April 30, 2026मारे गये बदमाश की आज कोर्ट में थी तारीख दून में बलात्कार, हत्या, डकैती की घटनाओं को दिया था अंजाम देहरादून। बदमाश अकरम ने दून में बलात्कार, हत्या व डकैती की घटनाओं को अंजाम दिया था। कोर्ट में पेशी के लिए आने से पहले लूट की घटना को अंजाम देने के बाद पुलिस ने उसे मुठभेड में मार गिराया।आज यहां इसकी जानकारी देते हुए आईजी राजीव स्वरूप व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि गत रात्रि प्रेमनगर थाना पुलिस को सूचना मिली कि बदमाशों ने पौंधा रोड पर एक व्यक्ति को गोली मारकर लूट की घटना को अंजाम दिया है। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद बदमाशों का पीछा किया तो थोडी दूरी पर पुलिस को काले रंग की कार दिखायी दी। पुलिस ने पीछा किया तो बदमाश कार को छोडकर जंगल में भागने लगे। पुलिस को देखकर बदमाशों ने पुलिस पर फायर झोंक दिया जिससे प्रेमनगर थाना प्रभारी नरेश राठौर घायल हो गये। पुलिस की जवाबी कारवाही में एक बदमाश को गोली लग गयी। जिसको अस्पताल पहुंचाया गया जहां चिकित्सकों ने उसको मृत घोषित कर दिया। मारे गये बदमाश की पहचान अकरम पुत्र मासूम निवासी ग्राम बंूटा थाना गढी पुख्ता भवन जिला शामली के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार अकरम ने अपने साथियों के साथ 2014 में बालावाला में एक घर में डकैती की घटना को अंजाम दिया था जिसमें विरोध करने पर उसके द्वारा अंंकित थपलियाल की हत्या कर दी गयी थी। जिसमें उसके फरार होने पर पुलिस ने उस पर 50 हजार रूपये का ईनाम घोषित किया था। घटना के तीन वर्ष बाद 2017 में अकरम को पुलिस ने मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार किया था। मृत बदमाश अकरम पर उत्तराखण्ड व उत्तर प्रदेश में हत्या, लूट, बलात्कार सहित संगीन अपराधों के एक दर्जन से अधिक मुकदमें दर्ज है तथा शामली पुलिस द्वारा वर्तमान में उस पर पांच हजार रूपये का ईनाम घोषित किया गया है। आज अकरम की दून न्यायालय में तारीख थी। तारीख पर पेश होने के लिए वह यहां आया था तथा लूट की घटना को अंजाम दिया। जिसके बाद पुलिस मुठभेड में मारा गया। एसएसपी ने बताया कि बदमाशों की गोली से घायल प्रेमनगर थाना प्रभारी नरेश राठौर को चिकित्सकों ने खतरे से बाहर बताया है।
April 30, 2026जम्मू। श्रीनगर साइबर पुलिस ने पीडीपी लीडर इल्तिजा मुफ्ती और दूसरों के खिलाफ अलगाववादियों से जुड़े सोशल मीडिया कंटेंट को कथित तौर पर सर्कुलेट करने के लिए एक एफआईआर दर्ज की है, जिसमें दिवंगत अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का एक वीडियो भी शामिल है। यह मामला अलगाववादी विचारधारा और गलत जानकारी को बढ़ावा देने वाले वीडियो से जुड़ा है, जिसका मकसद भारत की संप्रभुता, शांति और अखंडता को नुकसान पहुंचाना है।एक पुलिस सोर्स ने बताया कि एफआईआर उन लोगों को टारगेट करती है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए गैर—कानूनी गतिविधियों, लोगों में अशांति फैलाने और देश की एकता को कमजोर करने वाला कंटेंट शेयर करते हैं। शुरुआती जांच से पता चलता है कि जानबूझकर बांटने वाली सोच फैलाने की कोशिश की गई थी, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (ठछै) की धारा 152, 196(1), और 353(1)(इ), (ब), (2) के तहत आरोप लगाए गए हैं, जो संप्रभुता को खतरे में डालने और देशद्रोह जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले कामों को कवर करते हैं। इसे फैलाने के इरादे और पहुंच का पता लगाने के लिए श्रीनगर के साइबर पुलिस स्टेशन में जांच चल रही है।