August 6, 2026बारिश बनी राहत भी, आफत भी,अस्पतालों में बढ़ी निगरानी प्रदेश के नगर निकायों को युद्धस्तर पर अभियान के निर्देश देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही मानसूनी बारिश जहां गर्मी से राहत लेकर आई है, वहीं इसके साथ एक नया खतरा भी तेजी से सिर उठाने लगा हैकृडेंगू। बारिश के कारण जगह-जगह जलभराव, नालियों में ठहरा पानी, निर्माण स्थलों पर जमा वर्षा जल और घरों के आसपास रखे खुले बर्तनों में पानी भरने से एडीज मच्छरों के पनपने की आशंका बढ़ गई है। इसी खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर हैं। अस्पतालों में विशेष निगरानी बढ़ा दी गई हैए जबकि नगर निकायों और स्वास्थ्य टीमों को रोकथाम के लिए व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश के कई जिलों में स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू की रोकथाम को लेकर सर्विलांस तेज कर दिया है। सरकारी अस्पतालों में बुखार से पीड़ित मरीजों की जांच बढ़ाई जा रही है, जबकि निजी अस्पतालों से भी संदिग्ध मामलों की नियमित जानकारी मांगी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी संक्रमण को तेजी से फैलने का मौका दे सकती है।डेंगू से लड़ाई केवल अस्पतालों में नहीं जीती जा सकती। इसकी असली लड़ाई घरों, गलियों और मोहल्लों में लड़ी जाती है। प्रशासन ने नगर निगमए नगर पालिकाओं और ग्राम पंचायतों को जलभराव वाले स्थानों की पहचान कर तत्काल सफाई, फागिंग और एंटी लार्वा दवा के छिड़काव के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने में जुटी हैं। एडीज मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में पनपता है। इसलिए घरों की छतों, कूलर, गमलों, टायरों, पानी की टंकियों और अन्य पात्रों में जमा पानी नियमित रूप से खाली करना सबसे प्रभावी उपाय है।सरकारी अस्पतालों में डेंगू जांच की व्यवस्था मजबूत की जा रही है। चिकित्सकों को निर्देश दिए गए हैं कि तेज बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द या प्लेटलेट्स कम होने जैसे लक्षणों वाले मरीजों की समय पर जांच सुनिश्चित की जाए। स्वास्थ्य विभाग का जोर इस बात पर है कि संदिग्ध मरीजों की पहचान शुरुआती चरण में हो, ताकि गंभीर स्थिति बनने से पहले इलाज शुरू किया जा सके।उत्तराखंड में मानसून के दौरान अक्सर लोग भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं पर अधिक ध्यान देते हैं, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि डेंगू जैसी बीमारियां भी उतनी ही गंभीर चुनौती बन सकती हैं। यदि समय रहते रोकथाम नहीं की गई, तो मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है और स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि डेंगू की रोकथाम केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है। यदि लोग सप्ताह में एक दिन अपने घर और आसपास जमा पानी की जांच करें, पानी की टंकियों को ढककर रखें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें और मच्छररोधी उपाय अपनाएं तो संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।हर वर्ष मानसून के साथ डेंगू का खतरा सामने आता है। सवाल यह है कि क्या हमारी तैयारी भी हर साल उतनी ही मजबूत होती है क्या नालों की सफाई समय पर होती है क्या जलभराव वाले स्थानों की स्थायी पहचान कर समाधान निकाला जाता है क्या शहरी विकास योजनाओं में जल निकासी को पर्याप्त महत्व दिया जाता है। यदि इन सवालों के जवाब संतोषजनक नहीं हैं, तो केवल फागिंग और जागरूकता अभियान से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा।मानसून प्रकृति का उत्सव है, लेकिन लापरवाही इसे बीमारी का मौसम भी बना सकती है। डेंगू के खिलाफ प्रशासन की सक्रियता जरूरी है पर उससे भी अधिक जरूरी है नागरिकों की भागीदारी। यदि सरकार की तैयारी और जनता की जागरूकता साथ चले तभी इस मानसून में डेंगू के खतरे को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। वरना बारिश की बूंदों के साथ मच्छरों का खतरा भी हर घर की दस्तक बन सकता है।
