Home News Posts उत्तराखंड न्याय मिला पर आधा—अधूरा !

न्याय मिला पर आधा—अधूरा !

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  • अभी लड़ाई खत्म नहीं हुई है
  • लोग कर रहे हैं अपराधियों को फांसी की सजा की मांग

देहरादून/कोटद्वार। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सिर्फ अंकिता भंडारी के परिजनों ने ही न्याय की लड़ाई नहीं लड़ी बल्कि राजनीतिक दलों और राज्य के आम नागरिकों ने भी अब तक इस लड़ाई को लगातार लड़ा है। आज जिला सत्र न्यायालय द्वारा तीनों आरोपियों को उम्र कैद की सजा भले ही सुना दी गई हो लेकिन इससे न तो अंकिता के परिजन संतुष्ट हैं न ही आम लोग न कांग्रेसी नेता। उनका यही मानना है कि यह अभी अधूरा इंसाफ है। आरोपियों को कम से कम फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी जिससे एक ऐसी मिसाल कायम होती कि सत्ता के मद में रहने वालों को एक कड़ा संदेश दिया जा सकता था।
जिला सत्र न्यायालय के फैसले के बाद कोर्ट में जमा भीड़ ने इसे लेकर नारेबाजी और प्रदर्शन भी किया गया। लोगों का कहना था कि उस वीआईपी को किसने बचा लिया जिसके लिए इस हत्या को अंजाम दिया गया। इस मामले की सीबीआई जांच क्यों नहीं कराई गई? लोगों का कहना है कि यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है क्योंकि आरोपियों द्वारा भी इस सजा के खिलाफ बड़ी अदालत में जाना ही है।
लोगों का कहना है कि इस मामले को सत्ता पक्ष ने पहले ही दिन दबाने का भरपूर प्रयास किया और वह उसमें कामयाब भी रहे। रिजार्ट के सीसीटीवी कैमरे से कोई साक्ष्य न मिलने व रातों—रात अंकिता के कमरे में भी बुलडोजर चलाकर साक्ष्य मिटा दिए गए जांच टीम आरोपियों के मोबाइल तक बरामद नहीं कर सकी। जिसके कारण इस मामले में पूरा इंसाफ नहीं हो सका।

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