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चुनाव व लोकतंत्र खेल तमाशा नहीं

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अभी देश के लोगों ने ऑपरेशन सिंदूर पर हुई लंबी संसदीय चर्चा के दौरान देश के सत्ता शीर्ष पर 11 सालों से बैठे भाजपा नेताओं और विपक्ष के नेताओं को सुना और अब बिहार चुनाव से वहां निर्वाचन आयोग द्वारा कराए जाने वाले एसआईआर (विशेष गहन मतदाता सूची परीक्षण) के मुद्दे पर संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में चल रही कार्यवाही को देश के लोग देख रहे हैं। बीते कल इस मुद्दे को लेकर नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा खुलेआम चुनाव आयोग को चुनौती दी गई है कि वह लोगों के वोट की चोरी करने वाले किसी भी अधिकारी को छोड़ेंगे नहीं। उनके पास इस वोट चोरी के बहुत सारे प्रमाण हैं जिनका खुलासा किसी बम विस्फोट से कम नहीं होगा। भले ही लोग यह समझ रहे हो कि नेता विपक्ष हवा हवाई बातें कर रहे हैं लेकिन कोई भी नेता इतनी दमदारी से कोई झूठी अफवाह नहीं फैला सकता है क्योंकि इस समय केंद्र में एक ऐसी सरकार है इसके विरोध में एक शब्द भी बोलने या लिखने वाले को कैसे जेल भिजवाया जा सकता है इस सत्य को आज पत्रकारों से लेकर हर एक नेता और आम आदमी तक बखूबी जानता समझता है और जो लोग नहीं जानते हैं उन्हें सोशल मीडिया पर पत्रकार अभिसार शर्मा का वह वीडियो जरूर देख लेना चाहिए जो उन्होंने चंद घंटे ही पहले डाला है। देश के वर्तमान हालात की सच्चाई आपको जरूर पता चल जाएगी कि देश की राजनीति से लेकर पत्रकारिता तक किस स्तर पर क्या—क्या हो रहा है। वह चाहे आम आदमी हो या फिर कोई नेता, उघोगपति हो या व्यवसायी। पत्रकार हो या फिर सोशल एक्टिविस्ट अथवा वह संवैधानिक संस्थाएं जिनका लोकतंत्र में स्वतंत्र अस्तित्व होता है सत्ता का डर हर एक वर्ग के मन में इस कदर हावी है कि वह सत्ता के विरुद्ध एक शब्द भी बोलने का साहस नहीं कर सकता है। स्वर्गीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब देश में इमरजेंसी लगा दी तो लोगों के मन में कुछ इसी तरह का डर देखा गया था लेकिन इस समय भले ही इस तरह की किसी इमरजेंसी की घोषणा न की गई हो लेकिन हालात कितने बदतर है इसका अनुमान आप पत्रकार अभिसार शर्मा के उसे वीडियो से सहज लगा सकते हैं जिसमें वह साफ—साफ कह रहे हैं कि मुझे खत्म करके ही आप मेरी आवाज को रोक सकते हैं। उनकी इस चुनौती के पीछे के डर को आप इस वीडियो में देखकर साफ समझ सकते हैं। अब थोड़ी सी बात उस संविधान की भी कर लेना जरूरी है जिसे बदलने और संविधान की रक्षा करने जैसे मुद्दे भी एक आंदोलन का रूप ले चुके हैं। जिस लोकतंत्र को विश्व का सबसे सफल और पुराना लोकतंत्र होने का हम सब भारतवासी गर्व करते हैं उसका एक मात्र कारण इस लोकतंत्र की आत्मा का संविधान में निहित होना ही है। अगर संविधान को बदला जाता है या उसमें दी गई व्यवस्थाओं का उल्लंघन सत्ता द्वारा किया जाता है तो फिर लोकतंत्र को कोई भी ताकत नहीं बचा सकेगी। इस सच को हर एक भारतीय को समझने की जरूरत है। इस देश के नागरिकों का ऐसी स्थिति में कुछ भी वजूद नहीं रहेगा पहले कहा जाता था कि इस देश के नागरिकों की सबसे बड़ी ताकत उनके वोट में निहित है और अगर आपके वोट देने का ही जब कोई अर्थ नहीं रह जाए तो यह नागरिक सिर्फ भेड़ बकरी जैसे ही बनकर रह जाएंगे। चुनाव आयोग में बैठे अधिकारी अगर सत्ता के लिए ऐसी व्यवस्था प्रदान कर रहे हैं तो कोई नागरिक वोट किसी भी दल या नेता को दे लेकिन जीत सिर्फ उसी की होगी जिसे सत्ता या चुनाव आयोग तय करेगा तो फिर लोकतंत्र महज दिखावा है और चुनाव सिर्फ एक खेल तमाशा ऐसे में चुनाव और इस लोकतंत्र का सच देश और दुनिया के सामने आना ही चाहिए।

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