June 25, 2026सत्ता विरोधी माहौल की आशंकाओं के बीच बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने की कवायद तेज गांव-गांव में सक्रिय किए जा रहे भाजपा के जमीन से जुड़े पुराने सभी कार्यकर्ता संगठन के दरवाजे पर इंतजार करने वाले कार्यकर्ता बनेंगे चुनावी वैतरणी पार कराने वाले देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की आहट ने भाजपा के भीतर संगठनात्मक समीकरण बदलने शुरू कर दिए हैं। सत्ता के गलियारों में प्रभावशाली नेताओं, मंत्रियों और पदाधिकारियों के बीच खड़ा वह साधारण कार्यकर्ता, जो पिछले कुछ वर्षों में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा था, अचानक भाजपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण चेहरा बन गया है। पार्टी नेतृत्व अब गांव-गांव और घर-घर तक पहुंच रखने वाले कार्यकर्ताओं को चुनावी रणनीति का केंद्र बना रहा है।भाजपा अच्छी तरह समझती है कि चुनावी जीत केवल सरकारी योजनाओं, बड़े नेताओं की सभाओं और सोशल मीडिया अभियानों से सुनिश्चित नहीं होती। बूथ पर बैठा कार्यकर्ता ही वह कड़ी है जो मतदाता और पार्टी के बीच सीधा संवाद स्थापित करता है। यही कारण है कि संगठन अब बूथ समितियों को सक्रिय करने, पन्ना प्रमुखों को मजबूत करने और पुराने कार्यकर्ताओं को फिर से मैदान में उतारने की कवायद में जुट गया है।दरअसल, सत्ता के दस वर्षों के दौरान पार्टी के भीतर एक धारणा बनी कि कुछ चुनिंदा नेताओं और पदाधिकारियों तक ही संगठन सीमित हो गया है। कई पुराने कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक और निजी तौर पर यह शिकायत भी की कि उन्हें न तो संगठन में पर्याप्त महत्व मिला और न ही सरकार में उनकी सुनवाई हुई। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, पार्टी को एहसास हो रहा है कि चुनावी जंग एयरकंडीशंड कमरों में नहीं, बल्कि गांव की चौपालों, कस्बों की गलियों और बूथों पर लड़ी जाती है।भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने हाल के दिनों में लगातार संगठनात्मक बैठकों का सिलसिला तेज किया है। मंत्रियों, विधायकों और जिलाध्यक्षों को स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि बूथ स्तर तक संवाद बढ़ाया जाए। पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि विपक्ष के आरोपों, स्थानीय नाराजगियों और सरकार विरोधी माहौल को निष्प्रभावी करने का काम केवल वही कार्यकर्ता कर सकता है जो रोज जनता के बीच रहता है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका कैडर आधारित ढांचा रहा है। 2017 और 2022 के चुनावों में भी बूथ प्रबंधन ने पार्टी को बड़ी सफलता दिलाई थी। लेकिन इस बार चुनौती अलग है। एक ओर सत्ता विरोधी भावनाओं को नियंत्रित करना है तो दूसरी ओर संगठन के भीतर नाराज कार्यकर्ताओं को भी साथ लेकर चलना है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व छोटे कार्यकर्ता को फिर से केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जिन कार्यकर्ताओं को कभी नेताओं के कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने तक सीमित समझा जाता था, आज वही कार्यकर्ता चुनावी गणित के सबसे अहम सूत्रधार बन गए हैं। गांवों में होने वाली बैठकों से लेकर सोशल मीडिया के स्थानीय नेटवर्क तक, हर जगह कार्यकर्ता की भूमिका बढ़ी है।कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी भाजपा की इस रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं। विपक्ष का दावा है कि चुनाव आते ही भाजपा को कार्यकर्ताओं की याद आ जाती है, जबकि सत्ता के दौरान उनकी उपेक्षा की जाती है। हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि संगठन की असली ताकत हमेशा कार्यकर्ता ही रहा है और रहेगा।फिलहाल इतना तय है कि 2027 की चुनावी रणभेरी बजने से पहले भाजपा में सबसे अधिक पूछ-परख किसी मंत्री, विधायक या पदाधिकारी की नहीं, बल्कि उस कार्यकर्ता की हो रही है जो हर चुनाव में पार्टी का झंडा लेकर सबसे आगे खड़ा दिखाई देता है। सत्ता की राजनीति में भले चेहरे बदलते रहें, लेकिन चुनाव आते ही भाजपा को फिर याद आ जाता है कि उसकी असली ताकत बूथ का कार्यकर्ता ही है। आज की स्थिति में कहा जाए तो भाजपा में छोटा कार्यकर्ता ही सबसे बड़ा भगवान बन गया है।
