August 10, 2026देहरादूून। सड़क दुर्घटना में देर रात एक टै्रक्टर की चपेट में आकर एक छात्रा की मौत हो गयी। सूचना मिलने पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अग्रिम कार्यवाही शुरू कर दी है।जानकारी के अनुसार बीती रात एक सड़क हादसे में बीटेक प्रथम वर्ष की 18 वर्षीय छात्रा की मौत हो गई। क्लेमेंटटाउन थाना क्षेत्र के चार खंबा चौक के पास पैदल जा रही छात्रा को पीछे से आए मिक्सर ट्रैक्टर ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि छात्रा ट्रैक्टर के नीचे आ गई और गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही क्लेमेंटटाउन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायल छात्रा को तत्काल एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मिक्सर ट्रैक्टर और उसके चालक को हिरासत में लेकर हादसे की जांच शुरू कर दी है।पुलिस के अनुसार बीती रात करीब 8ः45 बजे चार खंबा चौक के पास सड़क हादसे की सूचना मिली थी। बताया गया कि एक युवती मिक्सर ट्रैक्टर की चपेट में आने के बाद उसके नीचे आ गई है। सूचना मिलते ही थाना क्लेमेंटटाउन की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से घायल युवती को बाहर निकाला और एंबुलेंस के जरिए वेलमेड अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने युवती को मृत घोषित कर दिया। हादसे में जान गंवाने वाली छात्रा की पहचान वैष्णवी रावत ,उम्र 18 वर्ष के रूप में हुई है। वह मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली थी।वैष्णवी देहरादून स्थित ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में बीटेक प्रथम वर्ष की छात्रा थी। पढ़ाई के लिए वह देहरादून में रह रही थी। पुलिस के अनुसार, हादसे के समय वैष्णवी अपनी बड़ी बहन कृतिका रावत के साथ थी। दोनों बहनें चार खंबा चौक से पैदल अपने कमरे की ओर जा रही थीं। इसी दौरान पीछे से तेज गति से आए मिक्सर ट्रैक्टर ने वैष्णवी को टक्कर मार दी।टक्कर लगने के बाद वह सड़क पर गिर गई और ट्रैक्टर के नीचे आ गई। हादसे के बाद मौके पर चीख—पुकार मच गई और आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने हादसे में शामिल मिक्सर ट्रैक्टर को कब्जे में लेने के साथ ही चालक को हिरासत में लिया है। साथ ही मृतका के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। परिजनों की तहरीर मिलने के बाद मामले में नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
August 10, 2026हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजी समूची नगरी हरिद्वार। धर्म नगरी हरिद्वार में सावन के दूसरे सोमवार के आखिरी दिन में डाक कांवड़ भक्तों की भीड़ अपने चरम पर है। महाशिवरात्रि पर्व पर सभी शिव भक्त अपना—अपने स्थानों पर भगवान भोले शंकर का जलाभिषेक करेंगे। अब तक लगभग 4 करोड़ शिव भक्त गंगाजल लेकर अपने—अपने राज्यों के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। यात्रा के अंतिम पड़ाव में हरिद्वार में शिवभक्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।बता दें कि देश के कोने—कोने से श्रद्धालु गंगाजल लेने के लिए धर्मनगरी हरिद्वार पहुंच रहे हैं। उत्तराखंड सरकार की ओर से कांवड़ यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और सुचारु यात्रा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने यात्रा मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था, साफ—सफाई, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं सहित अन्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे। कावड़ यात्रा के दौरान अपना कांवड़ यात्रा का अनुभव