देश के धार्मिक स्थलों और आयोजनों में न तो अव्यवस्थाओं के फैलने और भगदड़ की घटनाओं और उसमें लोगों के बड़ी संख्या में जान गंवाने की घटनाएं कोई नई बात है और न इस तरह की घटनाओं पर सत्ता और सिस्टम का घड़ियाली आंसू बहाना कोई नई बात है। कल हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर की सीढ़ियों पर हुई भगदड़ की घटना ने आठ लोगों की जान ले ली वहीं 50 के आसपास लोगों को अस्पताल पहुंचा दिया। भले ही इस घटना के पीछे बिजली का तार टूटने और करंट फैलने की अफवाह को एक कारण बताया जा रहा हो लेकिन इस हादसे का सबसे बड़ा कारण प्रशासन की वह नाकामी है जिसके तहत ऐसे स्थलों पर क्राउड को कंट्रोल करना उसकी ड्यूटी होता है। अभी 2 दिन पूर्व ही कावड़ मेला समाप्त हुआ है। सौभाग्य से इस मेले के दौरान कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई लेकिन इसका श्रेय साधु संतों द्वारा सूबे के शासन और जिला प्रशासन को दिया गया। इसके लिए पुलिस कर्मियों को सम्मानित भी किया गया। सम्मान पाने के बाद जिला प्रशासन भी चैन की नींद सो गया क्योंकि कांवड़ मेले की थकान भी उतारनी थी। उसे इस बात का अनुमान ही नहीं हो सका कि कावड़ मेला तो समाप्त हो गया लेकिन गंगा स्नान पूर्व की तरह अभी भी जारी है। बड़ी संख्या में लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई और वह माता मनसा देवी के दर्शनों को निकल पड़े। जो लोग कभी मनसा देवी मंदिर गए होंगे उन्हें पता होगा कि मंदिर की सीढ़ियो वाला पैदल मार्ग कितना संकरा है और कितने लोगों की भीड़ उसमें समा सकती है। क्षमता से कई गुना अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ जब इन सीढ़ियों पर जमा हो गई और इस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वहां कोई पुलिस या प्रशासन का अमला था ही नहीं तो फिर वही होना था जो हुआ। जिले के अधिकारियों को जब इस दुर्घटना की खबर मिली तब तक वह सब कुछ हो चुका था जो नहीं होना चाहिए था। पुलिस प्रशासन तो बस इस हादसे के बाद मृतकों व घायलों के शरीरों को ढोकर अस्पताल ले जाने का काम ही करता दिखा। अभी प्रयागराज महाकुंभ के आयोजन में एक नहीं कई भगदड़ की घटनाएं घटित हुई थी। जिनका दो—चार दिनों तक खूब शोर रहा था इनके कुछ विजुअल भी आए थे जहां श्रद्धालुओं का सामान, चप्पल और जूते बिखरे पड़े थे। सायरन बजाती एंबुलेंस की आवाज भी आपने सुनी होगी लेकिन इन भगदड़ की घटनाओं में कितने लोग मरे और कितने लापता हो गए इसकी कोई अधिकृत जानकारी आज तक शासन प्रशासन द्वारा दी नहीं गई है अभी 2 दिन पहले अखबारों में एक खबर आई थी कि यूपी पुलिस के 161 पुलिसकर्मी इस कुंभ मेले के बाद से लापता है न उनका मोबाइल मिल रहा है न वह घर पर है न ड्यूटी पर। इतनी बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों का गुमशुदगी भले ही आपको हैरान करने वाली लगे लेकिन सत्ता शासन को इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इतना बड़ा देश है और इतनी ज्यादा आबादी, आज का हादसा कल भुला दिया जाता है अभी यूपी के बाराबंकी से भी एक ऐसी ही खबर आ रही है बीती रात यहां एक शिव मंदिर में भी बिजली का करंट फैलने व भगदड़ मचने की घटना में दर्जनों लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है। धर्म और आस्था के नाम पर जमावड़ा करना अगर बहुत आसान काम है तो इस धार्मिक उन्माद की भीड़ को कंट्रोल करना उतनी ही कठिन चुनौती भी है। शासन प्रशासन को इन श्रद्धालुओं की जान कैसे बचानी है इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।




