April 28, 2026उत्तराखंड के आईजी (एसटीएफ) नीलेश आनंद भरणे द्वारा सूबे के 35 एक्स हैंडल को नोटिस जारी कर उन पर संवैधानिक व्यवस्थाओं के खिलाफ काम करने का जो आरोप लगाते हुए उन्हें ब्लॉक करने की कार्रवाई की जो चेतावनी दी गई है वह चेतावनी नहीं सही मायने में धमकी है। यह कार्यवाही इसलिए भी हैरान करने वाली नहीं है क्योंकि बीते कई सालों से सोशल मीडिया की तमाम साइट्स पर इस तरह की कार्यवाही की जाती रही हैं। इसका कारण भी किसी से छुपा नहीं है सत्ता में बैठे लोगों को न तो मीडिया द्वारा किए जाने वाले सवाल पसंद है और न वह सरकार की आलोचना बर्दाश्त करते है भले ही वह कितनी भी बड़ी सच्चाई क्यों न हो। सरकार में बैठे लोग सिर्फ अपनी तारीफ में लिखे जाने वाली खबरों और टीवी में दिखाई जाने वाली खबरों को ही देखने और सुनने के आदी हो चुके हैं। देश का मुख्य मीडिया जब सरकारों की शान में कसीदे पढ़ने को ही पत्रकारिता स्वीकार कर चुका है तो ऐसे समय में सोशल मीडिया ने जब सही और सच्ची खबरों को जनता तक पहुंचाना शुरू कर दिया तब इससे सरकार में बैठे लोगों का असहज होना स्वाभाविक ही है जहां तक बात अधिकारियों की है तो उन्होंने भी सरकार की नौकरी ही करनी है और वह कर भी रहे हैं इन असाधारण स्थितियों में पत्रकारिता करना एक गंभीर चुनौती हो चुका है। सोशल मीडिया में क्या चल रहा है इस पर गहरी नजर रखी जा रही है और उन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तथा पत्रकारों के खिलाफ कार्यवाही लगातार जारी है इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के खिलाफ 2023 में 6000 सोशल हैंडल्स के खिलाफ ऐसी कार्यवाही हुई जिसकी संख्या 2024 में बढ़कर 12600 तथा दिसंबर 2025 तक इनकी संख्या 24300 हो चुकी थी। दरअसल देश में े पत्रकारिता का अघोषित आपातकाल ही नहीं है उससे भी ज्यादा खतरनाक स्थित है। 70 के दशक में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री ने देश में आपातकाल लगाया उस समय तमाम अखबारों के साथ ऐसा हुआ था लेकिन वह बहुत थोड़े समय ही रहा और न उस समय देश में सोशल मीडिया और निजी टीवी चैनलों का कोई दौर था। वर्तमान समय में गुजरते वक्त के साथ जब सब कुछ बदल चुका है। देश और दुनिया में घटित होने वाली कोई घटना कुछ मिनट में 80 फीसदी आबादी तक पहुंच रही है तो उसका प्रभाव भी उतना ही अधिक होना स्वाभाविक है। चाहे वह प्रधानमंत्री से पूछे जाने वाले वह सवाल हो कि आप आम कैसे खाते हैं काटकर या चूस कर, मणिपुर में महिलाओं को निर्वस्त्र कर घूमाने की घटना हो हर खबर से आम आदमी वाकिफ ही नहीं हो पा रहा है उसकी लाइव तस्वीर भी उस तक पहुंच रही हैं। सरकार की छवि को धूमिल करने वाली ऐसी खबरें क्योंकि सच का आइना दिखाती हैं उन्हें जिम्मेवार लोग भला कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं यही कारण है कि अब सत्ता के निशाने पर सोशल मीडिया है। उत्तराखंड के जिन 35 पत्रकारों या सोशल साइट्स को यह नोटिस जारी किए गए हैं उनमें से एक अजीत राठी ने अपने एक्स हैंडल पर इस नोटिस के बारे में कई सवाल आईजी एसटीएफ से भी पूछे गए हैं वही यह स्पष्ट किया गया है अपनी उस पोस्ट को डिलीट नहीं करेंगे जिसे आधार बनाकर उन पर कार्रवाई की बात कही गई है वह जांच में सहयोग और इस खबर की सत्यता की पुष्टि करने वाले सबूतों के साथ किसी के भी सामने उपस्थित होने को तैयार हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बिना पत्रकारिता संभव नहीं है। निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता को बचाने रखने के लिए अगर थोड़ी कुर्बानियां भी करनी पड़ती हैं तो उसके लिए पत्रकारों को वर्तमान दौर में तैयार रहना ही होगा।
