August 16, 2026वाराणसी। लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस समय हड़कंप मच गया, जब मुंबई जाने वाले एक यात्री की पिस्टल से अचानक गोली चल गई। गोली पहले जमीन से टकराई और इसके बाद पास में मौजूद एयरपोर्ट स्टाफ के दो कर्मचारियों को जा लगी। घायलों में एक महिला कर्मचारी भी शामिल है। दोनों को तत्काल इलाज के लिए हरहुआ स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।जानकारी के अनुसार, आजमगढ़ निवासी एक यात्री एयर इंडिया की फ्लाइट से मुंबई जाने वाला था। एयरपोर्ट पर सुरक्षा प्रक्रिया के तहत यात्री ने अपने पास मौजूद पिस्टल और उसकी मैगजीन की जानकारी अधिकारियों को पहले ही दे दी थी। बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट पर हथियार और उससे संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान अचानक पिस्टल से गोली चल गई। गोली जमीन से टकराने के बाद पास खड़े एक पुरुष कर्मचारी के हाथ और एक महिला कर्मचारी की जांघ में जा लगी।एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, दोनों कर्मचारियों की हालत फिलहाल सामान्य बताई जा रही है और उनका उपचार जारी है।एयरपोर्ट निदेशक पुनीत गुप्ता के अनुसार, हथियार और उसके दस्तावेजों की जांच के दौरान यह घटना हुई। जांच के समय हथियार का मालिक और एयरपोर्ट स्टाफ दोनों मौके पर मौजूद थे। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और हथियार से संबंधित प्रक्रिया को लेकर भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गोली किन परिस्थितियों में चली।
August 16, 2026देहरादून। देहरादून जिले की त्यूणी तहसील में रविवार तड़के एक गंभीर सड़क दुर्घटना हुई। सीमांत गांव पुरटाड के पास एक पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर लगभग 200 मीटर नीचे खाई में गिर गया। इस हादसे में वाहन में सवार एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतक की पहचान खजानदास (40 वर्ष) के रूप में हुई है। वे उत्तरकाशी जिले के मोरी क्षेत्र के निवासी थे। हादसे में घायल हुए व्यक्ति का नाम रवि बताया गया है, जो भी मोरी के निवासी हैं। रवि को तुरंत त्यूणी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह दुर्घटना सुबह करीब पांच बजे हुई। पिकअप वाहन तुंगाण से त्यूणी की ओर जा रहा था। पुरटाड गांव के पास पहुंचते ही वाहन नियंत्रण खो बैठा और करीब 200 मीटर गहरी खाई में पलट गया। पहाड़ी इलाके में ऐसी दुर्घटनाएं अक्सर घातक साबित होती हैं। मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद की।हादसे की सूचना मिलते ही थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। थानाध्यक्ष कुलदीप शाह के नेतृत्व में स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू अभियान चलाया गया। घायल व्यक्ति को सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि मृतक के शव को भी बरामद कर लिया गया। पुलिस ने घटना की पुष्टि की है और आगे की जांच शुरू कर दी है।
August 16, 2026देहरादून। क्लीन एंड ग्रीन एनवायरमेंट समिति द्वारा देश के 80वे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रेम नगर मुख्य बाजार में 500 से अधिक पौधों का वितरण किया गया जिसमें चंपा, चमेली, रात की रानी, कनेर, नीम इत्यादि वृक्ष शामिल रहे। देहरादून उद्योग व्यापार मंडल एवं क्लीन एंड ग्रीन एनवायरमेंट समिति के तत्वाधान में उक्त कार्यक्रम को संपन्न किया गया जिसमें प्रेम नगर एवं आसपास के समस्त निवासियों ने प्रतिभाग किया देहरादून उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष पुनीत सहगल द्वारा अत्यधिक सहयोग प्रदान किया गया। उनके द्वारा इस अवसर पर सर्वप्रथम गुरुकुल पोंधा के बच्चों द्वारा हवन, उसके उपरांत ध्वजारोहण कार्यक्रम एवं उसके उपरांत कढ़ी चावल का प्रसाद वितरित किया गया। साथ-साथ क्लीन एंड ग्रीन एनवायरमेंट समिति के सभी सदस्य वृक्षों को वितरित करने में लगे रहे। कार्यक्रम में विशेष आमंत्री के रूप में राज्य मंत्री विश्वास डाबर, भारतीय जनता पार्टी से अर्चित डाबर, देहरादून महानगर उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष श्री पंकज मैसेन एवं जसविंदर सिंह जोगी कांग्रेस उपाध्यक्ष देहरादून उपस्थित रहे।उक्त अभियान में समिति के अध्यक्ष एवं संस्थापक राम कपूर, उपाध्यक्ष रणदीप सिंह अहलूवालिया, सचिव जेपी किमोठी, संयोजक अमित चौधरी, संयोजक नितिन कुमार, दून टीवीएस के मालिक राजेश भाटिया, राजेश बाली, सुश्री सपना, गगन चावला, सुश्री सोनिया, नमित चौधरी, टीका बहादुर थापा, अनुराग शर्मा, सुदीप ममगाई, शिवम शुक्ला एवं दून उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष पुनीत सहगल, सुभाष जसोरिया, जतिन तलवार इत्यादि मौजूद रहे।