साझा करते हुए शिव भक्तों ने कहा कि वह हर साल गंगा जल लेने हरिद्वार आते है। इस वर्ष उत्तराखण्ड सरकार ने सभी व्यवस्थाएं अच्छी कर रखी है। इस बार कावड़ यात्रा में उत्तराखंड सरकार तथा हरिद्वार प्रशासन द्वारा कांवड़ियों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की गई है, जिससे सभी कांवड़ियों की यात्रा को सुखमय बनाया गया है। उत्तर प्रदेश अमरोहा से सुनील कुमार ने कहा कि वह 10—15 साल से निरन्तर कांवड़ लेने हरिद्वार आ रहे हैं। इस साल जिला प्रशासन एवं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने जगह—जगह मेडिकल कैंप, पानी, शौचालय, लाइट खाने की सभी व्यवस्थाएं अच्छी तरह से की गई है इसके लिए वह जिला प्रशासन एवं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री का दिल से आभार व्यक्त करते है। कांवड़ियों के लिए उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री द्वारा सभी व्यवस्थाएं ठीक ढंग से की गई है जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त करते है। कांवड़ यात्रियों ने कहा कि इस बार यात्रा मार्गों पर सफाई व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और पानी की सुविधा पहले से काफी बेहतर दिखाई दे रही है। शिवमय हुई धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं ने जिला प्रशासन व पुलिस की ओर से की गई व्यवस्थाओं के लिए आभार व्यक्त किया। श्रद्धालुओं ने कहा कि बेहतर प्रबंधन और सेवाभाव के कारण कांवड़ यात्रा शिव भक्तों के लिए सुगम और सुरक्षित हो पाई है।
August 10, 2026देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि एसजीएसटी विभाग को टैक्स चोरी को रोकने के लिए एआई आधारित जाँच बढ़ाए जाने पर काम किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में राजस्व वृद्धि के सम्बन्ध में अधिकारियों के साथ बैठक ली। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने लक्ष्य के सापेक्ष अर्जित राजस्व की जानकारी ली एवं राजस्व वृद्धि के नवीन प्रयास एवं नवाचारों पर अधिकारियों से चर्चा की। मुख्य सचिव ने कहा कि एसजीएसटी में अभी काफी पोटेंशियल है। उन्होंने एसजीएसटी विभाग को टैक्स चोरी को रोकने के लिए एआई आधारित जाँच बढ़ाए जाने पर काम किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने अगले 4—5 महीनों में एआई बेस्ड मैकेनिज्म तैयार किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही, कर सम्बन्धी सभी विभागों का डाटा इंटीग्रेशन किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने परिवहन विभाग के एएनपीआर कैमरों के प्रभावी उपयोग के साथ ही सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में निबंधन और रजिस्ट्रेशन सम्बन्धी रखरखाव कार्यों का डिजिटाईजेशन किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वन या गैर क्षेत्रों में नये खनन लाटस चिन्हित किये जाएं तथा इस हेतु जिला प्रशासन का सहयोग भी प्राप्त किया जाए। उन्होंने परिवहन विभाग द्वारा स्थापित किये गये एएनपीआर कैमरा को खनन विभाग, वन विभाग तथा राज्य कर विभाग के साथ इंटिग्रेट किए जाने की बात कही। मुख्य सचिव ने कहा कि वन निगम जिन खनन व प्रकाष्ठ लॉट्स पर कार्य नहीं कर पा रहा है, उन पर वन विभाग अपने स्तर से कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जड़ी बूटी के क्षेत्र में भी अच्छा पोटेंशियल है। उन्होंने जड़ी बूटियों से सम्भावित आय का अध्ययन किए जाने की बात कही। कहा कि आय के नए स्रोत के रूप में कार्बन क्रेडिट, नये इको टूरिज्म स्थलों का विकास को सम्मिलित किया जाए। उन्होंने जनसामान्य को प्रकाष्ठ की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु ऑनलाईन व्यवस्था की सुनिश्चित किए जाने पर जोर दिया। साथ ही इसके लिए आईटीडीए से तकनीकी सहायता हेतु समन्वय किए जाने की बात कही। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव दिलीप जावलकर, बृजेश कुमार संत, रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव हिमांशु खुराना, श्रीमती अनुराधा पाल एवं मनमोहन मैनाली सहित सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
