April 30, 2026चुनावी रंण में एक अदृश्य जंग सोशल मीडिया पर भी दिखेगी मतदाताओं की सोच प्रभावित कर चुनावी रणनीति का केंद्र बनेगा सोशल मीडिया अब जनमत निर्माण का बनेगा एक बड़ा साधन पार्टियां कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल मैनेजमेंट पर कर रही निवेश देहरादून। सूबे में आगामी विधानसभा चुनाव में जहां एक ओर रैलियां, जनसभाएं और रोड शो दिखेगा। वहीं दूसरी ओर एक अदृश्य जंग सोशल मीडिया पर लड़ी जाएगी। विधानसभा चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका भले ही आंखों से दिखाई न दे, लेकिन इसका प्रभाव बेहद गहरा हो सकता है। यह न केवल मतदाताओं की सोच को प्रभावित कर रहा है, बल्कि चुनावी रणनीति का केंद्र भी बन सकता है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि इस बार की असली जंग सड़कों के साथ-साथ स्क्रीन पर भी लड़ी जाएगी है। इस यु( में पक्ष और विपक्ष की अग्नि परीक्षा होना लाजमी है।बता दें कि सोशल मीडिया के युग में अदृश्य चुनावी यु( न हो यह हो ही नहीं सकता है। राजनीतिक दल अब सोशल मीडिया को सिर्फ प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफार्म पर माइक्रो-टारगेटिंग के जरिए अलग-अलग वर्गों तक अलग संदेश पहुंचाया जाएगा है। युवा, महिलाएं और पहली बार वोट देने वाले मतदाता इस डिजिटल अभियान के मुख्य केंद्र में हैं। छोटे-छोटे मैसेज, वीडियो क्लिप और ग्राफिक्स के जरिए राजनीतिक नैरेटिव तैयार किया जा रहा है। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी कहे जाने वाले इस अनौपचारिक नेटवर्क के जरिए सूचनाएं तेजी से फैलती हैंकृचाहे वह सही हों या भ्रामक। यही कारण है कि सोशल मीडिया अब जनमत निर्माण का एक बड़ा साधन बनेगा है।सोशल मीडिया की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह उन मतदाताओं तक भी पहुंच बना लेता है जो सार्वजनिक रूप से अपनी राय जाहिर नहीं करते। घर-घर तक पहुंचने वाले मोबाइल फोन और सस्ते इंटरनेट ने साइलेंट वोटर को सीधे राजनीतिक संवाद का हिस्सा बनते है। नेताओं की छवि गढ़ने और विरोधियों के खिलाफ माहौल बनाने में सोशल मीडिया अहम भूमिका निभा सकता है। एक वायरल वीडियो या पोस्ट कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंचकर धारणा बदल सकता है। यही वजह है कि पार्टियां अब कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल मैनेजमेंट पर भारी निवेश कर रही हैं।सोशल मीडिया पर जहां राष्ट्रीय मुद्दे तेजी से ट्रेंड करते हैं, वहीं स्थानीय समस्याओं को भी अब डिजिटल मंच मिल गया है। गांव की सड़क, पानी या रोजगार से जुड़ी समस्याएं भी वायरल होकर बड़े मुद्दे बन सकते हैं, जिससे चुनावी एजेंडा प्रभावित होता है। सत्ता पक्ष जहां अपनी उपलब्धियों को डिजिटल माध्यम से प्रचारित कर रहा है, वहीं विपक्ष इन प्लेटफार्म्स का उपयोग सरकार की कमियों को उजागर करने के लिए कर रहा है। दोनों के बीच यह डिजिटल मुकाबला चुनाव से पूर्व ही तेज हो गया है।राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो आम मतदाता को आगामी विधानसभा चुनाव में ‘डिजिटल कुरुक्षेत्र’ के बारे में पूरी जानकारी रखनी होगी। हालांकि अभी चुनाव आयोग ने चुनाव की घोषणा तो नहीं की है, लेकिन अभी से सर्तक और जानकारी पूरी रखनी मतदाता की भी जिम्मेदारी है। क्योंकि वर्तमान जो दौर चल रहा है उससे आगामी विधानसभा चुनाव में मतदाता को ही नुकसान गलत पार्टी या नेता चुनकर हो सकता है। चुनाव अभी दूर है और सोशल मीडिया पर अभी से अदृश्य चुनावी वार चलने लगा है। इसलिए अभी से सावधान रहें।
