Home उत्तराखंड देहरादून अब चर्चा में आदमी की बात

अब चर्चा में आदमी की बात

0
438


इन दिनों संसद में वित्त मंत्री सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट पर चर्चा चल रही है। विपक्ष की दमदार उपस्थिति ने इस चर्चा को किस कदर दिलचस्प बना दिया इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि संसद में होने वाली इस चर्चा को देश के लोग लाइव तो देख ही रहे हैं सोशल मीडिया पर भी विपक्ष किस तरह से इस बजट की धज्जियां उड़ा रहा है इसके सिवाय अन्य कोई भी मुद्दा नहीं है। भले ही राहुल गांधी जो नेता विपक्ष है लोग उन्हें सबसे ज्यादा सुन रहे हो लेकिन विपक्ष के अन्य तमाम दलों के नेता भी जिस तरह की तैयारी के साथ इस चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं वह भी सरकार के लिए एक बड़ी समस्या और चुनौती बन चुका है। आप के सांसद राघव चड्ढा ने सरकार की टैक्सेशन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि देश का एक आम आदमी अगर 10 कमाता है तो 6 से 7 सरकार को किसी न किसी रूप में टैक्स के रूप में दे देता है। बाकी अगर तीन या चार उसके पास बचता है तो वह उसमें अपना और अपने परिवार की जरूरत को कैसे पूरा करें बस इसी में उलझ कर रह गया है। चड्ढा सीए का एग्जाम पास कर चुके हैं आयकर, जीएसट कैपिटल मेंनटैक्स सहित अन्य तमाम टैक्स के रूप में की जाने वाली वसूलियों की विस्तार से जानकारी देने और रखने वाले चड्ढा का साफ कहना है कि सरकार टैक्स वसूली तो करती है इंग्लैंड की तरह, लेकिन आम आदमी को उसके बदले में सुविधा देती है सोमालिया की तरह। अभी नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा गांवों में गरीबी को शून्य स्तर पर लाने की बात कही गई। यह कितनी हास्यापद बात है कि जिस देश की 75 फीसदी जनता गांवों में रहती है तथा जिसकी प्रति परिवार औसत आय 5000 रूपये महीना है वह कैसे अपना गुजारा करती होगी इस आबादी में कितने लोग ऐसे होंगे जिन्हें आप अमीर कह पाएंगे? लेकिन प्रधानमंत्री गांवों में गरीबों को शून्य स्तर पर लाने की बात कहे तो लोग उस पर अगर हसेंगे नहीं तो क्या करेंगे। देश को आजाद हुए 77 साल हो चुके हैं और देश में प्रति व्यक्ति आय अभी भी एक लाख रूपये से नीचे 98, 379 है तो आपके पास कौन सा ऐसा जादू है आप इसे 2045 तक 15 लाख रुपए प्रतिमाह तक पहुंचा देंगे जो कि विकसित भारत कहने के लिए जरूरी है। लेकिन शगुफेबाजी करने और विकसित भारत का झांसा देने में क्या कुछ खर्च होना है शायद कुछ नहीं। बीते 10 सालों में देश का गरीब और अधिक गरीब हुआ है। इस सत्य से सरकार भाग नहीं सकती है आम आदमी के जीवन में जटिलताएं और बढ़ी है। गरीब—अमीर के बीच खाई और अधिक बढ़ी है। संसद में विपक्ष ने तो यहां तक कह डाला है कि आपने गरीब जनता पर 187. जीएसटी लगाया तो जनता ने भी आपको 18 प्रतिशत जीएसटी लगाकर आपको तीन सौ से इस बार 240 पर पहुंचा दिया और अब जब भी चुनाव होंगे वह आपको 140 पर पहुंचा देगी राहुल गांधी कहते हैं कि इंडेक्शन की सुविधा खत्म करके तथा कैपिटलं टैक्स बढ़ाकर सरकार ने मिडिल क्लास की छाती में छुरा मारा है और अब इस देश का गरीब, पिछड़ा, किसान और मिडिल क्लास ही आपको सबक सिखाएगा और इसके लिए आपको तैयार हो जाना चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here