August 10, 2026रांची। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शनकारी छात्र जहां मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की कर रहे हैं तो वहीं मामले की जांच सीआईडी कर रही है। अब इस प्रक्रिया में प्रवर्तन निदेशालय की भी एंट्री हो गई है। प्रदर्शन के बीच छात्रों और सरकार के बीच बातचीत का सिलसिला जारी है और कल रविवार को छठे दौर की बातचीत बेनतीजा रही।प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी अब झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) 14वीं की प्रारंभिक परीक्षा समेत अन्य परीक्षाओं में धांधली की जांच करने जा रही है। जांच एजेंसी ने सीआईडी में दर्ज एफआईआर के आधार पर ईसीआइआर दर्ज कर ली है। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में देवेंद्र नाथ महतो करीब एक हफ्ते से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। कुल मिलाकर 6 प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर हैं। वहीं दूसरी ओर, जेपीएससी के तीनों सदस्यों ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जांच की मांग को लेकर हो रहे विरोध—प्रदर्शनों के बीच कल रविवार को इस्तीफा दे दिया था। लोक भवन की ओर से जारी बयान में बताया गया, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने अनिमा हांसदा, अजीता भटृाचार्य और जमाल अहमद के इस्तीफे स्वीकार भी कर लिए है।इससे पहले सीआईडी की ओर से इन तीनों सदस्यों को पेपर लीक समेत अन्य अनियमितताओं के आरोपों के संबंध में पूछताछ के लिए तलब किया गया है। सीआईडी की ओर से तलब किए जाने के बाद इन तीनों ने इस्तीफा दे दिया। जांच एजेंसी से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता सुप्रियो भटृाचार्य की पत्नी अजीता भटृाचार्य से आज सोमवार को पूछताछ की जानी है। जबकि जमाल अहमद से 12 अगस्त और हांसदा से 14 अगस्त को पूछताछ की जाएगी। इन तीनों लोगों की नियुक्ति सितंबर 2021 में की गई थी।इससे पहले आयोग के अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने 22 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जेपीएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका हैै। जबकि खियांग्ते से 28 जुलाई से अब तक चार बार लंबी पूछताछ की जा चुकी है। इस बीच प्रदर्शनकारी झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की अपनी मांग पर अड़े है। कल रविवार को राज्य सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच छठे दौर की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला।