यह कार्रवाई इल्तिजा मुफ्ती के एक्स पोस्ट के बाद हुई, जिसमें उन्होंने गिलानी का एक पुराना वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने उनकी विचारधारा से असहमति जताई थी, लेकिन हाल के भाषा विवाद के विरोध प्रदर्शनों के बीच उर्दू के महत्व पर उनके विचारों को हाईलाइट किया था। पुलिस इसे एक बैन संगठन के अलगाववादी का महिमामंडन मान रही है। ऑनलाइन सामग्री को बढ़ावा देने के लिए अज्ञात लोगों का भी नाम लिया गया है। अधिकारियों ने जनता से सोशल मीडिया पर इस तरह की गैर—कानूनी सामग्री बनाने या शेयर करने से बचने की अपील की है, और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
April 30, 2026डीएम की सख्ती से जिले में 64 पूर्णतः निर्जीर्ण विद्यालय भवनों में से 56 ध्वस्त, शेष पर कार्रवाई जारी देहरादून। मुख्य विकास अधिकारी/जिलाधिकारी सविन बसंल को प्रेषित रिपोर्ट के अनुसार, जनपद में चिन्हित कुल 64 पूर्णतः निर्जीर्ण विद्यालय भवनों में से 56 भवनों का ध्वस्तीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जबकि शेष भवनों पर कार्रवाई प्रगति पर है।आज यहां जिला प्रशासन देहरादून द्वारा जनपद के जर्जर एवं निर्जीर्ण विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को तेज गति से संचालित किया जा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी/जिलाधिकारी को प्रेषित रिपोर्ट के अनुसार, जनपद में चिन्हित कुल 64 पूर्णतः निर्जीर्ण विद्यालय भवनों में से 56 भवनों का ध्वस्तीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जबकि शेष भवनों पर कार्रवाई प्रगति पर है। जिलाधिकारी के सख्त रूख कड़े निर्देश पर 64 जर्जर विद्यालय भवन निष्प्रोज्य ध्वस्त किए गए है। तथा शेष 8 निष्प्रोज्य भवन 1 माह के भीतर ध्वस्त कर दिए जाएंगे। इस सम्बन्ध में मुख्य शिक्षा अधिकारी ने जिलाधिकारी को अपनी आख्या प्रस्तुत की है। जिले में 04 माध्यमिक तथा 52 प्रारम्भिक विघालयों के भवनों का ध्वस्तीरकण किया जा चुका है। इसी प्रकार विघालयों में पूर्ण रूप से निष्प्रोज्य कक्षा कक्षों में माध्यमिक विद्यालय के 07 तथा प्रारम्भिक विद्यालय 10 कक्ष में से 14 का ध्वस्तीकरण किया गया है। तथा 03 निष्प्रोज्य कक्षा कक्षों को एक माह के भीतर ध्वस्त कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी की सख्ती से जिले के जर्जर पड़े सैकड़ो स्कूल भवन पहलीबार एक साथ ध्वस्त किए गए है।जिलाधिकारी द्वारा शिक्षा अधिकारियों, प्रधानाचार्यों की नकेल कसने पर जर्जर भवन के चिन्हिकरण एवं ध्वस्तीकरण की कार्यवाही हुई है। जिले के विकासखण्ड चकराता में 23, कालसी में 17, विकासनगर में 8, सहसपुर में 2, रायपुर में 14, डोईवाला में 17 विघालय भवन चिन्हित किए गए थे। जिनमें में से कुल 70 विघालय भवनों एवं विद्यालय कक्षों का ध्वस्तीकरण किया जा चुका है, शेष जिन विद्यालय भवनों एवं विघालय कक्षों ध्वस्तीकरण विभिन्न कारणों से पूर्ण नहीं हो पाया है, ऐसे 11 पूर्ण एवं आंशिक रूप से