May 7, 2026उत्तराखंड के पहाड़ों की परंपरा का अनोखा और अटूट रिश्ता बेटी ससुराल जाती है ‘ध्याण’ बनकर जोड़ती है दो रिश्तों को दो परिवारों, दो गांवों और दो संस्कृतियों का है आपसी मिलन पहाड़ के गांवों में ध्याण का मायके से रिश्ता होता है बेहद खास देहरादून। पहाड़ के लोक-जीवन में ‘ध्याण’ मात्र एक शब्द नहीं, बल्कि एक संपूर्ण संस्कृति और सम्मान का प्रतीक है। हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड के गांवों में जब कोई बेटी ब्याह कर ससुराल की देहरी लांघती है, तो वह केवल एक ‘वधू’ की नई पहचान नहीं पाती, बल्कि अपने मायके के लिए वह ‘ध्याण’ के एक पूजनीय और भावनात्मक रिश्ते में बंध जाती है।पहाड़ की परंपराओं के अनुसार विवाहित बेटी को ध्याण कहा जाता है। वह एक ऐसा जीवंत सेतु है जो दो परिवारों, दो गांवों और दो संस्कृतियों को आपस में जोड़ती है। बुजुर्ग कहते हैं कि जिस घर की ध्याण खुशहाल होती है, उस घर की सात पीढ़ियां तर जाती हैं। मैत के लिए वह आज भी वही छोटी बच्ची है जो कभी गांव की पगडंडियों पर दौड़ती थी, जबकि ससुराल के लिए वह घर की मर्यादा और लक्ष्मी का रूप है।उत्तराखंड के पहाड़ों में बोली जाने वाली भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं की गहराई को व्यक्त करने का जरिया भी है। यहां के शब्दों में रिश्तों की गर्माहट और जीवन की सादगी साफ झलकती है। पहाड़ी समाज में ‘ध्याण’ का अर्थ केवल एक विवाहित बेटी नहीं, बल्कि वह भावनात्मक पहचान है, जिसमें बेटी दूर रहकर भी अपने घर की आत्मा बनी रहती है। विवाह के बाद उसका घर बदल जाता है, जिम्मेदारियां बदल जाती हैं, लेकिन मायके के प्रति उसका स्नेह और अधिकार वैसा ही बना रहता है।पहाड़ के गांवों में ध्याण का मायके से रिश्ता बेहद खास होता है। साल भर में जब भी वह मायके आती है, तो घर का माहौल बदल जाता है। उसके आने से आंगन में फिर से रौनक लौट आती है। मां-बाप के चेहरे पर संतोष और खुशी दिखाई देती है, जबकि भाई-बहनों के लिए यह मिलन पुराने दिनों की यादों को ताजा कर देता है। पहाड़ में त्योहार, मेलों और विशेष अवसरों पर ध्याण को मायके बुलाने की परंपरा रही है। यह सिर्फ एक सामाजिक रिवाज नहीं, बल्कि उस भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है, जो समय और दूरी के बावजूद कायम रहता है।पहाड़ी समाज में बेटी की विदाई हमेशा भावुक क्षण होता है। ध्याण के रूप में उसकी पहचान उस दर्द को भी समेटे होती है, जो उसे मायके से दूर होने पर महसूस होता है। लेकिन यही दूरी हर मुलाकात को और भी खास बना देती है। जब ध्याण मायके लौटती है, तो वह सिर्फ एक बेटी नहीं, बल्कि खुशियों का पूरा संसार लेकर आती है। उसकी उपस्थिति घर के हर कोने को जीवंत कर देती है।‘ध्याण’ का आधुनिकता के इस दौर में भी अपनी जड़ों के प्रति उसका लगाव कम नहीं हुआ है। वह आज भी अपनी लोक-संस्कृति की सबसे बड़ी संवाहक है। ‘ध्याण’ आज भी पहाड़ की संस्कृति और संवेदना यह उस अटूट रिश्ते की पहचान है, जो बेटी के ससुराल जाने के बाद भी मायके से कभी नहीं टूटता। आज बेटियां शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। इसके बावजूद ध्याण की परंपरा और उससे जुड़ी भावनाएं आज भी पहाड़ों में उतनी ही मजबूत हैं। लोक गीतों में ध्याण की गूंजपहाड़ की अस्मिता और ध्याण का रिश्ता इतना गहरा है कि हमारे लोक गीत इसके बिना अधूरे हैं। उंची डांडियों मा बांज-बुरांश फूलिगे, पर मेरो भाई भिटौली ले के नी औई…। यह पंक्तियां उस ध्याण की पीड़ा और प्रतीक्षा को दर्शाती हैं, जो ससुराल के कठिन श्रम के बीच अपने मायके की यादों में डूबी रहती है। नंदा है देवभूमि की सबसे बड़ी ध्याणउत्तराखंड की आराध्य देवी मां नंदा को भी राज्य की ध्याण माना जाता है। नंदा राजजात यात्रा दरअसल एक ध्याण की अपने ससुराल जाने की ही विदाई यात्रा है। जब मां नंदा को विदा किया जाता है, तो हर पहाड़ी की आंख इसलिए नम होती है क्योंकि वह अपनी ही घर की बेटी यानी ध्याण को विदा कर रहा होता है।