August 10, 2026देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय, देहरादून में एक बार फिर गंभीर घटना सामने आई है। यहंा मेडिसिन विभाग में भर्ती एक मरीज के साथ आए 12 वर्षीय बच्चे के साथ अस्पताल के सफाईकर्मी द्वारा लिफ्ट में अश्लील इशारे करने का आरोप लगा है। घटना के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना रविवार दोपहर करीब दो बजे घटी। बच्चा लिफ्ट में जा रहा था। लिफ्ट में पहले से मौजूद सफाईकर्मी ने उसके साथ अश्लील इशारे किए। लिफ्ट से बाहर निकलते ही बच्चे ने परिजनों और अस्पताल में मौजूद अन्य लोगों को पूरी घटना बताई। परिजनों ने तुरंत अस्पताल प्रबंधन से शिकायत की और आरोप लगाया कि सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। परिजनों के गुस्से और आरोपों के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैला। वीडियो में घटना से जुड़ी शिकायतें और आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था। वहीं आरोपी सफाईकर्मी ने आरोपों को गलतफहमी बताया है। उसका कहना है कि वह बच्चे के साथ केवल मजाक कर रहा था और उसकी कोई गलत मंशा नहीं थी। प्रशासन ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज करने शुरू कर दिए हैं।बता दे कि यह घटना अस्पताल में पहली नहीं मानी जा रही। पहले भी सुरक्षा और कर्मचारी व्यवहार से जुड़ी शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जिसकी वजह से प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने कहा कि चिकित्सा अधीक्षक से पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल प्रबंधन की जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि वास्तव में क्या हुआ था।
August 10, 2026राजनीति में कुछ शब्द भाषण खत्म होने के साथ खत्म हो जाते हैं और कुछ शब्द भाषण के बाद सवाल बनकर रह जाते हैं। प्रयागराज में राहुल गांधी ने युवाओं के संदर्भ में दर्द, डेटा और दौलत की जो त्रयी रखी, वह इसी दूसरी श्रेणी की है। तीन शब्द हैं, लेकिन इनके भीतर आज के युवा भारत की एक लंबी कहानी छिपी है। दर्द उस युवा का है जो पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में वर्षों निकाल देता है। डेटा उस व्यवस्था का सवाल है जो बेरोजगारी, भर्ती, परीक्षा और रोजगार के वास्तविक आंकड़ों को सामने रखने से बचती हुई दिखाई देती है और दौलत उस आर्थिक ढांचे का सवाल है, जिसमें अवसर और संपत्ति का वितरण लगातार बहस का विषय बना हुआ है। राहुल गांधी ने इन तीन शब्दों को एक राजनीतिक सूत्र की तरह पेश किया है। अब इस सूत्र की असली परीक्षा यह है कि क्या विपक्ष इसे केवल भाषण का नारा बनाएगा या युवाओं की जिंदगी बदलने का कार्यक्रम भी तैयार करेगा। युवा बेरोजगार है यह बात अब किसी राजनीतिक दल के लिए नई नहीं है। हर चुनाव में रोजगार सबसे बड़े मुद्दों में शामिल रहता है। लेकिन रोजगार का सवाल सिर्फ नौकरी मिलने या न मिलने का सवाल नहीं है। एक युवा की समस्या तब शुरू होती है जब वह वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है। फिर परीक्षा होती है तो पेपर लीक की खबर आती है। भर्ती प्रक्रिया शुरू होती है तो पदों की संख्या कम पड़ जाती है। परिणाम आता है तो विवाद खड़ा हो जाता है। अदालत जाती है तो साल निकल जाते हैं। युवा की उम्र बढ़ती जाती है और उसकी उम्मीद छोटी होती जाती है। यही दर्द है। यह दर्द केवल आर्थिक नहीं है। इसमें समय का नुकसान है, परिवार की उम्मीदों का दबाव है और उस आत्मविश्वास का टूटना है जो एक युवा को यह विश्वास दिलाता है कि मेहनत करने से उसका भविष्य बेहतर हो सकता है। इसलिए रोजगार पर राजनीति करते समय आंकड़ों से ज्यादा जरूरी है उस युवा की जिंदगी को समझना। लोकतंत्र में आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं होते। वे सरकार के कामकाज का आईना होते हैं। कितनी नौकरियां निकलीं?कितनी भर्तियां पूरी हुईं?कितने पद खाली हैं?कितनी परीक्षाएं रद्द हुईं?कितने युवाओं ने परीक्षा दी?कितनों को रोजगार मिला?