August 6, 2026मानसून में सिर्फ बारिश नहीं, चट्टानों से मौत भी लुढ़क कर नीचे आती है पहाड़ी क्षेत्रों में रेड-आरेंज अलर्ट नहीं समझता पहाड़ी मन, बादल घिरते ही सहम जाती हैं छतें और ढलानें स्कूल गए बच्चे, सड़क पर दौड़ती टैक्सी, रात को बेघर होने की आशंका में बिसूरते बुजुर्ग पहाड़ में आफत बनकर बरसती है बारिश, विकास के दावों के बीच मौत का अनवरत पहरा देहरादून। उत्तराखंड में बारिश का मौसम शुरू होते ही मौसम विभाग का एक नया शब्द हमारे जीवन का हिस्सा बन जाता है आरेंज अलर्ट, रेड अलर्ट, भारी से बहुत भारी बारिश। लेकिन पहाड़ का आदमी मौसम विभाग की भाषा नहीं समझता। वह सिर्फ इतना जानता है कि जब बादल घिरते हैं तो उसके घर की छत, खेत की मेड़, सड़क का किनारा और पहाड़ की ढलान सब एक साथ डराने लगते हैं। यह डर काल्पनिक नहीं है। यह डर उस बच्चे का है जो स्कूल गया है और शाम तक घर नहीं लौटा। यह डर उस मां का है, जिसका बेटा टैक्सी चलाकर परिवार पालता है और हर बारिश में भूस्खलन वाले रास्तों से गुजरता है। यह डर उस बुजुर्ग का है, जिसे रात में यह नहीं पता कि सुबह तक उसका घर उसी जगह रहेगा या मलबे में दब जाएगा। पहाड़ में बारिश सिर्फ आसमान से नहीं गिरती। मौत भी पहाड़ की चट्टानों से लुढ़कती हुई नीचे आती है।बरसात शुरू होते ही सड़कें बंद होने लगती हैं। कहीं पहाड़ दरक जाता है, कहीं पुल बह जाता है, कहीं नदी अपना रास्ता बदल देती है। प्रशासन हर साल कहता है कि तैयारी पूरी है। मशीनें तैनात हैं। आपदा प्रबंधन अलर्ट पर है। लेकिन सवाल यह है कि अगर तैयारी पूरी है, तो हर साल वही तस्वीरें क्यों दोहराई जाती हैं? क्यों हर मानसून में सैकड़ों गांव दुनिया से कट जाते हैं? क्यों मरीज अस्पताल नहीं पहुंच पाते? क्यों गर्भवती महिलाओं को डोली में उठाकर कई किलोमीटर चलना पड़ता है? क्यों बच्चों की पढ़ाई रुक जाती है? पहाड़ का आदमी बारिश से नहीं हारता। वह व्यवस्था की लापरवाही से हारता है।उत्तराखंड की त्रासदी यह है कि यहां सड़क बनती भी है तो अगली बरसात में बह जाती है। पुल बनता है तो पहली बाढ़ में कमजोर पड़ जाता है। पहाड़ काटे जाते हैं, लेकिन यह सोचने की फुर्सत कम दिखाई देती है कि प्रकृति का भी अपना संतुलन होता है। विकास जरूरी है, लेकिन विकास का मतलब यह नहीं कि पहाड़ की छाती को बिना समझे काट दिया जाए। आज पहाड़ का नागरिक एक अजीब मनःस्थिति में जी रहा है। वह घर से निकलते समय यह नहीं सोचता कि कितनी देर में पहुंचेगा। वह यह सोचता है कि पहुंच भी पाएगा या नहीं। आप जरा कल्पना कीजिए। एक बस में बैठे यात्री को यह पता नहीं कि अगले मोड़ पर सड़क होगी या नहीं। एक टैक्सी चालक को नहीं पता कि जिस पहाड़ के नीचे से वह गुजर रहा है, वह अगले पांच मिनट में वहीं रहेगा या टूटकर उसके ऊपर आ जाएगा। यह सिर्फ यात्रा नहीं है, यह हर दिन मौत के साथ समझौता है। और सबसे दुखद बात यह है कि कुछ दिन बाद सब सामान्य हो जाता है। टीवी चैनलों पर दूसरी खबरें आ जाती हैं। सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो जाती है। पहाड़ में मारे गए लोगों के नाम धीरे-धीरे सरकारी फाइलों में बदल जाते हैं।