May 7, 2026चुनाव नतीजों के बाद पश्चिम बंगाल से जिस तरह की हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ और अराजकता की तस्वीरे सामने आ रही हैं वह न सिर्फ निंदनीय और चिंताजनक है बल्कि उस लोकतंत्र जिस पर हम गर्व का ढिंढोरा पीटते रहते हैं उसके वर्तमान की हकीकत को बयां करने वाली है। पश्चिम बंगाल में जो कुछ भी 4 मई से हो रहा है वह कोई अप्रत्याशित नहीं है इसकी पूरी स्क्रिप्ट पहले ही तैयार की जा चुकी है। भाजपा की जीत के बाद यह सब होना सुनियोजित था, सुनिश्चित था। भाजपा ने देश में 11 साल के अपने शासनकाल में जिस तरह का वातावरण तैयार किया है यह सब उसी की परिणिति है। चुनाव नतीजे आते ही जिस तरह भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा टीएमसी कार्यालय एवं और कार्यकर्ताओं पर हमले किए गए हैं और हिंसा तथा आगजनी की गई है उसमें अब तक जगह—जगह से कहीं से दो तो कहीं से चार लोगों के मरने की खबरें आई है। भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा एक व्यक्ति को ममता जैसी साड़ी पहनाकर, जंजीरों में बांधकर सड़कों पर घूमाने और बुलडोजरों के साथ जुलूस निकाले जा रहे हैं तथा मीट विक्रेताओं की दुकानों में तोड़फोड़ की जा रही है। उसे अब प्रदेश भाजपा के नेताओं व प्रवक्ताओं द्वारा पोस्ट इलेक्शन की वारदातें बताकर या फिर हिंसा के लिए टीएमसी कार्यकर्ताओं को ही जिम्मेदार बना कर पल्ला झाड़ा जा रहा है, वह इस हिंसा की सच्चाई बताने के लिए काफी है। चुनाव नतीजों के बाद भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी का जो वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह कह रहे हैं कि अब सबका साथ, सबका विकास नहीं हमें यह नारा बदलना होगा जो हमारे साथ हम उसके साथ, जो हमारे साथ उसका विकास। बस उसी का विकास। उनके द्वारा पीएम मोदी के नारे को अब पूरी तरह से पलट दिया जाना भाजपा की नीति और नियत का खुलासा करने और भाजपा के असली चाल चरित्र को बताने समझने के लिए बहुत काफी है। केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा को रोकने के लिए जो ढाई से अधिक सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी वह सुरक्षा बल अब कहां है तथा वह क्यों इस हिंसा और आगजनी तथा अराजकता को नहीं रोक पा रहे हैं? इसका कोई जवाब अब किसी के पास नहीं है। भाजपा ने देश में धर्म और सांप्रदायिक राजनीति का वह जो बीज 11 सालों में बोया था वह किस हद तक वटवृक्ष बन चुका है तथा देश के आम आदमी को अब इसका किस तरह का खामियाजा भोगना पड़ रहा है? पश्चिम बंगाल के वर्तमान हालात को देखकर अब यहां भाजपा को वोट देने वाले भी सोचने पर विवश होंगे। सोशल मीडिया पर पश्चिम बंगाल के हालात को नेपाल के तख्तापलट जैसी घटनाओं के दौरान फैली अराजकता और गोधरा कांड जैसी घटनाओं से इसकी तुलना की जा रही है। भले ही यह सब गलत सही लेकिन पश्चिम बंगाल के वर्तमान हालात को देश और समाज के लिए ही नहीं बल्कि देश के लोकतंत्र के लिहाज से भी कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता है। इसके दूरगामी परिणाम देश की राजनीति और समाज पर पढ़ने तय हैं। पश्चिम बंगाल में भले ही भाजपा चुनावी नतीजों में जीत गई हो लेकिन सच बात यह है कि चुनावी नतीजों के बाद यहां जो कुछ हो रहा है वह भाजपा की सबसे बड़ी हार है। इस चुनाव की निष्पक्षता तो पहले से ही सवालों के घेरे में थी रही सही कमी अब परिणाम के बाद पैदा हुए हालात ने पूरी कर दी है। जिसके लिए सिर्फ भाजपा ही जिम्मेदार है, कोई और नहीं।