कितने शिक्षित युवा बेरोजगार हैं? इन सवालों के जवाब सार्वजनिक और विश्वसनीय होने चाहिए। क्योंकि आंकड़ा छिपता है तो बहस अनुमान में बदल जाती है और अनुमान राजनीति का हथियार बन जाता है। युवाओं को केवल यह बताना पर्याप्त नहीं कि रोजगार बढ़ रहा है या अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उस विकास में उनके लिए कितनी जगह बनी है। युवा पूछ रहा हैकृजीडीपी बढ़ी तो मेरी नौकरी कहां बढ़ी? यह सवाल असहज जरूर है, लेकिन लोकतंत्र में असहज सवाल ही सबसे जरूरी सवाल होते हैं। तीसरा शब्द सबसे ज्यादा राजनीतिक है दौलत। देश में संपत्ति पैदा हो रही है। नए उद्योग खड़े हो रहे हैं। कंपनियां बढ़ रही हैं। बाजार फैल रहा है। लेकिन सवाल यह है कि इस आर्थिक विकास का लाभ समाज के कितने हिस्से तक पहुंच रहा है? अगर आर्थिक विकास का बड़ा हिस्सा कुछ लोगों और कुछ क्षेत्रों तक सीमित रह जाए और दूसरी तरफ बड़ी संख्या में युवा स्थायी रोजगार के लिए संघर्ष करते रहें तो विकास का अर्थ अधूरा रह जाता है। दौलत का सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रोजगार और संपत्ति एक-दूसरे से जुड़े हैं, जिस अर्थव्यवस्था में छोटे कारोबार कमजोर होंगे, स्थानीय उद्योग बंद होंगे, कृषि की आय पर दबाव होगा और रोजगार का बड़ा हिस्सा अस्थायी होगा, वहां केवल आर्थिक विकास के बड़े आंकड़े युवा की बेचौनी को शांत नहीं कर सकते। युवा को सिर्फ नौकरी नहीं चाहिए। उसे अवसर चाहिए। यहां दर्द सिर्फ बेरोजगारी का नहीं है। यह अपने घर से दूर जाने का दर्द भी है। अगर पहाड़ में शिक्षा है लेकिन उसके बाद रोजगार नहीं है, अगर युवा डिग्री लेकर शहर की ओर जाने को मजबूर है, तो विकास की कहानी में एक अध्याय अभी भी अधूरा है। राहुल गांधी ने तीन शब्द कह दिए। अब गेंद विपक्ष के पाले में है। अगर दर्द को राजनीति का मुद्दा बनाया गया है तो उसका समाधान क्या है? अगर डेटा की बात है तो क्या कांग्रेस और विपक्षी दल राज्यों में भर्ती, रोजगार और बेरोजगारी का अपना पारदर्शी डेटा सार्वजनिक करेंगे? अगर दौलत का सवाल उठाया गया है तो क्या वे बताएंगे कि छोटे उद्योग, स्टार्टअप, कृषि, पर्यटन और स्थानीय रोजगार को मजबूत करने की उनकी ठोस आर्थिक नीति क्या होगी? युवा अब केवल भाषण नहीं सुनना चाहता। वह पूछता है मेरे लिए योजना क्या है? यही वह जगह है जहां राजनीतिक नारे और राजनीतिक कार्यक्रम के बीच फर्क दिखाई देता है। भारतीय राजनीति ने लंबे समय तक युवाओं को एक बड़े वोट बैंक के रूप में देखा है। चुनाव आते हैं तो युवा सम्मेलन होते हैं, रोजगार के वादे होते हैं, नई योजनाओं की घोषणाएं होती हैं। लेकिन युवा केवल वोटर नहीं है। वह देश की सबसे बड़ी कार्यशील शक्ति बनने जा रहा है। अगर उसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, रोजगार और उद्यम का अवसर मिलता है तो वही जनसंख्या आर्थिक ताकत बन सकती है। अगर अवसर नहीं मिलता तो वही जनसंख्या असंतोष का स्रोत भी बन सकती है। इसलिए दर्द, डेटा, दौलत को केवल राहुल गांधी का राजनीतिक नारा समझना गलती होगी। यह तीन शब्द सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए सवाल हैं। दर्द पूछता है युवा परेशान क्यों है? डेटा पूछता है सच्चाई कितनी है? दौलत पूछती है विकास का फायदा किसके पास गया? और लोकतंत्र का सबसे बड़ा सवाल इन तीनों को जोड़कर बनता है अगर इसका जवाब हां है तो सरकार को आंकड़ों के साथ सामने आना चाहिए। अगर जवाब नहीं है तो विपक्ष को सिर्फ आलोचना नहीं, विकल्प देना चाहिए। क्योंकि देश का युवा अब भाषणों की तालियों से आगे निकल चुका है। उसे भर्ती की तारीख चाहिए, परीक्षा की विश्वसनीयता चाहिए, रोजगार का अवसर चाहिए और अपनी मेहनत के बदले सम्मानजनक भविष्य चाहिए। दर्द को पहचानना राजनीति की शुरुआत है। डेटा को सामने रखना लोकतंत्र की जिम्मेदारी है। लेकिन उस दर्द […]