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निरर्थक मुद्दों वाली राजनीति

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कह दिया कि महात्मा गांधी को गांधी फिल्म बनने से पहले कोई नहीं जानता था। चुनावी चला चली कि इस बेला में प्रधानमंत्री के इस बयान को लेकर लोगों का सवाल उठाया जाना स्वाभाविक ही है। लेकिन इस पर किसी को न हैरान होने की जरूरत है और न परेशान होने की। बीते एक महीने के अंदर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दर्जनों ऐसी बातें अपने चुनावी भाषणों व बयानों में कहीं जा चुकी है। चिकन मटन, मंगलसूत्र और भ्ौंस चोरी से लेकर अपने आप को महा अवतार बताये जाने तक दर्जनों ऐसे बयान अब तक उनके द्वारा दिए जा चुके हैं जिन्हें सुनकर लोग सिर्फ हंस सकते हैं। हां आप यह जरूर सोच सकते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी को यह हो क्या गया है वह क्यों इस तरह के बिना सर पैर वाले मुद्दे उठा रहे हैं सच यह है कि इस चुनाव के शुरुआती दौर से ही वह देश की असल समस्याओं और मुद्दों पर बात करने से बचते दिख रहे हैं। कांग्रेस द्वारा अपने चुनावी घोषणा पत्र में 25 गारंटीयों के साथ जिस तरह महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक समानता के साथ किसानों और महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं की घोषणाएं की गई है उसमें मोदी की गारंटी बेअसर होकर रह गई। पहले मोदी ने इस न्याय पत्र को मुस्लिम लीग का घोषणा पत्र बता कर खारिज करने की कोशिश की गई और हिंदू—मुस्लिम, एससी—एसटी व ओबीसी आरक्षण पर हुंकार भरने से भी बात नहीं बनी तो उन्होंने ऐसे हास्यापद बयान देने शुरू कर दिए जिनसे असल मुद्दों से आम आदमी का ध्यान भटकाया जा सके। जो लोग प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए बयान से यह समझ रहे हैं कि मोदी को इतिहास का ज्ञान नहीं है उन्हें प्रधानमंत्री मोदी की मन की बात के उस एपिसोड को जरूर सुनना चाहिए जिसमें वह कह रहे हैं कि गांधी के विचारों ने पूरे विश्व में भारत का सम्मान बढ़ाया। दक्षिण अफ्रीका के गांधी कहे जाने वाले नेल्सन मंडेला जब 28 साल जेल में रहने के बाद बाहर आये थे तो उन्होंने कहा था कि महात्मा गांधी मानवता के एक पवित्र पुजारी थे। आज मोदी कह रहे हैं कि मार्टिन किंग लूथर और मंडेला को दुनिया जानती है लेकिन गांधी फिल्म आने से पहले गांधी को कोई नहीं जानता था। किंग और नेल्सन मंडेला जिन गांधी को अपना आदर्श और मानवता की प्रतिमूर्ति मानते थे जिन गांधी की विश्व के 100 से भी अधिक देशों में प्रतिमाएं लगी हुई है और दुनिया भर के लोग उनके सत्य अहिंसा के सिद्धांतों के लिए उनके सामने सिर नवाते हैं प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं उन्हें गांधी फिल्म से पहले कोई जानता नहीं था। मोदी ने जो कहा वह भले ही हैरान करने वाली बात न हो लेकिन उनका इंटरव्यू करने वाले पत्रकारों द्वारा पीएम से इसके बाद यह सवाल न किया जाना कि वह किस आधार पर ऐसी बात कह रहे हैं? जरूर हैरान करने वाला है। प्रधानमंत्री मोदी जिस गरिमामय पद पर आसीन होते हुए एक चुनाव जीतने के लिए जिस तरह के बिना सर पैर वाले मुद्दे तैयार कर रहे हैं आने वाले समय में इतिहास उन्हें किस रूप में याद करेगा वह अलग बात है लेकिन वर्तमान दौर की राजनीति व नेताओं के साथ इन मीडिया कर्मियों और पत्रकारिता को किस रूप में देखा जाएगा? ज्यादा अहम सवाल है। 2024 के चुनाव में अगर मोदी व उनकी पार्टी चुनाव जीत जाती है तो यह भी इतिहास में दर्ज होगा कि देश की जनता को अहम मुद्दों से ज्यादा बेवजह की बकवास ही उनके लिए राजनीति है।

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