही क्या थी देखना होगा कि अब नैनीताल हाई कोर्ट जिसके पास पंचायत चुनाव में गड़बड़ी की शिकायतों का पहले से ढेर लगा हुआ है अब क्या फैसला लेता है।