निर्जीर्ण भवनों को ध्वस्तीकरण हेतु एक माह का अतिरिक्त समय देने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि विघार्थियों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है, जर्जर भवनों को शीघ्र हटाकर सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाएगा शिक्षण कार्य बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी। जिला प्रशासन ने जनपद के सभी जर्जर विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता पर लिया गया है। विघार्थियों की सुरक्षा के साथ—साथ उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो, यह सुनिश्चित करना हमारी सर्वाेच्च जिम्मेदारी है, जिसके लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी निर्देशित किया गया हैै। शेष भवनों पर भी शीघ्र कार्रवाई पूरी की जाएगी।
April 30, 2026चुनावी रंण में एक अदृश्य जंग सोशल मीडिया पर भी दिखेगी मतदाताओं की सोच प्रभावित कर चुनावी रणनीति का केंद्र बनेगा सोशल मीडिया अब जनमत निर्माण का बनेगा एक बड़ा साधन पार्टियां कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल मैनेजमेंट पर कर रही निवेश देहरादून। सूबे में आगामी विधानसभा चुनाव में जहां एक ओर रैलियां, जनसभाएं और रोड शो दिखेगा। वहीं दूसरी ओर एक अदृश्य जंग सोशल मीडिया पर लड़ी जाएगी। विधानसभा चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका भले ही आंखों से दिखाई न दे, लेकिन इसका प्रभाव बेहद गहरा हो सकता है। यह न केवल मतदाताओं की सोच को प्रभावित कर रहा है, बल्कि चुनावी रणनीति का केंद्र भी बन सकता है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि इस बार की असली जंग सड़कों के साथ-साथ स्क्रीन पर भी लड़ी जाएगी है। इस यु( में पक्ष और विपक्ष की अग्नि परीक्षा होना लाजमी है।बता दें कि सोशल मीडिया के युग में अदृश्य चुनावी यु( न हो यह हो ही नहीं सकता है। राजनीतिक दल अब सोशल मीडिया को सिर्फ प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफार्म पर माइक्रो-टारगेटिंग के जरिए अलग-अलग वर्गों तक अलग संदेश पहुंचाया जाएगा है। युवा, महिलाएं और पहली बार वोट देने वाले मतदाता इस डिजिटल अभियान के मुख्य केंद्र में हैं। छोटे-छोटे मैसेज, वीडियो क्लिप और ग्राफिक्स के जरिए राजनीतिक नैरेटिव तैयार किया जा रहा है। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी कहे जाने वाले इस अनौपचारिक नेटवर्क के जरिए सूचनाएं तेजी से फैलती हैंकृचाहे वह सही हों या भ्रामक। यही कारण है कि सोशल मीडिया अब जनमत निर्माण का एक बड़ा साधन बनेगा है।सोशल मीडिया की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह उन मतदाताओं तक भी पहुंच बना लेता है जो सार्वजनिक रूप से अपनी राय जाहिर नहीं करते। घर-घर तक पहुंचने वाले मोबाइल फोन और सस्ते इंटरनेट ने साइलेंट वोटर को सीधे राजनीतिक संवाद का हिस्सा बनते है। नेताओं की छवि गढ़ने और विरोधियों के खिलाफ माहौल बनाने में सोशल मीडिया अहम भूमिका निभा सकता है। एक वायरल वीडियो या पोस्ट कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंचकर धारणा बदल सकता है। यही वजह है कि पार्टियां अब कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल मैनेजमेंट पर भारी निवेश कर रही हैं।