क्या पहाड़ की जिंदगी इतनी सस्ती है?क्या हर मानसून में कुछ लोगों की मौत को हमने नियति मान लिया है?क्या आपदा केवल राहत राशि बांटने का अवसर है? सवाल केवल प्राकृतिक आपदा का नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या हमने पहाड़ के लिए ऐसी विकास नीति बनाई है जो उसकी भौगोलिक संवेदनशीलता को समझती हो? क्या सड़क निर्माण, भवन निर्माण और पर्यटन परियोजनाओं में वैज्ञानिक सलाह को पर्याप्त महत्व दिया जाता है? क्या जोखिम वाले क्षेत्रों में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने की गंभीर योजना है? पहाड़ केवल पर्यटन स्थल नहीं है। वहां लाखों लोग रहते हैं। उनके सपने हैं, उनका संघर्ष है, उनका जीवन है। हर बरसात में उन्हें यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उनका सबसे बड़ा दुश्मन बादल नहीं, बल्कि व्यवस्था की तैयारी की कमी है।बारिश पर किसी का बस नहीं चलता। लेकिन बारिश को आपदा बनने से रोकने की तैयारी इंसान के हाथ में है। जब तक सड़कें मौसम के हिसाब से नहीं बनेंगी, जब तक पहाड़ की प्रकृति को समझकर विकास नहीं होगा, जब तक चेतावनी के साथ सुरक्षित विकल्प भी नहीं होंगे, तब तक उत्तराखंड में मानसून का मतलब रहेगा, सिर पर मंडराती मौत। और शायद पहाड़ का सबसे बड़ा दर्द यही है कि यहां लोग बारिश की बूंदें नहीं गिनते, बल्कि हर बरसात में यह गिनते हैं कि इस बार मौत किस गांव का पता पूछते हुए आई।
August 6, 2026देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मॉनिटरिंग से राहत एवं पुनर्निणाम कार्य में तेजी आयी और मालदेवता मे आवागामन सुरक्षित हुआ।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सतत मार्गदर्शन एवं जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देशन में मालदेवता, सौड़ा सरौली तथा आसपास के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत, पुनर्निर्माण एवं सुरक्षा कार्य युद्धस्तर पर संचालित किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा क्षतिग्रस्त सड़कों के पुनर्निर्माण, सुरक्षा दीवारों के निर्माण तथा नदी तटों के संरक्षण संबंधी कार्यों में तेजी लाते हुए प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन को सुरक्षित एवं सुचारु बनाया जा रहा है। गत मंगलवार को हुई भारी वर्षा के कारण रायपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत अनेक सड़क मार्ग एवं सुरक्षा संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गई थीं। स्थिति का स्वयं स्थलीय निरीक्षण करने के उपरांत जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने संबंधित विभागों को तत्काल प्रभाव से पुनर्स्थापन एवं सुरक्षा कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के परिणामस्वरूप अधिकांश आवश्यक कार्य निर्धारित समय में पूर्ण कर लिए गए हैं। जिला प्रशासन द्वारा संवेदनशील स्थलों पर निर्मित सुरक्षा उपायों की निरंतर निगरानी की जा रही है। सुरक्षा दीवारों पर लगाए गए जाल तथा अन्य सुरक्षात्मक व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि लगातार हो रही वर्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की संभावना को न्यूनतम किया जा सके तथा स्थानीय नागरिकों की आवाजाही निर्बाध बनी रहे। लगातार वर्षा के कारण सोंग नदी के बढ़े जलस्तर से मालदेवता स्थित कलिंगा नहर भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। सिंचाई विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नहर का