June 23, 2026फुटपाथ बिके, यात्री सड़कों पर पैदल चलने को हैं मजबूर नगर निगम के दावे खोखले, पुलिस की चौकसी पर सवाल सवाल यह नहीं कब्जा है, सवाल यह है कि हटाता कौन नहीं देहरादून। राजधानी देहरादून में यदि किसी को यह जानना हो कि प्रशासनिक व्यवस्था कितनी सक्रिय है, तो उसे किसी सरकारी रिपोर्ट की जरूरत नहीं। बस शहर के किसी भी प्रमुख फुटपाथ पर पांच मिनट खड़े हो जाइए। तस्वीर खुद बता देगी कि फुटपाथ अब पैदल यात्रियों के नहीं, बल्कि कब्जेदारों के हो चुके हैं। आम आदमी सड़क पर है और व्यवस्था फाइलों में। नगर निगम हर महीने अतिक्रमण हटाने के अभियान की तस्वीरें जारी करता है। पुलिस ट्रैफिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बताती है। सरकार स्मार्ट सिटी और सुशासन के दावे करती है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राजधानी के अधिकांश फुटपाथों पर खुलेआम दुकानें सजी हैं और पैदल चलने वाला व्यक्ति अपनी जान हथेली पर रखकर सड़क पर चलने को मजबूर है।देहरादून के घंटाघर से पल्टन बाजार, लालपुल से प्रिंस चौक, सहारनपुर रोड से राजपुर रोड और आईएसबीटी से बल्लूपुर सहित शहर की सभी सड़कों और फुटपाथों पर रोज दुकानें सजती हैं। यह कोई रातों-रात होने वाला कब्जा नहीं है। यह रोज होता है, सबकी आंखों के सामने होता है और फिर भी चलता रहता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल नगर निगम से है। आखिर जिन फुटपाथों की जिम्मेदारी उसके पास है, वे वर्षों से कब्जे में कैसे हैं? पुलिस से भी सवाल है कि जब ट्रैफिक पुलिस हर चौराहे पर मौजूद रहती है, तो सड़क पर उतरने को मजबूर पैदल यात्री उसे क्यों दिखाई नहीं देते? और सरकार से भी सवाल है कि क्या स्मार्ट सिटी का मतलब केवल सुंदर टाइलें बिछाना है, या उन पर आम नागरिक का अधिकार भी सुनिश्चित करना है?राजधानी में अतिक्रमण हटाने के अभियान अब लोगों के बीच मजाक का विषय बनने लगे हैं। सुबह जेसीबी चलती है, दोपहर तक फोटो और प्रेस विज्ञप्ति जारी होती है और कुछ दिन बाद वहीं फिर वही दुकानें लग जाती हैं। यदि यही कार्रवाई है, तो फिर यह मानने में क्या संकोच कि समस्या कब्जेदारों से ज्यादा व्यवस्था की इच्छाशक्ति की है?राजधानी के लालपुल में सिटी बस की चपेट में आए लोगों की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया। दुर्घटना के कारणों की जांच अपने स्थान पर है, लेकिन यह भी उतना ही बड़ा सच है कि जब फुटपाथ कब्जे में होंगे तो पैदल यात्री सड़क पर ही चलेंगे। और जब सड़क पर पैदल यात्री होंगे, तो हादसों का खतरा भी बढ़ेगा। यह केवल ट्रैफिक का मुद्दा नहीं, बल्कि शहरी नियोजन और प्रशासनिक जवाबदेही का भी सवाल है। शहर में वर्षों से एक सवाल गूंज रहा हैकृयदि रोज लगने वाले कब्जे अवैध हैं तो वह रोज लगते कैसे हैं? यदि वैध हैं तो फुटपाथों पर पैदल यात्रियों का अधिकार कहां गया? और यदि अवैध हैं, तो फिर कार्रवाई स्थायी क्यों नहीं होती? यही वह सवाल हैं जिनका जवाब न नगर निगम देता है, न पुलिस और न ही सरकार।सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर सड़कें चौड़ी कर रही है, फुटपाथ बना रही है और शहर को आधुनिक बनाने के दावे कर रही है। लेकिन सबसे बुनियादी अधिकारकृसुरक्षित पैदल चलने का अधिकारकृआज भी नागरिकों को नहीं मिल पाया है। विडंबना यह है कि राजधानी में वाहन के लिए सड़क है, दुकान के लिए फुटपाथ है, लेकिन पैदल चलने वाले के लिए कोई जगह नहीं बची। आमजन का सवाल है कि क्या नगर निगम केवल चालान और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित रहेगा? क्या पुलिस की जिम्मेदारी केवल वाहनों का चालान काटने तक है? क्या सरकार स्मार्ट सिटी की रैंकिंग से आगे बढ़कर नागरिकों की सुरक्षा पर भी ध्यान देगी? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही फुटपाथ पैदल यात्रियों को वापस मिलेंगे? अब इन प्रश्नों का उत्तर मांगे तो मांगे किससे।यह सर्व विदित है कि फुटपाथ पर कब्जा केवल अतिक्रमण नहीं, बल्कि आम नागरिक के अधिकार पर कब्जा है। जब व्यवस्था अपनी आंखों के सामने सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जे होते देख भी मौन रहती है, तो सवाल केवल प्रशासनिक विफलता का नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं का भी बन जाता है। राजधानी के लोग अब यह नहीं पूछ रहे कि फुटपाथ पर कब्जा किसने किया। वह यह पूछ रहे हैं कि फुटपाथ आखिर खाली कौन नहीं कराना चाहता?