सोशल मीडिया पर जहां राष्ट्रीय मुद्दे तेजी से ट्रेंड करते हैं, वहीं स्थानीय समस्याओं को भी अब डिजिटल मंच मिल गया है। गांव की सड़क, पानी या रोजगार से जुड़ी समस्याएं भी वायरल होकर बड़े मुद्दे बन सकते हैं, जिससे चुनावी एजेंडा प्रभावित होता है। सत्ता पक्ष जहां अपनी उपलब्धियों को डिजिटल माध्यम से प्रचारित कर रहा है, वहीं विपक्ष इन प्लेटफार्म्स का उपयोग सरकार की कमियों को उजागर करने के लिए कर रहा है। दोनों के बीच यह डिजिटल मुकाबला चुनाव से पूर्व ही तेज हो गया है।राजनैतिक विशेषज्ञों की माने तो आम मतदाता को आगामी विधानसभा चुनाव में ‘डिजिटल कुरुक्षेत्र’ के बारे में पूरी जानकारी रखनी होगी। हालांकि अभी चुनाव आयोग ने चुनाव की घोषणा तो नहीं की है, लेकिन अभी से सर्तक और जानकारी पूरी रखनी मतदाता की भी जिम्मेदारी है। क्योंकि वर्तमान जो दौर चल रहा है उससे आगामी विधानसभा चुनाव में मतदाता को ही नुकसान गलत पार्टी या नेता चुनकर हो सकता है। चुनाव अभी दूर है और सोशल मीडिया पर अभी से अदृश्य चुनावी वार चलने लगा है। इसलिए अभी से सावधान रहें।
April 30, 2026जब देश का मुख्य मीडिया पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे से पहले एग्जिट पोल के जरिए भाजपा की जीत का डंका पीटने और नेता तथा समीक्षक उसका पोस्टमार्टम करने में जुटे हैं तथा पीएम मोदी सिक्किम में फुटबॉल के मैदान पर गोल पर गोल दाग कर अपनी हौसला बुलंदी का इजहार कर रहे हैं। ऐसे में उड़ीसा से आई एक अत्यंत ही हृदय विधायक तस्वीर ने जनमानस को झकझोर कर रख दिया। आजादी के अमृत काल में आई यह तस्वीर डबल इंजन सरकारों और सरकारी सिस्टम के उस स्याह सच को बेनकाब करती है जिस पर किसी का भी सर शर्म से झुक जाए। उड़ीसा के क्योझार जिले का रहने वाला एक व्यक्ति जिसका नाम जीतू मुंडा है, अति निर्धन इस आदिवासी के कंधे पर उसकी बहन का कंकाल है जो तीन माह पूर्व मर चुकी है जिसे वह 3 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक तक ले जाता है और कहता है कि अब इससे हस्ताक्षर करा लो और मुझे खाते में जमा उसके 19,300 रूपये दे दो। उसका जब सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होता है तो सरकार और सिस्टम ही नहीं देश का पूरा समाज हिल जाता है। सत्ता में बैठे हुए लोग जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान का दावा करते है उनके मुंह पर जीतू मुंडा की यह तस्वीर एक करारा थप्पड़ ही नहीं है बल्कि उस समाज की कड़वी सच्चाई है जिन्हें आजादी के 80 साल बाद भी नंगे बदन भूखे पेट रहने पर मजबूर कर रखा है। खास बात यह है कि यह तस्वीर राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू के गृह राज्य के एक आदिवासी क्षेत्र से आई है। जिन्हें वर्तमान सरकार द्वारा राष्ट्रपति पद पर बैठाकर आदिवासियों की परम हितेषी और महिला सशक्तिकरण की एक मिसाल बनाकर पेश किया गया था। अनपढ़ और गरीब एक आदिवासी के लिए एक मृत्यु प्रमाण पत्र या जन्म प्रमाण पत्र बना पाना आज भी क्या आसान काम है? प्रमाण पत्र हासिल करने से ज्यादा सुगम रास्ता जीतू मुंडा को यही लगा की कब्र से खोदकर अपनी बहन का कंकाल ही बैंक कर्मियों को दिखा दे जिससे बैंक में जमा उसके पैसे उसे मिल जाए जो उसकी जीवन रेखा है। उड़ीसा के मुख्यमंत्री