May 7, 2026अल्मोड़ा। सड़क हादसे में आज सुबह एक कार के खाई में गिर जाने से जहंा तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी वहीं कार के भी परखच्चे उड़ गये। सूचना मिलने पर पुलिस, एसडीआरएफ व स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू अभियान चलाया और मृतकों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। जहां अग्रिम कार्यवाही जारी है।उत्तराखण्ड राज्य में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आये दिन होने वाले सड़क हादसों मेें लोगों को जान माल का नुकसान हो रहा है। सड़क हादसे का ताजा मामला अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण क्षेत्र में सामने आया है यहंा रापड़—गगोडा—चमडखान—सोनी रानीखेत मोटर मार्ग पर एक कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना भयावह था कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार तीनों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुर्घटना के बाद इलाके में अफरा—तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। रेस्क्यू अभियान के दौरान काफी मशक्कत के बाद शवों को गहरी खाई से बाहर निकाला गया। बताया जा रहा है कि कार रानीखेत की ओर जा रही थी, तभी अचानक वाहन अनियंत्रित होकर खाई में समा गया। पुलिस के अनुसार फिलहाल मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
May 6, 2026देहरादून। राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी (आरआरपी) 7 मई को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को बादाम भेंट कर 2017 के लोकायुक्त गठन वाले चुनावी वादे को याद दिलाएगी।आज पार्टी प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवप्रसाद सेमवाल, प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल और देहरादून जिला अध्यक्ष नवीन पंत ने यह ऐलान किया। शिवप्रसाद सेमवाल ने कहा कि भाजपा ने 100 दिनों में लोकायुक्त बनाने का वादा किया था, लेकिन 9 साल बाद भी वादा अधर में लटका है। सुलोचना ईष्टवाल ने बताया, 7 मई 2026, बृहस्पतिवार को सुबह 10 बजे नेहरू कॉलोनी, फवारा चौक पर कार्यकर्ता एकत्र होंगे। इसके बाद भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचकर प्रदेश अध्यक्ष को बादाम भेंट की जाएगी। कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। नवीन पंत ने कहा कि जनता भ्रष्टाचार मुक्त शासन चाहती है और लोकायुक्त इसकी मजबूत गारंटी है।
May 6, 2026उत्तरकाशी। गंगोत्री हाईवे पर नदीी में गिरे बुजुर्ग को पुलिस व एसडीआरएफ ने सकुशल रेस्क्यू कर परिजनों को सौंपा।मिली जानकारी के अनुसार गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग गंगोरी, गरमपानी के समीप हाईवे से भागीरथी नदी तट पर गिरे श्रद्धालु के लिये पुलिस व एसडीआरएफ की टीम देवदूत बनकर सामने आयी है। जब रात्रि को कोतवाली मनेरी के गंगोरी, गरमपानी के समीप एक श्रद्धालु के भारीरथी नदी में गिरने की सूचना पर प्रभारी निरीक्षक मनेरी श्री दीपक नौटियाल के नेतृत्व में मनेरी पुलिस एवं एसडीआरएफ की टीम द्वारा तुरन्त मौके पर पहुंचकर सूझबूझ, साहस एवं दक्षता का परिचय देते हुए रस्सियों व अन्य रेस्क्यू उपकरणों की सहायता से रोड से नदी तट पर उतरकर घायल तक पहुँच बनाते हुये रात्रि के समय अंधेरे एवं कठिन परिस्थितियों के बावजूद कडी मशक्कत के बाद श्रद्धालु को सुरक्षित बाहर निकाला गया। 