June 25, 2026आज शायद अपनी बात 6 दशक पूर्व 1971 में आई हिंदी फिल्म हरे रामा हरे कृष्ण के उस गीत से ट्टदेखो ए दीवानो यह काम न करो, राम का नाम बदनाम न करो, से करना ही सबसे उचित होगा। अपने समय के मशहूर गायक किशोर कुमार का यह गीत वर्तमान दौर के हमारे राजनीतिक और सामाजिक हालात पर सटीक साबित हो रहा है। इन दिनों अयोध्या में बने राम मंदिर से करोड़ों रुपए के दान चोरी का मामला सबसे अधिक चर्चाओं में है। राजनीतिक भ्रष्टाचार के अन्य तमाम मामले जैसे मध्य प्रदेश में सीएम मोहन यादव का वह जमीन खरीद का मामला जो इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुआ है यह बताया गया है कि कैसे एक सूबे के सीएम ने अपने उन 37 नाते रिश्तेदारों और परिजनों के नाम पर जमीनों की खरीद फरोख्त की गई है उल्लेख किया गया है तथा उत्तराखंड में भी हरिद्वार में सरकारी जमीन की खरीदने की धाधली हुई। जैसे अनेक मामले चर्चाओं के केंद्र में है। देश की सत्ता में बैठे लोगों द्वारा देश भर में जिस तरह से देश के संसाधनों और खजाने की लूट—खसोट की जा रही है और राम के नाम तथा धार्मिक स्थलों को सुनियोजित ढंग से अपने कब्जे में लिया जा रहा है इसका सच वास्तव में हैरान करने वाला है। हिंदी के महान कवि गजानन मुक्ति बोध की एक कविता अंधेरे में जो लिखा गया है उसमें रात निकलने वाले एक जुलूस में शामिल लोगों द्वारा अपने—अपने क्षेत्र के छठैत (गुंडे—बदमाशों) की मौजूदगी का वर्णन किया गया है। ठीक वैसा ही परिदृश्य आज अपने देश में दिखाई दे रहा है। जिस आस्था के केंद्र राम मंदिर निर्माण को लेकर भाजपा ने राजनीति की सीढ़ियां चढ़ी थी इस राम मंदिर के ट्रस्टियों द्वारा दान के खजाने को लूटने का जो काम किया गया है तथा अब एसआईटी गठन के जरिए उस पर लीपा पोती की जा रही है वह वास्तव में बेशर्मी की इंतहा ही है। इस मामले की रिपोर्ट एसआईटी द्वारा संजय प्रसाद को सौंपी गई है वह संघी तो है ही साथ ही वह खुद भी राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों में शामिल है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस जांच का क्या नतीजा निकल सकता है। यह लूटपाट की कहानी किसी एक धार्मिक स्थल या आस्था केंद्र की नहीं है उत्तराखंड में अभी विगत दिनों मुंबई के एक बड़े व्यवसायी द्वारा केदारनाथ मंदिर को बहुत सोना दान किए जाने और गर्भ ग्रह को स्वर्ण जनित बनाने के लिए सोना दिया गया था जिसमें सोना चोरी होने और गर्भ ग्रह में सोने की जगह मिश्रित धातु की सोने के पानी वाली परत चढ़ाई जाने की बात सामने आई थी इसकी जांच कराई गई थी लेकिन इसकी हकीकत आज तक सामने नहीं आ सकी है। हो सकता है अयोध्या के राम मंदिर में दान की डकैती का मामला भी कल इसी तरह रफा दफा हो जाए। लेकिन इस घटना ने राम भक्तों और सनातन को मानने वालो की जहनियत को झकझोर कर रख दिया है। खास बात ही है न खाऊंगा न खाने दूंगा जैसे लोक लुभावन जुमले उछालने वाले प्रधानमंत्री मोदी आज किसी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक शब्द बोलने को तैयार नहीं है। राम मंदिर ट्रस्ट में आज अगर चंपत राय का नाम शामिल है वही इस ट्रस्ट में दर्जन भर लोग ऐसे हैं जो संघ से जुड़े हुए हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि संघ और भाजपा मिलकर मोदी की छवि को एक विश्व गुरु ही नहीं एक धर्मगुरु के रूप में स्थापित करने का काम कर रहे हैं। पीएम का अपने आप को नान बायोलॉजिकल होने का बयान भी इसकी पुष्टि करता है साथ ही अभी प्रकाश में आई एक रिपोर्ट जिसमें उनकी धर्मगुरु की छवि गढ़ने पर 2000 करोड़ का खर्च होने की बात सामने आई है। जिसका मकसद सिर्फ आस्था के नाम पर वोट बटोरना ही है। देश व समाज में क्या हो रहा है? इस पर पाठक खुद चिंतन करें तो ज्यादा बेहतर होगा।।
