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सभी मन्दिरों के प्रसाद की होगी रेंडम जांचः सतपाल

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  • आस्था की तरह प्रसाद की पवित्रता भी जरूरी
  • भक्तों द्वारा चढ़ाये जाने वाले प्रसाद की भी जांच होगी

देहरादून। उड़ीसा के तिरूपति मंदिर के प्रसाद में कथित पशु चर्बी की मिलावट का मामला सामने आने के बाद अब उत्तराखण्ड सरकार के भी कान खड़े हो गये है। पर्यटन एंव धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि आस्था की तरह प्रसाद की पवित्रता भी उतनी ही जरूरी है। इसलिए देवभूमि के सभी चारों धामों और देवालयों में वितरित किये जाने वाले तथा रसोई घरों में बनाये जाने वाले प्रसाद की भी जांच करायी जायेगी।
महाराज का कहना है कि आस्था के साथ होने वाली किसी भी तरह के खिलवाड़ को कतई भी बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होने कहा कि सिर्फ धामों में वितरित किये जाने वाला प्रसाद ही नहीं अपितु राज्य के सभी मन्दिरों में प्रसाद की रेंडम जांच करायी जायेगी तथा प्रसाद के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जायेंगे। उन्होने साफ किया कि जो प्रसाद मंदिरों के रसोई घरों में तैयार किया जाता है उसकी शुद्धता के साथ साफ—सफाई की भी जांच होगी तथा जो प्रसाद भक्तों द्वारा मन्दिरों में चढ़ाया जाता है उसकी भी जांच समय—समय पर करायी जायेगी। जिससे शुद्धता के मानकों को बनाये रखा जा सके। उनका साफ कहना है कि आस्था के प्रति जिस तरह से पवित्रता जरूरी है ठीक वैसे ही प्रसाद की पवित्रता जरूरी है। उनका कहना है कि इसकी गुणवत्ता व शुद्धता के साथ कोई समझौता नहीं किया जायेगा।
उल्लेखनीय है कि तिरूपति में कथित प्रसाद की अपवित्रता का मामला सामने आने पर बद्री केदार समिति के द्वारा धामों के मन्दिरों में भी प्रसाद की अपवित्रता की आशंका जताई गयी थी। मन्दिरों और धामों में बनने वाले प्रसाद की सामग्री कहंा से आती है और उसकी शुद्धता का क्या स्तर है? इसकी जांच अत्यंत ही जरूरी है। सेवादारों और हक हकूकधारियों का कहना है कि प्रसाद में दानकर्ताओं द्वारा दान की गयी सामग्री का उपयोग किया जाता है दानदाता जो घी और केसर आदि दान देते है वह उनके घर का बना हुआ है या फिर बाजार का इसका कुछ पता नहीं होता है तथा न ही उसकी कोई जंाच अब तक मंदिर समिति के स्तर से की जाती रही है। इसलिए इसमें किसी भी तरह की अशुद्धता होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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