April 30, 2026जब देश का मुख्य मीडिया पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे से पहले एग्जिट पोल के जरिए भाजपा की जीत का डंका पीटने और नेता तथा समीक्षक उसका पोस्टमार्टम करने में जुटे हैं तथा पीएम मोदी सिक्किम में फुटबॉल के मैदान पर गोल पर गोल दाग कर अपनी हौसला बुलंदी का इजहार कर रहे हैं। ऐसे में उड़ीसा से आई एक अत्यंत ही हृदय विधायक तस्वीर ने जनमानस को झकझोर कर रख दिया। आजादी के अमृत काल में आई यह तस्वीर डबल इंजन सरकारों और सरकारी सिस्टम के उस स्याह सच को बेनकाब करती है जिस पर किसी का भी सर शर्म से झुक जाए। उड़ीसा के क्योझार जिले का रहने वाला एक व्यक्ति जिसका नाम जीतू मुंडा है, अति निर्धन इस आदिवासी के कंधे पर उसकी बहन का कंकाल है जो तीन माह पूर्व मर चुकी है जिसे वह 3 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक तक ले जाता है और कहता है कि अब इससे हस्ताक्षर करा लो और मुझे खाते में जमा उसके 19,300 रूपये दे दो। उसका जब सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होता है तो सरकार और सिस्टम ही नहीं देश का पूरा समाज हिल जाता है। सत्ता में बैठे हुए लोग जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान का दावा करते है उनके मुंह पर जीतू मुंडा की यह तस्वीर एक करारा थप्पड़ ही नहीं है बल्कि उस समाज की कड़वी सच्चाई है जिन्हें आजादी के 80 साल बाद भी नंगे बदन भूखे पेट रहने पर मजबूर कर रखा है। खास बात यह है कि यह तस्वीर राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू के गृह राज्य के एक आदिवासी क्षेत्र से आई है। जिन्हें वर्तमान सरकार द्वारा राष्ट्रपति पद पर बैठाकर आदिवासियों की परम हितेषी और महिला सशक्तिकरण की एक मिसाल बनाकर पेश किया गया था। अनपढ़ और गरीब एक आदिवासी के लिए एक मृत्यु प्रमाण पत्र या जन्म प्रमाण पत्र बना पाना आज भी क्या आसान काम है? प्रमाण पत्र हासिल करने से ज्यादा सुगम रास्ता जीतू मुंडा को यही लगा की कब्र से खोदकर अपनी बहन का कंकाल ही बैंक कर्मियों को दिखा दे जिससे बैंक में जमा उसके पैसे उसे मिल जाए जो उसकी जीवन रेखा है। उड़ीसा के मुख्यमंत्री मोहन मांझी ने इस तस्वीर को देखकर डीएम को फोन खटखटाना पड़ा तब जाकर हरकत में आया सिस्टम तथा रेड क्रॉस जैसी संस्था। अब लोग सरकार से सवाल पूछ रहे हैं क्या भाजपा ने ऐसे ही अच्छे दिन लाने का वायदा किया था? सरकार और सिस्टम की संवेदनहीनता का इससे बड़ा और क्या उदाहरण हो सकता है? अभी बंगाल के चुनाव में पीएम मोदी लोगों को समझा रहे थे की डबल इंजन सरकार बनाओ और विकास पाओ। उड़ीसा में तो डबल इंजन सरकार है फिर यहां से जीतू मुंडा की ऐसी तस्वीर क्यों सामने आई? इस सवाल को सरकार से पूछने की हिम्मत क्या कोई कर सकता है? ऐसे हालात सिर्फ उड़ीसा के ही नहीं है पूरे देश के हैं। उत्तराखंड में भले ही सरकार कुपोषण मिटाने के नाम पर 430 करोड़ एक साल में खर्च करती है लेकिन राज्य के 25 फीसदी बच्चे 56 फीसदी महिलाएं कुपोषण का शिकार हैं। अभी कुछ समय पूर्व राज्य के एक गांव से पूरे परिवार के कुपोषित होने तथा मरणासन्न स्थिति में पहुंचने का मामला प्रकाश में आया था तब शासन प्रशासन हरकत में आया था। भले ही सरकार अपनी पीठ थपथपाती रहे लेकिन धरातल पर सच्चाई इससे अलग है। केंद्र सरकार 5 