June 23, 2026देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर के सभी अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, बड़े मॉल, होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं अन्य सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों का व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन संस्थानों में अग्निशमन संबंधी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, उन्हें तत्काल चिन्हित कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि फायर सेफ्टी उपकरणों की कार्यशीलता, आपातकालीन निकास मार्गों, विद्युत सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा आपदा की स्थिति में त्वरित निकासी की तैयारियों का विशेष रूप से परीक्षण किया जाए।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समयबद्ध ढंग से ऑडिट की प्रक्रिया पूरी की जाए। इस अवसर पर बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेन्द्रजीत बिन्द्रा, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, सचिव गृह शैलेश बगौली, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, डीजी अभिसूचना और सुरक्षा अभिनव कुमार, आईजी श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल, अपर सचिव बंशीधर तिवारी और अपर सचिव श्रीमती तृप्ति भट्ट मौजूद थे।
June 23, 2026कर्णप्रयाग और नगरासू प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई जारी, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई भ्रामक सूचनाएं फैलाने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई, सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का आह्वान देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम एवं हेमकुंट साहिब यात्रा पर आने वाले सभी श्रद्धालुओं की सुख-सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर में आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों का देवभूमि उत्तराखण्ड में हार्दिक स्वागत है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड आस्था, संस्कृति और प्रकृति की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों से अपील की कि वे देवभूमि उत्तराखण्ड के शांत वातावरण में अपनी यात्रा का पूर्ण आनंद लें तथा किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें।मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्णप्रयाग और नगरासू में सामने आई घटनाओं के संबंध में सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार, प्रशासन एवं पुलिस आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं। जांच में जो भी दोषी पाया गया है, उसके विरुद्ध कार्रवाई की गई है तथा सभी तथ्यों के आधार पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में चारधाम यात्रा के साथ-साथ हेमकुंट साहिब यात्रा भी सुचारु रूप से संचालित हो रही है। चारधाम यात्रा में अब तक 40 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं, हेमकुंट साहिब यात्रा के शुरुआती दिनों में ही श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 25 हजार अधिक दर्ज की गई है।मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में सिख गुरुओं द्वारा स्थापित तीन प्रमुख पवित्र स्थल—हेमकुंट साहिब, रीठा साहिब और नानकमत्ता साहिब—स्थित हैं, जहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि सभी का सम्मान करना देवभूमि उत्तराखण्ड की संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना के अनुरूप यहां आने वाले सभी लोगों का स्वागत एवं सत्कार किया जाता है।मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं प्रसारित करने वालों से अपील की कि वे समाज और समुदायों को बांटने का प्रयास न करें। