पहले कोलकाता में एक रेजिडेंट महिला डॉक्टर से गैंगरेप और हत्या फिर देहरादून में एक नाबालिक के साथ आईएसबीटी में बस के अंदर गैंगरेप और अब महाराष्ट्र (ठाणे) के बदलापुर में तीन—चार साल की एक मासूम बच्ची के साथ स्कूल के बाथरूम में दुष्कर्म। देश भर में घटित होने वाली इन महिला अत्याचारों की घटनाओं को गिनते—गिनते आप थक जाएंगे आपका मन घृणा से भर जाएगा। निसंदेह यह किसी देश व समाज के लिए अत्यंत ही शर्मनाक और निंदनीय स्थिति है। हम किस तरह के समाज में रह रहे हैं और अपनी भावी पीढ़ियो के लिए कैसे समाज का निर्माण कर रहे हैं और उनके निवारण का सबसे प्रभावी उपाय क्या है अगर इस मुद्दे पर अभी नहीं सोचा गया तो आप उस वहशी समाज में रहने के लिए तैयार रहिए जहां आप एक भी चैन की सांस नहीं ले सकेंगे। आमतौर पर जब भी किसी लड़की या महिला के साथ इस तरह के घृणित अपराध का मामला सामने आता है तो अपराधी के पक्ष में उसे बचाने के लिए भी कुछ प्रत्यक्ष तो कुछ पर्दे के पीछे के लोग खड़े हो जाते हैं। देश का सड़ा गला सिस्टम जो चंद पैसों के लालच में बिक जाता है पीड़ित की रिपोर्ट तक दर्ज करने को तैयार नहीं होता है न्याय दिलाने के लिए आगे आने की बात तो बहुत दूर है। बदलापुर की घटना की पुलिस ने रिपोर्ट लिखने के बाद भी उस पर 12 घंटे तक कोई संज्ञान न लिया जाना इसका ताजा उदाहरण है और जब आम लोगों ने रेलवे ट्रैक जाम कर दिया तो महाराष्ट्र की सरकार से लेकर मंत्री—संत्री और पुलिस अधिकारी सब हरकत में आते दिखे। आरोपी की गिरफ्तारी हो गई है उस पर पोक्सो एक्ट में कार्यवाही हो रही है आरोपी को 13 साल तक की सजा हो सकती है। यहां इस मामले में पुलिस कर्मियों के तबादले कर दिए गए हैं जो हमेशा की तरह कार्रवाई हो जाती है। जैसा कि अब तक इस तरह के सभी मामलों में होता आया है। एक अन्य सबसे महत्वपूर्ण जो बात है वह है इस तरह के मामलों पर की जाने वाली राजनीति। जिसे कल तक हम कोलकाता मामले में ममता बनर्जी के खिलाफ देख रहे थे अब कल महाराष्ट्र की शिंदे सरकार के खिलाफ भी देखेंगे। जो भाजपा नेता ममता सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर रहे थे उन्हें अब शिंदे और उत्तराखंड की सरकार के खिलाफ भी बोलना चाहिए। सवाल यह है कि सामाजिक सुरक्षा से जुड़े इन मामलों पर की जाने वाली राजनीति कब बंद होगी हमने महाभारत का इतिहास पढ़ा है जब द्रोपदी चीर हरण को लेकर भगवान कृष्ण अर्जुन को यह समझा रहे थे कि यह एक सामाजिक समस्या है जो द्रोपदी के चीर हरण पर मौन रह गया वह समाज एक सामान्य महिला के चरित्र रक्षा क्या करेगा इसलिए निजी स्वार्थ और हानि लाभ की भावना छोड़कर उन शत्तिQयों के विनाश के लिए युद्ध करो जो इस तरह की घटनाओं को अंजाम देती है और उन पर अट्ठहास करती है। हम अगर वास्तव में इस समस्या से निजात चाहते हैं तो हमें इसके खिलाफ सड़कों पर आना ही होगा। शासन प्रशासन को इसके समूल नाश के लिए सख्त कानून बनाने व ठोस कदम उठाने पर विवस करना ही होगा।



