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सिंदूर की राजनीति

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‘अबकी बार मोदी सरकार और अच्छे दिन आने वाले हैं हम मोदीजी को लाने वाले हैं, के साथ 2014 में भाजपा ने जो अपनी राजनीति का सफर शुरू किया था वह हर—हर मोदी और घर—घर मोदी से मोदी है तो मुमकिन है तक पहुंचते पहुंचते मात्र 11 सालों में अब उस मुकाम तक पहुंच गया है कि प्रधानमंत्री मोदी लोगों के लिए मनोरंजन का जरिया भर बनकर रह गए हैं। और देश में उनका खूब मजाक बनाया जा रहा है। अपनी पैदाइश गैर बायोलॉजिकल बताते हुए स्वयं को स्वयंभू भगवान घोषित करने से लेकर न जाने क्या—क्या बयान देने वाले पीएम मोदी को लोग प्रधानमंत्री की बजाय प्रचार मंत्री बताने लगे हैं। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार द्वारा लांच किए गए ऑपरेशन सिंदूर पर विपक्ष को राष्ट्रीय सुरक्षा के इस मुद्दे पर सियासत न करने की हिदायत देने वाले प्रधानमंत्री मोदी और उनकी भाजपा ने इस मुद्दे पर अपनी जिस तरह से ब्रांडिंग शुरू कर दी है उसे देखकर किसी को भी शर्म आ सकती है। जिन माता और बहनों के सिंदूर को आतंकियों द्वारा उजाड़ दिए गए उसका बदला लेने के लिए सरकार ने जो ऑपरेशन चलाया गया उसको सिंदूर नाम क्यों दिया गया था भले ही तब देश के लोगों को समझ न आया हो कि इसके पीछे सत्ता में बैठे लोगों की मंशा क्या थी? लेकिन देशभर में तिरंगा शौर्य यात्राओं के जरिए भाजपा ने जो प्रचार अभियान का एजेंडा चलाया उसका अब पूरा सच सामने आ चुका है। एक चुटकी सिंदूर की क्या अहमियत होती है यह पूरे देश की जनता को समझाने निकली भाजपा को यह खुद भी समझ नहीं आया कि वह आखिर क्या करने जा रही है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेना की वर्दी में बड़े—बड़े कट आउट व जनसभाओं में जोशीले भाषणों की धारा में पीएम इतने बह गए कि वह कर्नल सोफिया कुरैशी के परिजनों को ही अपने ऊपर रोड शो में फूल बरसाने के लिए ले आए। मोदी की रगों में खून की जगह गरम सिंदूर इतनी तेजी से दौड़ने लगा कि वह यह भी भूल गए कि अभी उन विधवाओं के आंसू भी नहीं सूखे जिनके पतियों को आतंकियों ने उनकी आंखों के सामने ही गोलियों से भून डाला। अब भाजपा नेता पूरे देश में उनका सिंदूर उजड़ जाने का उपहास बनाने पर उतारू हो गए हैं। कहा जाता है कि जब विनाश करीब आता है तो व्यक्ति की विवेक शक्ति काम करना बंद कर देती है भाजपा और प्रधानमंत्री के वह कौन से सलाहकार हैं जिन्होंने उन्हें घर—घर सिंदूर बटवाने या भिजवाने की सलाह दी है। 9 जून से 9 जुलाई तक पूरे देश में भाजपा के नेता ऑपरेशन सिंदूर चलाने जा रहे हैं सभी सांसद विधायक और मंत्री हर रोज 20—25 किलो मीटर पैदल चलेंगे और घर—घर सिंदूर बाटेंगे भाजपा नेताओं की इस योजना को लेकर महिलाओं का पारा तो सातवें आसमान पर है ही इसके साथ ही मर्द भी आस्तीने चढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि आने दो हम भी उनकी कमर तोड़ने को तैयार बैठे हैं। हमारी बहू बेटियां अपने पति का लाया हुआ सिंदूर मांग में सजाती हैं जिन्हें सिंदूर की अहमियत नहीं पता है उन्हें अब हम सिंदूर की अहमियत सिखाकर ही छोड़ेंगे। 9 जून में अभी काफी समय है हो सकता है यह विरोध बीजेपी नेताओं को ऑपरेशन सिंदूर के खतरे से सावधान कर दे और अगर नहीं किया तो फिर इसके गंभीर परिणामों की संभावनाओं को भी नकारा नहीं जा सकता। भाजपा नेताओं को यह समझने की जरूरत है कि हर आपदा में अवसर नहीं तलाशने चाहिए।

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