पुनर्निर्माण पूर्ण कर लिया है, जिससे किसानों को पुनः सिंचाई हेतु पर्याप्त जल उपलब्ध होने लगा है। इसके अतिरिक्त प्रशासन द्वारा पोकलैंड एवं जेसीबी मशीनों के माध्यम से नदी का चौनलाइजेशन कार्य भी युद्धस्तर पर कराया जा रहा है। नदी के बहाव को नियंत्रित करने तथा संभावित क्षति को कम करने के उद्देश्य से संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा—निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव एवं पुनर्निर्माण कार्यों की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। जिला प्रशासन भी विभिन्न विभागों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए राहत एवं पुनर्वास कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता के आधार पर धरातल पर संचालित कर रहा है। अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा ने बताया कि अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त सड़क मार्गों एवं सुरक्षा दीवारों के पुनर्निर्माण का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी के निर्देशन में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) द्वारा क्षतिग्रस्त सड़क मार्गों एवं सुरक्षा दीवारों का निर्माण कराया गया है, जबकि मालदेवता क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग द्वारा क्षतिग्रस्त स्थलों के पुनर्स्थापन का कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही सिंचाई विभाग द्वारा कलिंगा नहर का पुनर्निर्माण भी पूर्ण कर लिया गया है, जिससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई जल की समस्या से राहत मिल गई है। जिलाधिकारी ने मानसून अवधि के दौरान सभी संवेदनशील क्षेत्रों की सतत निगरानी जारी रखने तथा जनसुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यकता पड़ने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है।
August 6, 2026चोरी के जेवरात, घटना में प्रयुक्त स्कूटी व औजार बरामद पौड़ी। अंर्तराज्जीय चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने तीन शातिरो को गिरफ्तार कर लिया है। जिनके पास से चुराये गये जेवरात, घटना मेें प्रयुक्त स्कूटी व औजार बरामद किये गये है। आरोपी घरों की रेकी कर घटना को अंजाम दिया करते थे।जानकारी के अनुसार बीती 3 अगस्त को प्राची रावत निवासी कोटद्वार द्वारा कोतवाली कोटद्वार में तहरीर देकर बताया गया था कि वह 2 अगस्त को अपने घर से अपनी माता को छोडने घर से बहार गयी हुई थी, जब वह घर वापस आयी तो घर का ताला टूटा हुआ मिला, और उनके घर किसी अज्ञात द्वारा ज्वैलरी व अन्य सामान चोरी कर लिया गया। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर चोरों की तलाश शुरू कर दी गयी। पुलिस टीम द्वारा की गई सघन जांच एवं अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप चोरी की घटना में संलिप्त 3 आरोपियोंं की पुष्टि हुई। इसके उपरांत पुलिस टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों शातिर आरोपियों राहत अली (उम्र 35 वर्ष) निवासी— दिल्ली, अरुण (उम्र 23 वर्ष), निवासी— अमरोहा, उत्तर प्रदेश, व रिहान (उम्र 22 वर्ष), निवासी—संभाल सराय उत्तर प्रदेश को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस टीम द्वारा चुरायी गयी ज्वैलरी, घटना में प्रयुक्त स्कूटी तथा चोरी को अंजाम देने में इस्तेमाल किए गए उपकरण सब्बल, प्लास, पेचकस, बोल्ट लीवर एवं कटर बरामद किए गए हैं।पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि राहत अली इस गिरोह का सरगना (गैंग लीडर) है, जिसके विरुद्ध दिल्ली में विभिन्न आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। बताया कि वे चोरी की घटनाओं को अंजाम देने से पूर्व अपने निशाने पर लिए गए घरों की गहन रेकी करते थे। घर में रहने वाले लोगों की दिनचर्या, आवाजाही एवं आसपास की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के बाद उचित अवसर मिलने पर रिहान और अरूण निगरानी करते थे और राहत अली द्वारा घर में घुस कर चोरी की वारदात को अंजाम देता था।