ट्रिलियन वाली अर्थव्यवस्था का डंका पीट रही है। अंबानी परिवार एक शादी पर 200 करोड़ फूंक देता है 75 करोड़ खर्च कर विदेशी कलाकारों को बुला सकता है। उघोगपति अरबो खरबो का कर्ज लेकर विदेश भाग सकते हैं। तथा करोड़ का कर्ज माफ हो सकता है वही जीतू मुंडा जैसे लोगों को उनका जमा किया 19300 रूपये भी बैंक से निकालने के लिए अपनी बहन की कब्र खोदकर कंकाल कंधे पर ढोना पड़ता है यह विडंबना नहीं तो क्या है यहां अंधभक्त कोरोना भागने को ताली बजा सकते हैं नेता चुनाव जीतने की गारंटी दे सकते हैं अगर कुछ नहीं हो सकता है तो वह है गरीबों का उद्धार, जो 80 साल में भी नहीं हो सका है।
April 30, 2026कैबिनेट बैठक:सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली ने कैबिनेट ब्रीफिंग में दी जानकारी उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 को मिली मंजूरी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हितों से जुड़े प्रस्तावों पर हुई चर्चा देहरादून। पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में आयोजित उत्तराखंड मंत्रिमंडल की अहम बैठक में 18 प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 सहित कई प्रस्तावों को मंजूरी मिली।सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली ने कैबिनेट ब्रीफिंग में जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 को मंजूरी। प्रवर्तन अधिकारी भी वर्दी पहनेंगे। वहीं शहरी विकास कुंभ मेला के लिए कार्यों की स्वीकृति आसान होगी। एक करोड़ तक के मेला अधिकारी, 5 करोड़ तक के मंडलायुक्त और बाकी शासन से स्वीकृत होंगे। इसके साथ ही आबकारी नीति में व्यय दर 6 प्रतिशत निर्धारित की गई थी, जिसके अनुरूप वाणिज्य कर विभाग ने अपनी नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी।उन्होंने बताया कि उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 में संशोधन को मंजूरी देते हुए वन दरोगा की आयु सीमा 21 से 35 वर्ष और वन आरक्षी की आयु सीमा 18 से बढ़ाकर 25 वर्ष कर दी गई है। साथ ही जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।अल्पसंख्यक मामलों में उत्तराखंड अल्पसंख्यक अधिनियम 2025 पहले ही अधिसूचित हो चुका है। अब कक्षा 1 से 8 तक संचालित 452 मदरसों को जिला स्तर से मान्यता लेने का प्रावधान किया गया है, जबकि 9वीं से 12वीं तक के लगभग 52 मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेनी होगी। इस संबंध में अध्यादेश लाया जाएगा, जिससे 50 हजार से अधिक छात्रों को लाभ मिलेगा।कार्मिक विभाग में प्रतीक्षा सूची की वैधता को लेकर स्पष्ट किया गया है कि यह एक वर्ष तक ही मान्य होगी और इसी अवधि के भीतर चयन होने पर ही उसे वैध माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत विशेष शिक्षा शिक्षकों की अर्हता तय करते हुए विशेष शिक्षक शिक्षा नियमावली को मंजूरी दी गई है। साथ ही शैक्षिक संवर्ग के लिए नई सेवा नियमावली भी लागू की गई है, जिससे सहायक अध्यापकों के 62 पदों को नियमित किया जा सकेगा।लोक निर्माण विभाग में 2023 की जेई भर्ती से जुड़े मामलों में दिव्यांग कोटे के 60 खाली पद अन्य श्रेणी से भरे जाने के बाद अब 6 नए पद सृजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है।वित्त विभाग में 1 जनवरी 2026 को लिए गए वर्कचार्ज कर्मचारियों के निर्णय पर हाईकोर्ट के स्टे की जानकारी कैबिनेट के संज्ञान में लाई गई। वहीं निविदा प्रक्रिया में डी श्रेणी के ठेकेदारों के लिए कार्य सीमा बढ़ाकर 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये कर दी गई है।उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का दायरा बढ़ाते हुए अब 21 अशासकीय कालेजों को भी इसमें शामिल किया गया है, जहां स्थायी प्राचार्य कार्यरत हैं। वन विभाग ने एक नई पहल के तहत वन क्षेत्रों की सीमा पर मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने की नीति को मंजूरी दी है। इससे स्थानीय लोगों की आय में वृ(ि होगी और मानव-वन्यजीव, विशेषकर हाथियों के साथ होने वाले संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी। इसके लिए वन सीमा मौन पालन, मधुमक्खी आधारित आजीविका एवं मानव-वन्यजीव संघर्ष नियमावली 2026 को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। कैबिनेट के प्रमुख फैसले-उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 में संशोधन को मंजूरी-वन दरोगा की आयु सीमा 21 से 35 वर्ष तय की गई-वन आरक्षी की आयु सीमा 18 से बढ़ाकर 25 वर्ष की गई।-जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को अब सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा-उत्तराखंड अल्पसंख्यक अधिनियम 2025 पहले ही अधिसूचित किया जा चुका है।-कक्षा 1 से 8 तक के 452 मदरसों को अब जिला स्तर से मान्यता मिलेगी।-कक्षा 9 से 12 तक के लगभग 52 मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेनी होगी।-प्रतीक्षा सूची अब एक वर्ष तक ही वैध मानी जाएगी।-सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप विशेष शिक्षा शिक्षकों की अर्हता तय करने वाली नियमावली को मंजूरी।-सहायक अध्यापकों के लिए सेवा नियमावली को स्वीकृति।-लोक निर्माण विभाग में हाईकोर्ट के आदेश के संदर्भ में जेई भर्ती से जुड़े मामलों की जानकारी कैबिनेट के संज्ञान में लाई गई।-वन सीमा क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति को मंजूरी।
April 30, 2026पीएम मोदी के विजन और सीएम धामी के नेतृत्व की प्रशंसा की श्री केदारनाथ धाम में गूंजा ट्टजय जय केदारा’ रुद्रप्रयाग। प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर ने आज श्री केदारनाथ धाम पहुंचकर बाबा केदार के दिव्य दर्शन प्राप्त कर विशेष पूजा—अर्चना की। इस दौरान उन्होंने यात्रा हेतु की गई व्यवस्थाओं की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के बावजूद यात्रा सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं सुचारू रूप से संचालित हो रही है।कैलाश खेर के मंदिर परिसर में पहुंचने पर जिला प्रशासन, केदार सभा के सदस्यों तथा मंदिर समिति के सदस्यो ने उनका स्वागत किया वहीं श्रद्धालुओं में भी उत्साह का माहौल देखने को मिला। कैलाश खेर ने अपना लोकप्रिय भक्ति गीत ट्टजय जय केदारा’ प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालु भी भावविभोर होकर शामिल हुए। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के विजन एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में श्री केदारनाथ धाम की व्यवस्थाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस, तीर्थ पुरोहितों, मंदिर समिति, केदार सभा के सदस्यों से मुलाकात कर यात्रा व्यवस्थाओं की जानकारी ली, तथा यात्रा हेतु की गई बेहतर व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि इतनी अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद व्यवस्था बनाए रखना प्रशंसनीय है। कैलाश खेर ने उच्च हिमालयी क्षेत्र की विषम परिस्थितियों के बीच भी श्रद्धालुओं की सुगम एवं सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन एवं पुलिस की तत्परता की सराहना की। उन्होंने जिलाधिकारी विशाल मिश्रा सहित जनपद की समस्त प्रशासनिक टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित ढंग से संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बाबा केदार की नगरी में पहुंचकर मन को अद्भुत शांति और ऊर्जा मिलती है।
April 29, 2026कानून से ऊपर कोई नहीं, कार्रवाई होगी कड़ीः डीएम देहरादून। 17 अवैध होमस्टे का पंजीकरण निरस्त कर करते हुए जिला अधिकारी सविन बसंल ने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं, कार्रवाई कडी होगी।आज यहां जनपद में कानून व्यवस्था सुदृढ़ बनाए रखने तथा आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशानुसार होमस्टे संचालन की गहन जांच कराई जा रही है। जांच में मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर जिला प्रशासन द्वारा बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रथम चरण में 17 होमस्टे के पंजीकरण निरस्त कर दिए गए हैं। संबंधित होमस्टे को विभागीय वेबसाइट से भी विलोपित किया जाएगा। जिले में होटल रूप में शहरी धनाडय अमीरों के होमस्टे पर डीएम ने कार्रवाई का डंडा चला दिया है। इसी क्रम में जिला प्रशासन ने प्रथम चरण में 17 होमस्टे का पंजीकरण निरस्त करते हुए पर्यटन वेबसाइट से विलोपित की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला प्रशासन ने ऑपरेशन सफाई शुरू करते हुए प्रथम चरण में 17 अवैध होमस्टे का पंजीकरण कर दिया है तथा आगे भी कार्रवाई गतिमान रहेगी। विगत कई माह से शहर में बढती आपराधिक घटना नशे एवं ओवर स्पीड में वाहन चलाना अदि घटनाएं बढी है। जिसका एक बडेघ् कारण में से एक होमस्टे में रात भर नियम विस्द्ध बार संचालन आदि निकल कर सामने आए है, जहां लाउड डीेजे नशा अय्याशी के अड्डे बन रहे होमस्टे में उपद्रवी प्रवृत्ति के व्यक्तियों के ठहरने से आमजन की जान का खतरा बना हुआ है वहीं जिला प्रशासन इस हरकत को कतई बर्दाश्त न करते हुए सख्त प्रभावी एक्शन का मन बना चुका है। होमस्टे होटल में निर्धारित प्रक्रिया पालन किए बिना पर्यटक एवं उपद्रवी प्रवृत्ति के लोग ठहराए जा रहे है। होमस्टे भी लीज पर संचालित हो रहे है जो जिले की कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहे है। उपद्रवी प्रवृत्ति के व्यक्तियों द्वारा शहर में हुड़दंग मचाने तथा नशे की हालत में ओवर स्पीड, पिस्टल तमचों से फायरिंग की घटनाएं भी सामने आ रही है। जिलाधिकारी ने महज 07 दिनों में मजिस्टे्रट की 05 टीमें बनाकर इस भारी अव्यवस्था के छिपे कारक को बाहर निकाल दिया है। जिलाधिकारी ने कहा कि होमस्टे योजना का मूल उद्देश्य स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक व्यंजनों के प्रचार—प्रसार तथा स्थानीय निवासियों की आय में वृद्धि करना है, किंतु निरीक्षण के दौरान कई होमस्टे का उपयोग होटल अथवा व्यावसायिक प्रतिष्ठान की भांति किया जाना पाया गया, जिससे अव्यवस्था एवं कानून—व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार सहसपुर एवं रायपुर विकासखंड के नगरीय क्षेत्रों में पंजीकृत होमस्टे की जांच हेतु क्षेत्रवार समितियों का गठन किया गया। समितियों द्वारा