मोहन मांझी ने इस तस्वीर को देखकर डीएम को फोन खटखटाना पड़ा तब जाकर हरकत में आया सिस्टम तथा रेड क्रॉस जैसी संस्था। अब लोग सरकार से सवाल पूछ रहे हैं क्या भाजपा ने ऐसे ही अच्छे दिन लाने का वायदा किया था? सरकार और सिस्टम की संवेदनहीनता का इससे बड़ा और क्या उदाहरण हो सकता है? अभी बंगाल के चुनाव में पीएम मोदी लोगों को समझा रहे थे की डबल इंजन सरकार बनाओ और विकास पाओ। उड़ीसा में तो डबल इंजन सरकार है फिर यहां से जीतू मुंडा की ऐसी तस्वीर क्यों सामने आई? इस सवाल को सरकार से पूछने की हिम्मत क्या कोई कर सकता है? ऐसे हालात सिर्फ उड़ीसा के ही नहीं है पूरे देश के हैं। उत्तराखंड में भले ही सरकार कुपोषण मिटाने के नाम पर 430 करोड़ एक साल में खर्च करती है लेकिन राज्य के 25 फीसदी बच्चे 56 फीसदी महिलाएं कुपोषण का शिकार हैं। अभी कुछ समय पूर्व राज्य के एक गांव से पूरे परिवार के कुपोषित होने तथा मरणासन्न स्थिति में पहुंचने का मामला प्रकाश में आया था तब शासन प्रशासन हरकत में आया था। भले ही सरकार अपनी पीठ थपथपाती रहे लेकिन धरातल पर सच्चाई इससे अलग है। केंद्र सरकार 5 ट्रिलियन वाली अर्थव्यवस्था का डंका पीट रही है। अंबानी परिवार एक शादी पर 200 करोड़ फूंक देता है 75 करोड़ खर्च कर विदेशी कलाकारों को बुला सकता है। उघोगपति अरबो खरबो का कर्ज लेकर विदेश भाग सकते हैं। तथा करोड़ का कर्ज माफ हो सकता है वही जीतू मुंडा जैसे लोगों को उनका जमा किया 19300 रूपये भी बैंक से निकालने के लिए अपनी बहन की कब्र खोदकर कंकाल कंधे पर ढोना पड़ता है यह विडंबना नहीं तो क्या है यहां अंधभक्त कोरोना भागने को ताली बजा सकते हैं नेता चुनाव जीतने की गारंटी दे सकते हैं अगर कुछ नहीं हो सकता है तो वह है गरीबों का उद्धार, जो 80 साल में भी नहीं हो सका है।
April 30, 2026कैबिनेट बैठक:सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली ने कैबिनेट ब्रीफिंग में दी जानकारी उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 को मिली मंजूरी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हितों से जुड़े प्रस्तावों पर हुई चर्चा देहरादून। पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में आयोजित उत्तराखंड मंत्रिमंडल की अहम बैठक में 18 प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 सहित कई प्रस्तावों को मंजूरी मिली।सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली ने कैबिनेट ब्रीफिंग में जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 को मंजूरी। प्रवर्तन अधिकारी भी वर्दी पहनेंगे। वहीं शहरी विकास कुंभ मेला के लिए कार्यों की स्वीकृति आसान होगी। एक करोड़ तक के मेला अधिकारी, 5 करोड़ तक के मंडलायुक्त और बाकी शासन से स्वीकृत होंगे। इसके साथ ही आबकारी नीति में व्यय दर 6 प्रतिशत निर्धारित की गई थी, जिसके अनुरूप वाणिज्य कर विभाग ने अपनी नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी।उन्होंने बताया कि उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 में संशोधन को मंजूरी देते हुए वन दरोगा की आयु सीमा 21 से 35 वर्ष और वन आरक्षी की आयु सीमा 18 से बढ़ाकर 25 वर्ष कर दी गई है। साथ ही जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।