April 28, 2026अप्रैल में आयोजित होने वाले रम्माण में बदल जाता है पूरा गांव एक बड़े रंगमंच में ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा-मुखौटों संग करते है पौराणिक-लोक कथाओं का मंचन ढोल-दमाऊं की थाप, पारंपरिक गीत और नृत्य इस आयोजन को बना देते हैं जीवंत परंपरा में आधुनिक तकनीक या मंच की जरूरत नहीं,पूरी तरह लोक शैली में संपन्न देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले के सलूर-डुंगरा गांव में हर साल मनाया जाने वाला रम्माण उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है। यह उत्सव गांव के आराध्य देवता भैरव को समर्पित होता है और स्थानीय लोगों की आस्था, सामाजिक एकता और परंपराओं को एक सूत्र में पिरोता है। रम्माण का आयोजन हर साल बैसाख महीने में किया जाता है, जब पूरा गांव एक बड़े रंगमंच में बदल जाता है।रम्माण की सबसे बड़ी खासियत इसका लोकनाट्य स्वरूप है। इसमें गांव के लोग पारंपरिक वेशभूषा और मुखौटों के साथ विभिन्न पौराणिक और लोक कथाओं का मंचन करते हैं। रामायण, महाभारत के प्रसंगों के साथ-साथ स्थानीय कथाएं भी इसमें शामिल होती हैं। ढोल-दमाऊं की थाप, पारंपरिक गीत और नृत्य इस आयोजन को और भी जीवंत बना देते हैं। खास बात यह है कि इस पूरी परंपरा को निभाने के लिए किसी आधुनिक तकनीक या मंच की जरूरत नहीं होतीकृयह पूरी तरह लोक शैली में संपन्न होता है।यह उत्सव सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश देने का भी एक सशक्त जरिया है। रम्माण के माध्यम से गांव के लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हैं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। इसमें हर वर्ग और उम्र के लोग भाग लेते हैं, जिससे सामुदायिक एकता और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। इस आयोजन में अनुशासन और परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाता है, जो इसे और भी खास बनाता है।रम्माण की इस अनूठी परंपरा को वैश्विक पहचान भी मिल चुकी है। इसे यूनेस्को की सूची में शामिल किया गया है, जो इसकी सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाता है। यह सम्मान न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व की बात है। ऐसे समय में जब आधुनिकता के कारण लोक परंपराएं विलुप्त होती जा रही हैं, रम्माण जैसे उत्सव हमारी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत बनाए रखने का कार्य कर रहे हैं। मुखौटों के पीछे की दुनियाअप्रैल के महीने में जब पहाड़ों पर हरियाली छाने लगती है, तब सलूड़-डुंग्रा गांव के लोग रम्माण उत्सव की तैयारी करते हैं। यह उत्सव भगवान भूमियाल देवता को समर्पित है। इसमें गांव के लोग रामायण के प्रसंगों को एक नाटक के रूप में मंचित करते हैं, लेकिन यहाँ कोई संवाद नहीं होते। सब कुछ नृृत्य, संगीत और मुखौटों के जरिए व्यक्त किया जाता है। ग्रामीण इन मुखौटों को पहनकर नर्तक जब ढोल-दमाऊं की थाप पर थिरकते हैं, तो पूरा गांव भक्ति के रस में डूब जाता है। रम्माण में इस्तेमाल होने वाले मुखौटे लकड़ी के बने होते हैं और इनमें से कुछ तो सदियों पुराने हैं। गांव के लोगों का मानना है कि नृत्य के दौरान देवताओं की शक्ति वास्तव में उन नर्तकों में समा जाती है।
