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सदन में राम पर राजनीतिक महासंग्राम

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  • राम की प्रतिमा का रंग काला होने पर विवाद
  • संसदीय कार्य मंत्री विपक्षी विधायकों से भिड़े
  • कांग्रेसी बोले अभिमान तो रावण का भी नहीं रहा

देहरादून। भले ही अयोध्या में भव्य और दिव्य राम मंदिर का निर्माण व प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से निपट गया हो लेकिन राम और राम मंदिर के नाम पर अभी राजनीतिक महाभारत जारी है। आज इसकी बानगी एक बार फिर उत्तराखंड विधानसभा में देखने को मिली।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब विपक्ष के एक विधायक रवि बहादुर द्वारा चर्चा के दौरान यह कह दिया गया कि हमारे ग्रंथो में श्री राम के श्याम (सांवले) रंग का उल्लेख मिलता है लेकिन भाजपा ने राम की मूर्ति का रंग भी काला कर डाला है। उनके इस बयान का प्रतिकार करने की लिए खड़े हुए संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल उनकी इस बात पर हत्थे से उखड़ गए और बोले कि यह आस्था का मुद्दा है आपकी कोई बात अगर आस्था को चोट पहुंचाने की होगी तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आप लोग जिस तरह हर मुद्दे पर तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं उसके कारण ही आज आपका यह हाल हुआ है कि आज कांग्रेस को कहीं भी कोई पूछने वाला नहीं बचा है। संसदीय कार्य मंत्री के स्वर में स्वर मिलाने के लिए भाजपा के दूसरे नेता भी मैदान में आ गए और इसे आस्था और धार्मिक भावना पर प्रहार बताकर इसका विरोध करने लगे तो फिर विपक्षी विधायक भी पलटवार पर मजबूर हो गए।
विपक्षी विधायकों ने कहा कि हम राम की बात नहीं कर रहे थे हम राम की मूर्ति का रंग काला करने की बात कह रहे थे लेकिन अगर आप रावण की बात पर आ गए हैं तो आपको यह भी समझ लेना चाहिए कि अहंकार तो रावण का भी नहीं रहा था फिर आपकी तो बिसात ही क्या है एक दिन आपका अहंकार भी रावण की तरह मिटृी में मिल जाएगा। इस बहस और हंगामे के बीच पीठ पर आसीन स्पीकर ऋतु खंडूरी ने संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल और विपक्षी विधायकों को कई बार शांत कराने की कोशिश की। उनका कहना था कि आप राम के रंग पर नहीं यूसीसी पर चर्चा कर रहे हैं कृपया शांत हो जाएं और बैठ जाएं। लेकिन किसी ने भी उनकी बात को नहीं सुना जो सदन की गरिमा के खिलाफ था।

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