August 16, 2026तीन बच्चों के पिता की मौत से परिवार में मचा कोहराम – पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपाहल्द्वानी। मुखानी कोतवाली क्षेत्र के पनियाली में पत्नी के मायके से नहीं लौटने से नाराज एक युवक ने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक तीन बच्चों का पिता था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।जानकारी के अनुसार, मूल रूप से बहादुरगंज (पीलीभीत) निवासी सर्वेश कुमार (37) पुत्र अनोखे लाल पनियाली क्षेत्र में अपना मकान बनाकर परिवार के साथ रहता था। वह प्लंबर का काम कर परिवार का भरण-पोषण करता था। इन दिनों उसकी पत्नी अपनी छोटी बेटी के साथ मायके गई हुई थी।परिजनों के मुताबिक, गुरुवार रात सर्वेश की फोन पर पत्नी से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। इसके बाद उसने घर के टिन शेड में दुपट्टे के सहारे फंदा लगा लिया। आनन-फानन में परिजन उसे डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे सर्वेश के बड़े भाई जयप्रकाश ने बताया कि सर्वेश चार भाइयों में सबसे छोटा और सभी का दुलारा था। करीब 13 साल पहले उसने खटीमा निवासी युवती से प्रेम विवाह किया था। दोनों के तीन बच्चे हैं। परिजनों के अनुसार, पत्नी के समय पर मायके से नहीं लौटने और फोन पर बातचीत के दौरान हुई कहासुनी से सर्वेश काफी परेशान था।जयप्रकाश के मुताबिक, गुरुवार को सर्वेश ने एक कारोबारी मित्र के सामने फोन पर पत्नी से साफ कहा था कि यदि वह आज ही मायके से नहीं आई तो वह उसका मरा हुआ मुंह देखेगी। परिजनों ने बताया कि सर्वेश ने इसी साल होलिका दहन की रात भी घर पर फंदा लगाकर जान देने का प्रयास किया था, लेकिन उस समय परिजनों ने उसे गंभीरता से नहीं लिया।हल्द्वानी के एसपी सिटी मनोज कत्याल ने बताया कि मुखानी कोतवाली क्षेत्र में युवक द्वारा फंदा लगाकर आत्महत्या करने की सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। फिलहाल मामले में परिजनों की ओर से कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
August 15, 2026परेड ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में सीएम ने किया ध्वजारोहदेहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउंड, में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में ध्वजारोहण किया। समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगीत ट्टवंदे मातरम’ के सामूहिक गायन से हुआ। आज यहां स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउंड, में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में ध्वजारोहण किया। समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन से हुआ। इसके उपरांत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ध्वजारोहण किया। ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्रगान जन गण मन का सामूहिक गायन हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने समारोह के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया तथा फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 14 पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया। जिसमें 7 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सेवा के आधार पर एवं 6 को विशिष्ट कार्यों के आधार पर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय प्रदर्शन करने वाले 13 खिलाड़ियों को भी मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदाओं में प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों तक शीघ्र राहत पहुंचाना, घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना तथा जिन लोगों ने अपने घर एवं आजीविका खोई है, उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 अनेक दृष्टियों से ऐतिहासिक है। इस वर्ष देश स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है तथा राष्ट्रगीत ट्टवंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। इसी वर्ष संत शिरोमणि रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती तथा सिक्ख पंथ के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी वर्ष भी मनाया जा रहा है। उन्होंने विभाजन विभीषिका के दौरान अमानवीय यातनाएं झेलने, अपनों को खोने और विस्थापन का दर्द सहने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होने कहा कि देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है। बलिदानियों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये तथा परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों की अनुग्रह राशि 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की गई है। प्रत्येक बलिदानी परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में समायोजित करने के साथ सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की संपत्ति खरीद पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भटृ, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, शासन के सचिव, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून प्रमेन्द्र डोभाल एवं अन्य महानुभाव उपस्थित थे।