April 28, 2026नई दिल्ली। अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी माने जाने वाले सलीम डोला को भारत डिपोर्ट कर लिया गया है। खुफिया एजेंसियों के एक बड़े ऑपरेशन के बाद अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से सलीम डोला को भारत लाया गया है। अब उससे कड़ी पूछताछ की जाएगी। अंडरवर्ल्ड नेटवर्क को लेकर कई अहम खुलासे हो सकते हैं।जानकारी के मुताबिक, सलीम डोला को आज सुबह एक विशेष विमान के जरिए दिल्ली के एयरपोर्ट पर लाया गया, जहां उसे औपचारिक रूप से डिपोर्ट किया गया। फिलहाल सलीम डोला खुफिया एजेंसियों की कड़ी पूछताछ का सामना कर रहा है। बताया जा रहा है कि सलीम डोला को हाल ही में इस्तांबुल में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के दौरान का वीडियो सामने आया है। वह एक होटल के रूम में रुका हुआ था। गिरफ्तारी के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे इस्तांबुल से भारत डिपोर्ट किया गया है। सूत्रों के अनुसार, शुरुआती पूछताछ के बाद सलीम डोला को मुंबई पुलिस को हैंडओवर किया जाएगा। इसके बाद उसे मुंबई ले जाकर आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि सलीम डोला से पूछताछ के दौरान अंडरवर्ल्ड नेटवर्क और उससे जुड़े कई अहम मामलों में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। मुंबई पुलिस भी सलीम डोला से पूछताछ करने वाली है।
April 27, 2026हरिद्वार। नशे के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान के तहत पुलिस को खासी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने अलग अलग स्थानों से तीन नशा तस्करों को दबोच कर उनके पास से करीब दस लाख रूपये की स्मैक बरामद की है।जानकारी के अनुसार बीती रात कोतवाली मंगलौर पुलिस को सूचना मिली कि क्षेत्र के अलग—अलग स्थानों पर कुछ नशा तस्कर नशीले सामान की डिलीवरी हेतू आये हुए है। सूचना पर कार्यवाही करते हुए पुलिस ने सभी स्थानो पर चैकिंग अभियान चला दिया। जिसके फलस्वरुप कोतवाली मंगलौर क्षेत्र मे अलग—अलग 3 नशे के सौदागरो को धर दबोचा गया जिनके कब्जे से स्मैक बरामद हुई। पूछताछ में उन्होने अपना नाम सईद अहमद पुत्र सुल्तान अहमद निवासी मौहल्ला कटहेडा कस्बा मंगलौर हरिद्वार, मुनीर पुत्र रियासत निवासी ग्राम महमूदपुर थाना पिरान कलियर व सलमान पुत्र खुर्शीद निवासी पिरान कलियर थाना पिरान कलियर हरिद्वार बताया। पुलिस के अनुसार इनके पास से हुई बरामद स्म्ौक की कीमत करीब दस लाख रूपये बतायी जा रही है।बहरहाल पुलिस ने उन्हे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है।
April 27, 2026विधानसभा का विशेष सत्र में नारी सम्मान लोकतंत्र में अधिकार पर होगी चर्चा भाजपा इस अधिकार को बता रही है अपनी उपलब्धि और कांग्रेस सरकार की नाकामी विधानसभा सत्र से पूर्व भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बयान पक्ष-विपक्ष में आने लगे देहरादून। 28 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र है और यह सत्र भी सियासी रणभूमि बनने वाला है। राजनैतिक सूत्रों की माने तो सत्र तो नारी शक्ति वंदन पर चर्चा के लिए है, लेकिन सदन में बहस कम, शोर ज्यादा होगा। यह वही मुद्दा है जो सालों से राजनीतिक दलों के घोषणापत्र में सजता रहा है और संसद में अटकता रहा है। एक ओर भाजपा जहां इसे अपनी उपलब्धि बताना चाहती है और कांग्रेस इसे अधूरा वादा कहती है।विधानसभा का कोई भी सत्र हो उसमें हो-हल्ला होना लाजमी है। सत्ता पक्ष अपनी मनमर्जी चलाती है और विपक्ष सरकार का विरोध करती है। यह प्रथा लंबे समय से चली आ रही है। विधानसभा के सदन में राजनीति न हो यह हो नहीं सकता है। इसके साथ ही विधानसभा में नेता मर्यादा को तार-तार न करें यह भी हो नहीं सकता है। हालांकि विधानसभा सत्र के लिए सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं इसके बाद भी सत्र के दौरान पक्ष और विपक्ष को असली चेहरा तो दिखेगा ही।