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धामों का सम्मान बना प्रमुख चुनावी मुद्दा

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  • नेताओं के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी, जनता 20 को करेगी फैसला

रुद्रप्रयाग/देहरादून। केदारनाथ का उपचुनाव जीतने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। नेताओं के वार—प्रतिवार ने इस चुनावी जंग को अब आस्था तथा धामों के सम्मान पर लाकर खड़ा कर दिया है। धामों के सम्मान के मुद्दे पर कौन किसे पटकनी दे पता है इसका फैसला 23 नवंबर को चुनावी नतीजे ही करेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली के बुराड़ी में केदारनाथ मंदिर का शिलान्यास कर जो मुद्दा कांग्रेस को थमाया था अब वह उनके गले की फंास बन गया है। दो दिन पूर्व उन्होंने मुंबई में कांग्रेसी नेताओं द्वारा बद्रीनाथ मंदिर का निर्माण कराने की बात कह कर इसे जो हवा दी तो मामले ने और तूल पकड़ लिया। कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल संगम में जाकर खड़े हो गए और गंगाजल अंजलि में भर कर यह कसम खाते दिखे की सीएम जो आरोप उन पर लगा रहे हैं वह मिथ्या व झूठ है। उन्होंने सीएम धामी को चुनौती दी कि अगर उन्होंने झूठ नहीं बोला है तो वह आए और मेरी तरह गंगा में खड़े होकर मां गंगा की कसम खाकर कहें कि उन्होंने झूठ नहीं बोला है।
उधर कांग्रेस नेता करन माहरा का कहना है कि दिल्ली में वह मंदिर नहीं बनवा रहे थे केदार धाम बनवा रहे थे तथा केदार शिला दिल्ली ले जाने की बात कर रहे थे जिसका हमने विरोध किया था। उधर भाजपा के विधायक व पूर्व मेयर विनोद चमोली इस पर सफाई दे रहे हैं कि अगर कांग्रेस नेताओं द्वारा मुंबई में बद्रीनाथ मंदिर बनवाया जा सकता है तो फिर पुष्कर सिंह धामी दिल्ली में केदार मंदिर के शिलान्यास में चले गए तो इसमें क्या आपत्ति है वह कहते हैं कि जब धामी ने अपनी गलती मान ली और उसके सुधार के रूप में धामों के नाम पर मंदिर व ट्रस्ट बनाने से रोकने के लिए वह कानून ले आए तो फिर क्या विवाद है?
धामों की मर्यादा और सम्मान का मुद्दा यहीं खत्म नहीं हो जाता है। कांग्रेस प्रत्याशी मनोज रावत का तो यहां तक कहना है कि इस चुनाव को वह नहीं केदार क्षेत्र की जनता लड़ रही है। भाजपा के नेता जिस तरह से केदार बाबा का असम्मान कर रहे हैं तथा लूटपाट का खेल चल रहा है उसे केदार नाथ के लोग कतई भी बर्दाश्त नहीं करने वाले हैं वह चुनाव में भाजपा को केदारनाथ के अपमान का करारा झटका देने जा रहे हैं। वही बद्री केदार समिति के अध्यक्ष अजय अजेंद्र का कहना है कि कांग्रेस झूठा प्रचार कर चुनाव जीतना चाहती है तथा गणेश गोदियाल अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। खैर 20 नवंबर को अब जनता को इस पर फैसला लेना है कि कौन केदार का सम्मान और अपमान करने वाला है। क्योंकि अब चुनाव के अंतिम दौर में यही मुद्दा मुख्य चुनावी मुद्दा बन चुका है।

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