August 15, 2026हाईवे से बाजार और घरों तक मंडराया खतरा, बारिश ने की परीक्षा लेनी शुरू कहीं हाईवे का हिस्सा धंस रहा तो कहीं सड़क के नीचे की जमीन खिसक रही बाजार व आबादी वाले इलाकों पर खतरा बढ़ा, कई जगह भवनों की नींव हिली देहरादून। मानसून उत्तराखंड के लिए इस बार सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि पहाड़ की कमजोर होती जमीन का इम्तिहान बनता जा रहा है। लगातार हो रही बारिश के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में जमीन धंसने और भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर ग्रामीण सड़कों तक कहीं सड़क धंस रही है तो कहीं सड़क के नीचे की जमीन खिसक रही है। सबसे बड़ी चिंता उन बाजारों और आबादी वाले क्षेत्रों को लेकर है, जहां पहाड़ी ढलानों पर वर्षों से निर्माण होता आया है। सड़क कटने या जमीन धंसने का असर अब सिर्फ यातायात तक सीमित नहीं रह गया है। कई जगह आसपास बने भवनों की नींव पर भी खतरा मंडराने लगा है।बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर दरारें पड़ना और सड़क का हिस्सा धंसना नया नहीं है। लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पहाड़ों में सड़क निर्माण के दौरान भूगर्भीय स्थिति और जल निकासी को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है? जहां सड़क के किनारे पानी की निकासी की व्यवस्था कमजोर है, वहां बारिश का पानी पहाड़ के भीतर पहुंचकर मिट्टी और चट्टानों को कमजोर कर सकता है। इसके बाद ढलान का संतुलन बिगड़ते ही जमीन खिसकने लगती है। कई स्थानों पर सड़क को बचाने के लिए तत्काल डामर या मलबा डाल दिया जाता है। इससे रास्ता कुछ समय के लिए चलने लायक तो हो जाता है, लेकिन यदि मूल समस्या का उपचार नहीं हुआ तो अगली बारिश में वही संकट फिर सामने आ जाता है।पहाड़ी कस्बों में बाजार अक्सर सड़क के दोनों ओर विकसित हुए हैं। सड़क के नीचे दुकानें और ऊपर मकान ऐसी तस्वीर उत्तराखंड के कई कस्बों में दिखाई देती है। ऐसे में सड़क का एक हिस्सा धंसता है तो उसका असर सिर्फ सड़क पर नहीं पड़ता। नीचे बनी दुकानों, मकानों और अन्य निर्माणों तक खतरा पहुंच जाता है। व्यापारियों की चिंता भी बढ़ रही है। सड़क बंद हुई तो बाजार का संपर्क टूटता है, ग्राहक नहीं पहुंचते और सामान की आपूर्ति प्रभावित होती है। वहीं भवनों के आसपास जमीन खिसकने लगे तो कारोबार के साथ लोगों की सुरक्षा का सवाल खड़ा हो जाता है। पहाड़ों में निर्माण की सबसे बड़ी चुनौती ढलान है। यदि पहाड़ काटकर सड़क या भवन बनाया गया है और उसके बाद पर्याप्त रिटेनिंग वॉल, ड्रेनेज और ढलान सुरक्षा नहीं की गई तो भारी बारिश में जोखिम बढ़ जाता है।कई जगह जमीन में छोटी दरारें शुरुआत में मामूली दिखाई देती हैं। लेकिन लगातार बारिश के बाद यही दरारें बड़े भूस्खलन का संकेत बन सकती हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ लंबे समय से बारिश के मौसम में संवेदनशील ढलानों और भवनों की निगरानी की जरूरत बताते रहे हैं। हर बार पहाड़ टूटने के बाद सबसे आसान जवाब होता हैकृभारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ। लेकिन सवाल यह है कि क्या बारिश अकेली जिम्मेदार है? प्राकृतिक बारिश को रोका नहीं जा सकता। लेकिन बारिश के पानी को पहाड़ के भीतर जाने से रोकना, जल निकासी व्यवस्था मजबूत करना, संवेदनशील ढलानों की पहचान करना और निर्माण के दौरान भूगर्भीय जोखिम को समझना इंसानी जिम्मेदारी है। अगर हर मानसून में सड़क धंसे और हर बार हम बारिश को दोष देकर आगे बढ़ जाएं तो समस्या का समाधान कब होगा?उत्तराखंड को सड़कें चाहिए। बेहतर कनेक्टिविटी चाहिए। पर्यटन और चारधाम यात्रा के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा चाहिए। लेकिन सवाल सड़क बनाने का नहीं, सुरक्षित सड़क बनाने का है। पहाड़ को मैदान की तरह काटकर सड़क बनाना और फिर बारिश आने पर सुरक्षा कार्य शुरू करना दीर्घकालिक समाधान नहीं हो सकता। जरूरत है कि संवेदनशील क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे हो। सड़क निर्माण से पहले भूगर्भीय अध्ययन हो। पानी की निकासी को प्राथमिकता दी जाए और पुराने भूस्खलन क्षेत्रों की नियमित निगरानी हो। बारिश थम जाएगी। धूप निकलेगी। सड़कें फिर सामान्य हो जाएंगी। बाजारों में रौनक लौट आएगी। लेकिन जो पहाड़ बारिश के दौरान कमजोर हुआ है, वह खतरा खत्म होने के बाद भी कमजोर रह सकता है। इसलिए अभी किए गए अस्थायी मरम्मत कार्यों के साथ-साथ दीर्घकालिक सुरक्षा योजना जरूरी है। क्योंकि उत्तराखंड में सवाल सिर्फ सड़क बचाने का नहीं है। सवाल सड़क के किनारे बसे बाजारों, दुकानों और घरों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा का भी है।बारिश हर साल आएगी। पहाड़ भी अपनी जगह रहेगा। अब फैसला यह करना है कि विकास की हमारी रफ्तार पहाड़ की सहनशीलता के साथ चलेगी या हर मानसून हमें फिर उसी सवाल के सामने खड़ा करेगी कि सड़क बची या पहाड़? और अगर पहाड़ ही खिसक गया तो सड़क किसके लिए?