विधानसभा सत्र से पूर्व भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बयान आने लगे है। भाजपा इसे अपनी उपलब्धि बताकर प्रचारित कर रही है। वही कांग्रेस इसे भाजपा सरकार की नाकामी बात रही है। कांग्रेस तो सदन से लेकर सड़क तक आंदोलन करने के मूड में है। शायद यही कारण है कि कांग्रेस ने अपनी चारधाम यात्रा को फिलहाल रदद कर दिया है। क्योंकि सदन में हो-हल्ला करने का समय है तो इसे कांग्रेस गवा नहीं सकती है।विधानसभा सत्र के बहाने कांग्रेस की रणनीति साफ दिख रही है कि पहले सदन में सरकार को घेरो, फिर सड़क पर उतरकर माहौल बनाओ। यह राजनीति का क्लासिक माडल है अंदर हमला, बाहर अभियान। लेकिन जनता पूछ रही है इस रणनीति में उसका स्थान कहां है? क्या वह सिर्फ भीड़ है, या फिर वोट बैंक?कांग्रेस चारधाम यात्रा निकलेगी, बयान आएंगे, सदन में हंगामा होगा, टीवी डिबेट होंगी, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं सुधरेंगी या नहीं, यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी या नहीं, यह अब भी सवाल ही है। देहरादून से लेकर बदरीनाथ तक और विधानसभा से लेकर गांव तक राजनीति अपनी पूरी ताकत में है। कांग्रेस चुनावी साल में सदन से लेकर सड़क तक अपनी ताकत न दिखाये यह हो नहीं सकता है।
April 27, 2026दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा के निर्बाध, सुरक्षित एवं सुचारू संचालन हेतु व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति को पूर्ववत् 100 प्रतिशत बनाए रखने का अनुरोध किया।आज यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी से नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में भेंट कर उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों एवं आपदाजन्य संवेदनशीलता के दृष्टिगत विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा के निर्बाध, सुरक्षित एवं सुचारू संचालन हेतु व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति को पूर्ववत् 100 प्रतिशत बनाए रखने का अनुरोध किया। उन्होंने अवगत कराया कि राज्य में अप्रैल से नवम्बर तक संचालित होने वाली चारधाम यात्रा के दौरान देश—विदेश से लाखों श्रद्धालुओं का आगमन होता है, जिससे व्यावसायिक एलपीजी की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। इस अवधि में राज्य को लगभग 9,67,949 व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जून से सितम्बर के मध्य मानसून अवधि में राज्य को प्रतिवर्ष प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है। पर्वतीय भू—भाग एवं दुर्गम परिस्थितियों के कारण आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों में एलपीजी गैस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। इस परिप्रेक्ष्य में उन्होंने व्यावसायिक सिलेंडरों का अतिरिक्त 5 प्रतिशत (लगभग 48,397 सिलेंडर) आवंटन सुनिश्चित किए जाने का अनुरोध किया, ताकि राहत एवं बचाव कार्यों का प्रभावी एवं त्वरित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था मुख्यतः पर्यटन आधारित है, जिसमें धार्मिक पर्यटन, तीर्थाटन एवं साहसिक पर्यटन का महत्वपूर्ण योगदान है। चारधाम यात्रा राज्य की आस्था, सांस्कृतिक पहचान एवं आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार है। केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत सभी प्रस्तावों पर सकारात्मक विचार करते हुए आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन प्रदान किया तथा राज्य के हितों के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।