हंगामा क्यों है बरपा…

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इन दिनों संसद का मानसून सत्र गतिमान है। विपक्ष के हंगामे के कारण संसद के दोनों सदनों में अब तक कोई कामकाज नहीं हो सका है। उधर आठ महीनों से जारी किसान आंदोलन दिनों दिन तेज होता जा रहा है। आंदोलनकारी किसान बॉर्डर से आगे बढ़कर जंतर—मंतर पर अपनी संसद चला रहे हैं। देश में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर समूचा विपक्ष सड़कों पर धरने प्रदर्शन कर रहा है। वहीं संसद के अंदर फोन टेपिंग और जासूसी को लेकर तथा किसानों और महंगाई के मुद्दे पर विपक्षी नेताओं का हंगामा जारी है। सड़कों से लेकर संसद तक इन दिनों जो हंगामा जारी है वह बेवजह नहीं है। आगामी साल में उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में होने वाले चुनावों के मद्देनजर सभी दल सरकार की घेराबंदी में जुटे हुए हैं। पश्चिम बंगाल के चुनाव के नतीजे के बाद देश की राजनीति एक बार फिर करवट बदलती दिख रही है। विपक्षी दलों की भाजपा के खिलाफ एकजुट होने की प्रक्रिया इसकी पृष्ठभूमि में जारी है। दरअसल भाजपा ने बीते कुछ दिनों से विपक्ष को कई ऐसे मुद्दे दे दिए हैं जिन्हें लेकर विपक्ष अत्यंत ही आक्रमक दिखाई दे रहा है। मानसून सत्र शुरू होने से दो—एक दिन पूर्व देश के तमाम नेताओं और पत्रकारों के फोन डाटा चोरी होने और टैपिंग के मामले पर सरकार कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी है। निजता के हनन के इस मामले को लेकर अगर हंगामा हो रहा है तो वह बेवजह नहीं कहा जा सकता है। देश में पेट्रोल—डीजल और रसोई गैस की कीमतों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सरकार द्वारा पेट्रोल—डीजल पर इतना अधिक टैक्स वसूला जा रहा है कि भारत विश्व में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला देश बन गया है। जबकि कोरोना और बेरोजगारी की मार से बेहाल आम आदमी को दो जून की रोटी जुटाना मुश्किल हो रहा है मगर सरकार इसके बावजूद भी उसकी परेशानियों को समझने का प्रयास नहीं कर रही है। देश के किसान आठ महीनों से दिल्ली के बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं। सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे इन किसानों की समस्याओं को सुनने की बजाय उन्हें आतंकवादी तो कभी मवाली बताकर भाजपा नेता उनका मखौल बना रहे हैं। कोरोना प्रबंधन में विफल रही सरकार ऑक्सीजन की कमी से देश में एक भी मौत न होने की बात संसद में कह कर उन लोगों के जख्मों पर नमक छिड़क रही है, जिन्होंने इस कोरोना काल में अपनों को खोया है ऐसी एक नहीं तमाम बातें हैं जो सत्ता की संवेदनहीनता को दर्शाती है। ऐसे में अगर हंगामा नहीं होगा तो और क्या होगा।

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