June 25, 2026काराकास। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में विनाशकारी भूकंप आया है। एक मिनट के अंतराल में आए 7.1 और 7.5 तीव्रता के भूकंप ने भीषण तबाही मचाई है। कई इमारतों और मकानों के ढहने की खबर है। जिसमें 10 हजार से अधिक लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। राहत और बचाव का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है।दरअसल, बुधवार को वेनेजुएला की राजधानी के पश्चिम में भूकंप के तगड़े झटके महसूस किए गए। इससे काराकस में इमारतें गिर गईं, लोग मलबे में दब गए। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस दक्षिण अमेरिकी देश में भारी जान-माल का नुकसान हो सकता है।यू.एस. जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, काराकस से लगभग 160 किलोमीटर (100 मील) पश्चिम में 7.2 तीव्रता का भूकंप आया और एक मिनट से भी कम समय बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा झटका महसूस किया गया। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, मरने वालों की संख्या 10,000 से 1,00,000 के बीच हो सकती है।वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने बुधवार को देश में आए विनाशकारी भूकंप के बाद इमरजेंसी का एलान किया है। उन्होंने देश को संबोधित करते हुए कहा कि जिन लोगों ने दुर्भाग्य से अपने परिवार के किसी सदस्य को खो दिया है, उनके प्रति हम अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं। हालांकि, उन्होंने मरने वालों या घायलों की कुल संख्या नहीं बताई।CNN के अनुसार, भूकंप के बाद गिरी हुई इमारतों और क्षतिग्रस्त ढांचों के नीचे फंसे लोगों को खोजकर निकालने के लिए इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तैनात की गई हैं।स्थानीय अधिकारियों और चश्मदीदों ने बताया कि इमारतें गिर गई हैं, बचाव कार्य चल रहा है और घायलों की संख्या बढ़ रही है। गृह मंत्री डियोसडाडो कैबेलो ने सरकारी टीवी पर कहा, “कई इमारतें और घर ढह गए हैं और हम सुरक्षा और नागरिक सहायता के लिए उपलब्ध हर चीज़ का इस्तेमाल करके स्थिति को संभाल रहे हैं।”भूकंप के बाद मदद से लिए अमेरिका आगे आया है। अमेरिकी डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडौ ने X पर कहा, “हम वेनेजुएला के अधिकारियों के संपर्क में हैं और मदद जुटा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भूकंप बहुत विनाशकारी था।काराकस में अमेरिकी दूतावास ने कहा कि वह भूकंप के बाद की स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और देश के नागरिकों से सुरक्षित आश्रय लेने और क्षतिग्रस्त इलाकों से दूर रहने की अपील की है। जिस दिन वेनेजुएला में भूकंप आया, उस दिन सार्वजनकि छुट्टी थी और लोग अपने घरों में थे। इसी दिन 1821 में स्पेन से वेनेजुएला को आजादी मिली, जिसके कारण इस दिन सार्वजनिक छुट्टी रहती है।पश्चिमी कराकस में रहने वाली 41 वर्षीय पब्लिसिस्ट एस्ट्रिड रामिरेज़ ने कहा, “जैसे ही यह शुरू हुआ, हमें लोगों के चिल्लाने की आवाज सुनाई देने लगी। हर कोई सीढ़ियों से नीचे भाग रहा था। पूर्वी कराकस में रहने वाली 56 वर्षीय कोरो मार्टिनेज ने कहा, “बहुत जोरदार आवाज हुई। घर में चीज़ें गिर गईं, फ्रिज के अंदर रखे जग भी गिर गए। मैंने ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं किया था।काराकस के ‘अस्पताल डी क्लिनिकास’ में, वहां काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि घायलों के इलाज में मदद के लिए कर्मचारियों को नाइट शिफ्ट में दोगुना काम करने के लिए कहा गया था। काराकस के उत्तर में तट पर स्थित माइक्वेटिया में वेनेजुएला का सबसे बड़ा हवाई अड्डा नुकसान के कारण बंद कर दिया गया है।वेनेजुएला के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भूकंप के झटकों का तुरंत कोई असर नहीं दिखा, क्योंकि जिन शहरों में भारी नुकसान की आधिकारिक रिपोर्ट है, उनमें से लगभग किसी में भी महत्वपूर्ण तेल इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। लेक माराकाइबो के बड़े तेल केंद्र के पास माराकाइबो में नागरिक सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि किसी के घायल होने की खबर नहीं है।