August 6, 2026…लेकिन सफाई देने की जिम्मेदारी मतदाता की क्यों? चुनाव से पहले उत्तराखंड में सरकारी चूक का हर्जाना भर रहा है आम मतदाता एआई ने पकड़ी गड़बड़ी, पर सवाल यह कि कंप्यूटर के कीबोर्ड पर उंगलियां किसकी थीं मालिक को किराएदार बना दिया, अब हर मोड़ पर साबित करना पड़ रहा है अपना वजूद सरकारी बाबुओं ने बनाया, फोटो गलत उन्होंने लगाई, फिर चक्कर दफ्तरों के वोटर काट रहे देहरादून। मतदाता… लोकतंत्र का सबसे बड़ा मालिक कहा जाता है। लेकिन हमारे यहां मालिक की हालत अक्सर उस किराएदार जैसी हो जाती है, जिसे हर महीने यह साबित करना पड़ता है कि वह इसी घर में रहता है। उत्तराखंड में इन दिनों यही हो रहा है। हजारों लोगों के घर चुनाव आयोग के नोटिस पहुंच रहे हैं। नाम में गलती, पिता के नाम में गलती, स्पेलिंग में गलती, फोटो किसी और की, पता अधूरा और अब एआई कह रहा है आपत्ति है। लेकिन सवाल यह है कि एआई को यह गलती किसने सिखाई?सोशल मीडिया पर एक भुक्तभोगी ने एक लंबी पोस्ट लिखी है। पोस्ट किसी राजनीतिक दल की प्रेस विज्ञप्ति नहीं है। वह एक सवाल है। सवाल यह कि अगर मतदाता सूची में गलती सरकारी कर्मचारियों ने की थी, तो उसकी सजा मतदाता क्यों भुगत रहा है? सोचिए…जब वोटर कार्ड बन रहा था, तब क्या मतदाता खुद कंप्यूटर के सामने बैठकर अपना नाम टाइप कर रहा था? क्या उसने खुद अपनी फोटो अपलोड की थी? क्या उसने खुद अपने पिता का नाम बदल दिया था? नहीं। यह काम सरकारी मशीनरी ने किया। डेटा एंट्री आपरेटर ने किया। चुनाव विभाग ने किया। लेकिन आज वही विभाग कह रहा है कि आप साबित कीजिए कि आप वही हैं, जो पिछले बीस साल से वोट डालते आ रहे हैं।यह कहानी सिर्फ एक नोटिस की नहीं है। यह उस व्यवस्था की कहानी है, जिसमें गलती ऊपर होती है और जवाब नीचे मांगा जाता है। आज एआई बड़ी चर्चा में है। कहा जा रहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता लोकतंत्र को और मजबूत करेगी। लेकिन अगर मशीन के सामने गलत डेटा रख दिया जाए, तो मशीन सच नहीं निकालेगी, वह सिर्फ गलती को और तेजी से पहचानकर नोटिस भेज देगी। एआई को फर्क नहीं पड़ता कि मोहन और मोहन सिंह के बीच एक बिंदु किसने छोड़ा। एआई यह नहीं जानता कि किसी बुजुर्ग महिला की फोटो गलती से पड़ोसी के नाम पर कैसे चढ़ गई। एआई यह भी नहीं समझता कि पहाड़ के दूर-दराज गांव में रहने वाला आदमी एक नोटिस मिलने पर तहसील तक आने के लिए पूरा दिन और मजदूरी गंवा देता है।मशीन सिर्फ कहती है मिसमेच, लेकिन लोकतंत्र सिर्फ मशीन से नहीं चलता। लोकतंत्र इंसानों से चलता है और इंसानों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती हैकृअपनी गलती स्वीकार करना। उत्तराखंड में सवाल यह नहीं है कि मतदाता सूची शुद्ध होनी चाहिए या नहीं। बिल्कुल होनी चाहिए। सवाल यह है कि शुद्धिकरण का बोझ किसके कंधों पर डाला जा रहा है? अगर विभाग की लापरवाही से किसी का नाम गलत दर्ज हुआ, तो सुधार विभाग के स्तर पर क्यों नहीं हो सकता? अगर लाखों रिकार्ड में गलती है, तो क्या यह सिर्फ मतदाताओं की गलती है? या फिर यह वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही का आईना है?