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों ने मिल-जुलकर देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रामक और भड़काऊ खबरें फैलाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सभी धार्मिक स्थल आस्था, श्रद्धा और प्रेरणा के केंद्र हैं, जहां से समाज को सकारात्मक मार्गदर्शन प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट रुख है कि देवभूमि उत्तराखण्ड में ऐसा कोई कृत्य स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचे या किसी धर्म एवं आस्था को नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि संवाद, सद्भाव और सौहार्दपूर्ण वातावरण के माध्यम से ही सभी समस्याओं का समाधान संभव है।इस अवसर पर बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेन्द्रजीत सिंह बिन्द्रा, मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, सचिव गृह शैलेश बगौली, पुलिस महानिदेशक श्री दीपम सेठ, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, डीजी अभिसूचना एवं सुरक्षा श्री अभिनव कुमार, आईजी श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल, अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी तथा अपर सचिव श्रीमती तृप्ति भट्ट उपस्थित थे।
June 23, 2026देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि भूमि प्रबंधन एवं सुधारों के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाये।आज यहां मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में सचिव समिति की बैठक आयोजित की गई। इस दौरान राज्य में भूमि संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, भूमि संबंधी प्रक्रियाओं के सरलीकरण, डिजिटलीकरण, विवाद निस्तारण तथा निवेश अनुकूल व्यवस्था विकसित करने के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक विचार—विमर्श किया गया। बैठक में भूमि से जुड़े मामलों के बेहतर सेटलमेंट, भूमि को निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल बनाने, नवीन तकनीकों के समावेशन, विवाद निस्तारण प्रणाली को सुदृढ़ करने, राजस्व वादों को कम करने, रियल—टाइम मॉनिटरिंग एवं अपडेटेशन, जटिल राजस्व शब्दावली एवं प्रपत्रों के सरलीकरण तथा भूमि क्रय—विक्रय सहित सभी प्रक्रियाओं को पेपरलेस, कैशलेस एवं फेसलेस बनाने से संबंधित सुधारों पर विस्तार से चर्चा की गई।9क्रियान्वयन हेतु प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट गठित करने तथा उसके कार्यों की शासन स्तर पर नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में भूमि सर्वेक्षण, बंदोबस्त, मैपिंग, पुराने अभिलेखों एवं अक्षांशीय रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण, भूमि संबंधी रिकॉर्ड के अघतनकरण तथा निर्धारित समयावधि में पंजीकरण, दाखिल—खारिज, नोटिस एवं अन्य राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण पर विशेष चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने भूमि सर्वेक्षण एवं मैपिंग कार्यों के लिए नियुक्त की जाने वाली एजेंसियों के कार्यों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि भूमि प्रबंधन सुधारों कमुख्य उद्देश्य राज्य के सीमित भूमि संसाधनों का अधिकतम एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना, निवेशकों के लिए भूमि की उपलब्धता को सरल बनाना, भूमि बैंक प्रणाली को सुदृढ़ करना तथा भूमि संबंधी विवादों को न्यूनतम करना है। साथ ही न्यायिक एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी एवं डिजिटल बनाकर नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। बैठक में सचिव एस.एन. पाण्डेय द्वारा भूमि प्रबंधन सुधारों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जबकि विभिन्न विभागों के सचिवों ने अपने सुझाव एवं अनुभव साझा किए। बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल.एल. फैनई एवं आर. मीनाक्षी सुंदरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
