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केदारनाथ उपचुनाव : किसी के लिए राह आसान नहीं

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  • कांग्रेस आंतरिक कलह का शिकार
  • भाजपा में टिकट को लेकर मार—काट

देहरादून। केदारनाथ उपचुनाव को लेकर भले ही भाजपा और कांग्रेस के नेताओं द्वारा कुछ भी दावे किए जा रहे हो लेकिन जहां भाजपा में टिकट के लिए मारकाट मची है वहीं कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आने लगी है।
केदारनाथ की इस विधानसभा सीट की जीत हार का भले ही भाजपा की राज्य सरकार पर कोई प्रभाव न पड़े लेकिन मंगलौर और बद्रीनाथ सीट के उप चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व पर गंभीर प्रभाव जरुर पड़ेगा। क्योंकि लोकसभा में अयोध्या सीट पर और बद्रीनाथ सीट पर हार के बाद भाजपा का जो धार्मिक चुनावी एजेंडा फेल बताए जाने लगा है अगर भाजपा केदारनाथ सीट भी हारती है तो इसका मैसेज और अधिक पुख्ता हो जाएगा। तथा लगातार तीन सीटों पर हार मुख्यमंत्री धामी को मुश्किल में डाल सकती हैं। यही कारण है कि भाजपा ने इस चुनाव में केंद्रीय मंत्रियों से लेकर अपनी पूरी ताकत झंोंक दी है मगर उसे उम्मीदवारों की लंबी सूची ने मुश्किल में डाल दिया है। स्थिति एक अनार सौ बीमार वाली है अनार किसी को भी मिले लेकिन इसके बाद कितने और बीमार हो जाएंगे। कई दावेदार तो ऐसे हैं कि उन्हें टिकट न मिला तब भी चुनाव मैदान में जाने को तैयार बैठे हैं। जो नहीं जाएंगे वह पार्टी को दूसरी तरह से नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कांग्रेस का हाल अब यहां भी हरियाणा जैसा ही दिख रहा है। प्रदेश प्रभारी श्ौलजा दिल्ली में बैठी है यहां कांग्रेस नेता अपनी अपनी मूंछ की लड़ाई पर उतर आए हैं करन माहरा से जब केदारनाथ जाने की बात कही गई तो वह कहते हैं वहां गणेश गोदियाल ने मोर्चा संभाल रखा है उनकी कोई जरूरत नहीं है अगर जरूरत होगी और उनसे कहा जाएगा तो जरूर जाएंगे। कांग्रेस जिसके बारे में कहा जाता है कि उसे कोई हरा नहीं सकता। कांग्रेस ही कांग्रेस को हरा सकती है अगर हालात यही रहे तो यहां कांग्रेस ही कांग्रेस को हराएगी यह अभी से दिख रहा है। केदारनाथ की राह भाजपा व कांग्रेस किसी के लिए भी आसान नहीं दिख रही है

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