चुनाव आयोग की जिम्मेदारी सिर्फ चुनाव कराना नहीं है। मतदाता का विश्वास बनाए रखना भी है। क्योंकि लोकतंत्र सिर्फ वोटिंग मशीन से नहीं चलता। लोकतंत्र विश्वास से चलता है और विश्वास तब कमजोर पड़ता है, जब एक आम नागरिक को अपनी पहचान बार-बार साबित करनी पड़े। उत्तराखंड के गांवों में आज भी लोग कहते हैं सरकारी दफ्तर जाने का मतलब है पूरा दिन खत्म। अब वही लोग एसआईआर नोटिस लेकर लाइन में खड़े हैं। कोई अपनी रोजी छोड़कर आया है। कोई मजदूरी छोड़कर। कोई बुजुर्ग अपने बेटे के सहारे दफ्तर पहुंचा है। किसलिए? सिर्फ इसलिए कि सरकारी रिकार्ड में कभी किसी ने एक अक्षर गलत लिख दिया था। अगर यह सच है, तो यह सिर्फ तकनीकी गलती नहीं है। यह प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल है और चुनाव से पहले यह सवाल और बड़ा हो जाता है। क्योंकि मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है।नींव कमजोर होगी, तो बहस भी होगी और अविश्वास भी बढ़ेगा। इसलिए जरूरत एआई की तारीफ करने से पहले डेटा की गुणवत्ता सुधारने की है। जरूरत नोटिस भेजने से पहले अपनी फाइलें देखने की है और जरूरत यह स्वीकार करने की है कि हर गलती मतदाता की नहीं होती। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत मतदाता है। अगर वही अपनी पहचान साबित करने में लगा रहेगा, तो फिर लोकतंत्र अपनी पहचान कैसे बचाएगा? यही सवाल है।
August 6, 2026नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स महानिदेशक एनसीसी वीरेन्द्र वत्स ने शिष्टाचार भेंट कर एनसीसी के विस्तार एवं आधुनिक आधारभूत संरचना के विकास पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।आज यहां राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेन्द्र वत्स, वाईएसएम, एसएम, वीएसएम ने नई दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड निवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय कैडेट कोर के विस्तार, सीमांत एवं दुर्गम क्षेत्रों तक एनसीसी की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने तथा संगठन की आधुनिक एवं सुदृढ़ आधारभूत संरचना के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान महानिदेशक एनसीसी ने राज्य के अधिकाधिक युवाओं को एनसीसी से जोड़ने के उद्देश्य से सीमावर्ती एवं दूरस्थ क्षेत्रों में नई एनसीसी इकाइयों के गठन एवं विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राज्य में आधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना के विकास, प्रशिक्षण सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा प्रस्तावित एनसीसी अकादमी की स्थापना सहित विभिन्न भावी योजनाओं की रूपरेखा से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास, राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता तथा सेवा—भाव को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं में राष्ट्रीय चरित्र, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने वाला देश का एक प्रतिष्ठित संगठन है, जिसकी राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री ने राज्य में एनसीसी के विस्तार तथा प्रस्तावित आधारभूत संरचना विकास से संबंधित सभी पहलों के लिए राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से राज्य के युवाओं को व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व प्रशिक्षण एवं राष्ट्र सेवा के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे।