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सीएम ने ली आपदा प्रभावितों की सुध

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  • प्रभावितों को दिया हर संभव मदद का भरोसा
  • नुकसान की करेंगे भरपाई, विस्थापन की कार्यवाही शुरू

घनसाली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज दिल्ली से लौटे तो वह सीधे घनसाली पहुंचे और आपदा प्रभावितों से मिलकर उनका हाल जाना। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावित क्षेत्र का भी दौरा किया। उन्होंने आपदा के बाद टिहरी प्रशासन द्वारा प्रभावितों की मदद करने के लिए उनकी प्रशंसा की।
उल्लेखनीय है कि टिहरी के घनसाली क्षेत्र में 27 जुलाई की रात अतिवृष्टि के कारण बूढ़ा केदार और तोली तथा तिनगढ़ में भारी जान—माल का नुकसान हुआ था। पहाड़ से आए पानी और मलबे के कारण 15 घरों को नुकसान पहुंचा था तथा एक मां और बेटी की मलवे में दबकर मौत भी हो गई थी। लोगों के घर मकान तथा खेती की जमीन सब कुछ तबाह हो गया था। 55 परिवारों को घर से बेघर होना पड़ा और वह अब एक स्कूल में ठहराए गए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर पहले जमीनी हकीकत का जायजा लिया इसके बाद वह प्रभावितों के राहत कैंप में भी पहुंचे और उनसे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र को भारी जान माल का नुकसान हुआ है। पुल और पुश्ते ही नहीं सड़के और रास्ते तथा लोगों के घर, मकान, दुकान और खेती को भी भारी नुकसान हुआ है। यही नहीं दो लोगों की जान भी चली गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी प्राथमिकता है कि पहले प्रभावित लोगों की घर वापसी हो। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया जाएगा तथा जिन लोगों को विस्थापन की जरूरत है उनके विस्थापन की कार्यवाही शुरू की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि कई गांवों के लोग स्कूल में शरण लिए हुए हैं उनकी घर वापसी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावितों के नुकसान का आकलन करायेगी तथा उनकी हर संभव मदद की जाएगी।
उन्होंने कहा कि बच्चों और वृद्धों तथा गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने आपदा के बाद प्रभावित क्षेत्रों में पीड़ितों की मदद के लिए राहत और बचाव के कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावितों के खाने—पीने और दवा आदि की समुचित व्यवस्था की जाए। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व टिहरी के प्रभारी मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल और नेता विपक्ष भी पीड़ितों के बीच पहुंचे थे और उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया था। स्कूल में ठहरे प्रभावितों की संख्या अधिक होने से भी लोगों को भारी मुश्किलें हो रही है।

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