June 23, 20262027 के रण के लिए कांग्रेस का महा-शक्ति प्रदर्शन, बदल दी है अपनी चुनावी नैरेटिव बैक-टू-बैक कांग्रेस के धरना-प्रदर्शनों से बैकफुट पर आयी प्रदेश की भाजपा सरकार कांग्रेस ने की बूथ स्तर पर किलेबंदी तेज, मंडल और सेक्टर प्रभारियों को सौंपी कमान देहरादून। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस ने राजधानी में बड़ा शक्ति प्रदर्शन कर यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी चुनावी मुकाबले के लिए पूरी तरह सक्रिय है। हाल के महीनों में कांग्रेस ने संगठनात्मक बैठकों, जनसभाओं, धरना-प्रदर्शनों और कार्यकर्ता सम्मेलनों के जरिए अपनी राजनीतिक मौजूदगी को मजबूत करने का प्रयास किया है।देहरादून में कांग्रेस के कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और नेताओं की मौजूदगी देखने को मिली। पार्टी ने महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और जनहित के मुद्दों को लेकर राज्य सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई। फरवरी 2026 में कांग्रेस ने लोकभवन कूच का आयोजन किया, जिसमें हजारों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जिससे कार्यक्रम को व्यापक राजनीतिक चर्चा मिली।कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से पार्टी ने प्रदेशभर में संगठन विस्तार अभियान चलाया है। कांग्रेस नेताओं के उत्तराखंड दौरे और अल्मोड़ा जनसभा को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना गया। पार्टी नेतृत्व ने देहरादून में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की तथा संगठन को एकजुट करने पर जोर दिया।विश्लेषकों का मानना है कि देहरादून में कांग्रेस का यह शक्ति प्रदर्शन केवल विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि भाजपा को सीधी चुनावी चुनौती देने का प्रयास है। कांग्रेस राज्य सरकार के खिलाफ जनभावनाओं को राजनीतिक समर्थन में बदलना चाहती है, जबकि भाजपा अपने संगठन और सरकार की उपलब्धियों के आधार पर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।देहरादून में हुए शक्ति प्रदर्शन से कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी राज्य में विपक्ष की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सत्ता में वापसी के लिए आक्रामक रणनीति पर काम कर रही है। आगामी विधानसभा चुनाव तक ऐसे कार्यक्रमों की संख्या बढ़ने की संभावना है, जिससे उत्तराखंड की राजनीति और अधिक गर्माने के संकेत मिल रहे हैं।बता दें कि देहरादून में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन आगामी विधानसभा चुनावों की राजनीतिक बिसात का शुरुआती संकेत माना जा रहा है। पार्टी संगठनात्मक मजबूती, जनसरोकारों के मुद्दों और बड़े जनसमूह के प्रदर्शन के जरिए यह दिखाने में जुटी है कि उत्तराखंड की चुनावी लड़ाई में वह भाजपा को कड़ी चुनौती देने की तैयारी कर चुकी है।
June 23, 2026हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार के मुखिया गली स्थित श्रीराम मंदिर के सामने सोमवार देर रात एक ई—रिक्शा शोरूम में भीषण आग लग गई। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। आग की चपेट में आने से शोरूम में खड़े कई ई—रिक्शा और अन्य सामान जलकर राख हो गए। वहीं सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग ने मौके पर पहुंच कर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग लगने की इस घटना में लाखो रूपये के नुकसान की आंशका जताई जा रही है।जानकारी के अनुसार बीती देर रात बंद शोरूम से अचानक धुआं और आग की लपटें उठती दिखाई दीं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे आसपास के क्षेत्र में अफरा—तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने बाल्टियों से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।सूचना मिलते ही मायापुर फायर स्टेशन से दमकल की टीम मौके पर पहुंची और करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान दुकान के बाहर खड़े वाहनों को भी सुरक्षित स्थान पर हटाया गया। स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) वंश बहादुर यादव ने बताया कि हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है, लेकिन ई—रिक्शा और अन्य सामान जलने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है तथा आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच जारी है।