अल्पसंख्यक मामलों में उत्तराखंड अल्पसंख्यक अधिनियम 2025 पहले ही अधिसूचित हो चुका है। अब कक्षा 1 से 8 तक संचालित 452 मदरसों को जिला स्तर से मान्यता लेने का प्रावधान किया गया है, जबकि 9वीं से 12वीं तक के लगभग 52 मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेनी होगी। इस संबंध में अध्यादेश लाया जाएगा, जिससे 50 हजार से अधिक छात्रों को लाभ मिलेगा।कार्मिक विभाग में प्रतीक्षा सूची की वैधता को लेकर स्पष्ट किया गया है कि यह एक वर्ष तक ही मान्य होगी और इसी अवधि के भीतर चयन होने पर ही उसे वैध माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत विशेष शिक्षा शिक्षकों की अर्हता तय करते हुए विशेष शिक्षक शिक्षा नियमावली को मंजूरी दी गई है। साथ ही शैक्षिक संवर्ग के लिए नई सेवा नियमावली भी लागू की गई है, जिससे सहायक अध्यापकों के 62 पदों को नियमित किया जा सकेगा।लोक निर्माण विभाग में 2023 की जेई भर्ती से जुड़े मामलों में दिव्यांग कोटे के 60 खाली पद अन्य श्रेणी से भरे जाने के बाद अब 6 नए पद सृजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है।वित्त विभाग में 1 जनवरी 2026 को लिए गए वर्कचार्ज कर्मचारियों के निर्णय पर हाईकोर्ट के स्टे की जानकारी कैबिनेट के संज्ञान में लाई गई। वहीं निविदा प्रक्रिया में डी श्रेणी के ठेकेदारों के लिए कार्य सीमा बढ़ाकर 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये कर दी गई है।उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का दायरा बढ़ाते हुए अब 21 अशासकीय कालेजों को भी इसमें शामिल किया गया है, जहां स्थायी प्राचार्य कार्यरत हैं। वन विभाग ने एक नई पहल के तहत वन क्षेत्रों की सीमा पर मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने की नीति को मंजूरी दी है। इससे स्थानीय लोगों की आय में वृ(ि होगी और मानव-वन्यजीव, विशेषकर हाथियों के साथ होने वाले संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी। इसके लिए वन सीमा मौन पालन, मधुमक्खी आधारित आजीविका एवं मानव-वन्यजीव संघर्ष नियमावली 2026 को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। कैबिनेट के प्रमुख फैसले-उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 में संशोधन को मंजूरी-वन दरोगा की आयु सीमा 21 से 35 वर्ष तय की गई-वन आरक्षी की आयु सीमा 18 से बढ़ाकर 25 वर्ष की गई।-जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को अब सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा-उत्तराखंड अल्पसंख्यक अधिनियम 2025 पहले ही अधिसूचित किया जा चुका है।-कक्षा 1 से 8 तक के 452 मदरसों को अब जिला स्तर से मान्यता मिलेगी।-कक्षा 9 से 12 तक के लगभग 52 मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेनी होगी।-प्रतीक्षा सूची अब एक वर्ष तक ही वैध मानी जाएगी।-सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप विशेष शिक्षा शिक्षकों की अर्हता तय करने वाली नियमावली को मंजूरी।-सहायक अध्यापकों के लिए सेवा नियमावली को स्वीकृति।-लोक निर्माण विभाग में हाईकोर्ट के आदेश के संदर्भ में जेई भर्ती से जुड़े मामलों की जानकारी कैबिनेट के संज्ञान में लाई गई।-वन सीमा क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति को मंजूरी।