हर एक मुद्दा राजनीति का मुद्दा नहीं हो सकता है। आतंकवादी हमला और उसमें मरने वाले वह 28 निर्दाेष लोग जिनकी जवाबी कार्रवाई के लिए ऑपरेशन सिंदूर, जिसके चलते देश के सामने एक और युद्ध जैसे हालात पैदा हुए सीज फायर तक पहुंचने के बाद जिस तरह से विवादों के घेरे में आ चुका है और अब इसकी परते उखड़ने लगी है। उसका सच जानकर अब लोगों का गुस्सा सार्वजनिक होता जा रहा है। लोगों द्वारा उठाए जाने वाले सवालों की फेरहिश्त भी लंबी होती जा रही है। पहलगाम के उन आतंकियों का क्या हुआ जिन्होंने इतनी बड़ी संख्या में लोगों की हत्या की इस ऑपरेशन के नाम से लेकर पाक पर की गई कार्यवाही में देश को हुए नुकसान और सीज फायर के फैसले से लेकर देश में निकली जाने वाली शौर्य तिरंगा यात्राएं तथा पीएम के रोड शो और घर—घर सिंदूर भिजवाने के समाचारों के बीच अब इस कार्यक्रम से कदम पीछे खींचे जाने तक सवालों का अंबार लग चुका है। जिसके पीछे सबसे अहम कारण सत्ता पक्ष द्वारा ऑपरेशन सिंदूर की ब्रांडिंग के लिए किए जाने वाला वह प्रचार जिसने धार्मिक और सामाजिक परंपराओं को भी ताक पर रख दिया गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो इसे लेकर यहां तक कह डाला है कि क्या पीएम पूरे देश की महिलाओं के पति बन गए हैं उन्हें अगर सिंदूर भिजवाना है तो अपनी पत्नी को भिजवाएं। पश्चिम बंगाल का दुर्गा पूजा सबसे बड़ा आयोजन माना जाता है इस धार्मिक आयोजन के समापन पर महिलाएं सिंदूर खेला करती हैं। ममता ने भाजपा के सिंदूर बांटे जाने के कार्यक्रम को इस सिंदूर खेला से जोड़ कर कहा जा रहा रहा है कि भाजपा को देश की महिलाओं का इस तरह से अपमान करने का क्या अधिकार है। अब खबर यह भी आ रही है कि देशभर में महिलाओं द्वारा इसका भारी विरोध किया जा रहा है जिसके मद्देनजर अब इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है क्योंकि इससे बड़े राजनीतिक नुकसान की संभावनाएं दिखाई दे रही है। ढूंढने वालों ने ऑपरेशन सिंदूर के नाम से लेकर इसकी प्रेस ब्रीफिंग में सेना की दो महिला अफसरो को बैठाने जिनमें से एक के ओबीसी तथा दूसरी एससी—एसटी से होने तक की बात भी कहीं जा रही है। विपक्ष ने अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर इतना दबाव बना दिया है कि सब कुछ छोड़कर गृहमंत्री भी कश्मीर के पंुछ पहुंच गए और राजनाथ सिंह भी ऑपरेशन सिंदूर के समाप्त नहीं होने का दावा कर रहे हैं तथा सीज फायर को सिर्फ अल्पविराम बताया जा रहा है। इस बीच अब पाकिस्तान के सीमावर्ती राज्यों में मार्क ड्रिलों का आयोजन किया जा रहा है और एक ऐसा संदेश दिया जा रहा है कि जैसे पाकिस्तान के द्वारा कोई भी गड़बड़ी करने पर अबकी बार और अधिक बड़े हमले से उसको जवाब दिया जाएगा। लेकिन अब एक जो अवसर था वह पीछे छूट चुका है। दोबारा से उन्हें दोहराया नहीं जा सकता है लेकिन सिंदूर पर बड़ा राजनीतिक खेला जरूर हो चुका है।