निरीक्षण उपरांत 17 होमस्टे ऐसे पाए गए जो उत्तराखण्ड गृह आवास (होमस्टे) नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे थे। इन सभी के पंजीकरण निरस्त करने की संस्तुति की गई, जिसे स्वीकार करते हुए प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गई। निरीक्षण के दौरान कई होमस्टे में रसोई की व्यवस्था नहीं पाई गई। अग्निशमन उपकरण अनुपलब्ध या उनकी वैधता समाप्त पाई गई। होमस्टे का उपयोग बारात घर एवं व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। कई स्थानों पर स्वामी का निवास नहीं पाया गया तथा इकाइयों को लीज/किराये पर संचालित किया जा रहा था। निर्धारित क्षमता से अधिक कमरों का संचालन किया जा रहा था। विदेशी नागरिकों के ठहराव की सूचना (सी—फॉर्म) उपलब्ध नहीं कराई गई। कुछ होमस्टे पंजीकृत होने के बावजूद संचालित नहीं पाए गए। निरीक्षण के दौरान निरंजनपुर स्थित एक होमस्टे में विदेशी नागरिकों के ठहराव की सूचना नियमानुसार उपलब्ध नहीं कराई गई तथा अग्निशमन उपकरण की वैधता समाप्त पाई गई। बल्लूपुर क्षेत्र में पंजीकरण से अधिक कमरों का संचालन किया जाना पाया गया। कुछ होमस्टे में स्वामी के स्थान पर अन्य व्यक्तियों द्वारा व्यावसायिक रूप से संचालन किया जा रहा था। मसूरी क्षेत्र में एक होमस्टे का स्वामित्व विक्रय किया जाना तथा अन्य का नवीनीकरण न कराया जाना पाया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि जनपद में संचालित सभी होमस्टे संचालक नियमावली का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें। भविष्य में भी इस प्रकार की जांच अभियान जारी रहेगा तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
April 29, 2026देहरादून। प्रदेश में चारधाम यात्रा सुचारु रूप से संचालित हो रही है। राज्य सरकार द्वारा यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि श्रद्धालु निश्चिंत होकर सुरक्षित एवं सुगम रूप से दर्शन कर सकें।चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों, श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए चारधाम यात्रा मार्गों सहित प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, पार्किंग एवं यातायात व्यवस्थाओं को सुदृढ़ एवं व्यवस्थित किया गया है।राज्य सरकार ने यात्रा व्यवस्थाओं के संबंध में भ्रामक जानकारी प्रसारित करने वालों तथा गंदगी फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, ताकि यात्रा की पवित्रता एवं व्यवस्थाएं बनी रहें।राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार चारधाम कपाट खुलने से 28 अप्रैल, 2026 की सांय 7:00 बजे तक मात्र दस दिनों में कुल 04 लाख 08 हजार 401 श्रद्धालु चारधाम में दर्शन हेतु पहुंचे हैं।धामवार विवरण इस प्रकार है— श्री बद्रीनाथ धाम: कपाट उद्घाटन के छह दिनों में 84,942 श्रद्धालु पहुंचे। श्री केदारनाथ धाम: सात दिनों में 2,07,452 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। यमुनोत्री धाम: दस दिनों में 57,794 श्रद्धालु पहुंचे। गंगोत्री धाम: दस दिनों में 57,863 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इसके अतिरिक्त गौमुख में अब तक 440 यात्री पहुंचे हैं। वर्तमान यात्रा सीजन में अब तक कुल 64,115 वाहन यात्रियों को लेकर चारधाम पहुंचे हैं। राज्य सरकार द्वारा सभी संबंधित विभागों के समन्वय से यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।