108 के माध्यम से प्राथमिक उपचार हेतु जिला चिकित्सालय उत्तरकाशी भिजवाया गया है। हरदा, मध्य प्रदेश निवासी श्रद्धालु तुलसीराम गहलोत (65 वर्ष) द्वारा बताया गया कि वह गाड़ी से उतरकर शौच करने गये थे, अचानक पैर फिसलने के कारण वह रोड से नीचे भागीरथी किनारे पर गिर गये थे। श्रद्धालु एवं उनके परिजनों द्वारा पुलिस और एसडीआरएफ की त्वरित कार्यवाही की सरहना करते हुये उत्तराखंड पुलिस का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। सभी यात्री अपने गंतव्य को सकुशल रवाना हुए। पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी, श्रीमती कमलेश उपाध्याय के निर्देशन में ट्टसेवा, सुरक्षा और संवेदनशीलता’ के संकल्प के साथ उत्तरकाशी पुलिस चारधाम यात्रियों की सुरक्षा हेतु हर पल तत्पर है।
May 6, 2026देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समाज कल्याण विभाग के पेंशनर्स को वन क्लिक के माध्यम से अप्रैल माह की पेंशन का भुगतान किया।आज यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समाज कल्याण विभाग के पेंशनर्स को वन क्लिक के माध्यम से अप्रैल माह की पेंशन का भुगतान किया। जिसमें शत प्रतिशत राज्य पोषित योजनाओं के 756682 पेंशनर्स को कुल 111 करोड़ 82 लाख 52 हजार रुपए की धनराशि जारी की गई, इसमें वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग, किसान, परित्यक्ता, भरण पोषण अनुदान, तीलू रौतेली और बौना पेंशन शामिल है। सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा सरकार अंत्योदय के लिए समर्पित है, इसलिए सरकार आर्थिक— सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के सशक्तिकरण पर विशेष जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जरूरतमंद और पात्र व्यक्ति को समाज कल्याण विभाग की पेंशन का लाभ दिलाने के लिए लगातार कैम्प आयोजित किए जा रहे हैं, जिसके फलस्वरूप अब प्रत्येक वर्ष 60 हजार से अधिक नए लोग समाज कल्याण की पेंशन से जुड़ रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगे भी इस तरह के बहुउददेशीय कैम्प आयोजित किए जाएं। साथ ही प्रत्येक वर्ष 59 वर्ष की आयु पूरे करने वाले लोगों के बीच सर्वे कर पात्र लाभार्थियों के आवेदन पत्र सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी कर लें, ताकि 60 साल की उम्र पूरी होते ही उन्हें योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों को योजनाओं का लाभ मिले, इसके लिए वार्षिक आय को व्यावहारिक बनाया जाए, साथ ही पेंशन योजनाओं सहित विभाग की अन्य योजनाओं की जानकारी एक जगह पर उपलब्ध कराने को कहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नवाचार अपनाने के लिए निर्देश देते हुए कहा कि, विभाग समाज कल्याण के क्षेत्र में कुछ बेस्ट प्रैक्टिस कर अन्य विभागों के साथ भी साझा करें। साथ ही कॉल सेंटर के माध्यम से बुजुर्गों और पेंशनर्स से संवाद भी करें। इस मौके पर विभागीय मंत्री खजान दास ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में विभाग, प्रत्येक जरूरतमंद का ख्याल रख रहा है। उन्होंने कहा कि पेंशन योजनाओं में पूरी तरह पारदर्शिता बरती जा रही है। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव श्ौलेश बगौली, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, निदेशक समाज कल्याण डॉ. संदीप तिवारी, अपर सचिव समाज कल्याण प्रकाश चंद्र एवं समाज कल्याण विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद थे।