June 24, 2026देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जौलीग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून पर केन्द्रीय मंत्री, भारत सरकार श्री जगत प्रकाश नड्डा का उत्तराखंड आगमन पर स्वागत एवं अभिनंदन किया।
June 24, 2026अल्मोड़ा। रानीखेत तहसील के ग्राम पंचायत दुभणा के राजस्व ग्राम क्षेत्र में तितालीखेत रेंज के समीप बीती शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। यहंा एक कार अनियंत्रित होकर करीब 200 मीटर गहरी खाई में जा गिरी, जिससे कार सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर अग्रिम कार्यवाही शुरू कर दी है।जानकारी के अनुसार बीती शाम एक कार तितालीखेत रेंज के समीप मोटर मार्ग पर दुर्घटनाग्रस्त होकर गहरी खाई में गिर गई। घटना की सूचना मिलते ही राजस्व पुलिस, स्थानीय पुलिस, एसडीआरएफ तथा फायर सर्विस की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। वाहन में दो लोग सवार थे। हादसे में एक मृतक की पहचान जीवन चंद्र जोशी पुत्र पूरन चंद्र जोशी, निवासी हल्द्वानी के रूप में हुई है, जबकि दूसरे मृतक की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।बचाव दल ने दोनों शवों को खाई से निकालकर 108 एंबुलेंस की सहायता से पोस्टमार्टम के लिए राजकीय चिकित्सालय रानीखेत भेज दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
June 24, 2026देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में सुश्री सपना राणा ने मुलाकात की।आज यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में सुश्री सपना राणा ने मुलाकात की। सुश्री सपना राणा द्वारा राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के अन्तर्गत जर्मन भाषा का प्रशिक्षण प्राप्त कर भाषा परीक्षा उर्तीण की गई, जिसके उपरान्त उनको जर्मनी के हैमबर्ग शहर के शॉन क्लीनिक हॉस्पिटल में 3060 यूरो ( 3,30,000) प्रतिमाह के वेतन पर नियुक्ति प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के अन्तर्गत कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के अन्तर्गत गठित विदेश रोजगार प्रकोष्ठ द्वारा अन्तराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार के अवसरों से राज्य के युवाओं को जोड़े जाने हेतु निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में विदेश रोजगार प्रकोष्ठ द्वारा राज्य के युवाओं को जापान एवं जर्मनी में सेवायोजित किये जाने हेतु भाषा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। अब तक करीब 65 युवाओं को जापान में सेवायोजित किया जा चुका है। कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि जर्मनी में नर्सिंग क्षेत्र में युवाओं हेतु रोजगार के अवसर उपलब्ध है। जिसके दृष्टिगत प्रकोष्ठ द्वारा जर्मन भाषा का प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। इसी प्रशिक्षण को प्राप्त करने के उपरान्त टिहरी गढवाल की नर्सिंग प्रशिक्षित युवा महिला सुश्री सपना राणा का जर्मनी में नर्स के रूप में चयन हुआ है। सुश्री सपना द्वारा अपनी स्कूली शिक्षा जवाहर नवोदय विघालय पोखाल टिहरी गढवाल से तथा नर्सिंग की शिक्षा स्टेट नर्सिंग कॉलेज देहरादून से प्राप्त की गई। सुश्री सपना द्वारा राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के अन्तर्गत जर्मन भाषा का प्रशिक्षण प्राप्त कर जर्मनी के हैमबर्ग शहर के शॉन क्लीनिक हॉस्पिटल में नियुक्ति प्राप्त हुई है। इस अवसर पर सचिव सी. रविशंकर भी मौजूद रहे।