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नकल जिहादियों को मिट्टी में मिला देंगेः धामी

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  • पेपर लीक पर युवा व सरकार आमने—सामने
  • नकल माफिया व कोचिंग सेंटरों का षड्यंत्र
  • राज्य में अराजकता फैलाने की कोशिश

देहरादून। यूकेएसएसएससी परीक्षा का पेपर लीक होने का मामला अब नए मोड पर पहुंच गया है। शासन में बैठे नेता और प्रशासन में बैठे अधिकारी इस बात को मानने को तैयार ही नहीं है कि पेपर लीक हुआ है। सभी एक स्वर में इसे दो—चार लोगों के बीच घटित हुई एक वारदात बताकर खारिज कर रहे हैं यही नहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे नकल माफिया व कुछ कोचिंग सेंटरों का षड्यंत्र बताते हुए कहा है कि वह इन नकल जिहादियों को मिटृी में मिला देंगे।
उनका साफ कहना है कि इस पूरे प्रकरण का उद्देश्य भर्ती परीक्षा और प्रणाली पर सवालिया निशान लगाना और उसकी विश्वसनीयता को संदिग्ध बनाना तथा अराजकता फैलाना है। उनका कहना है कि हमने सख्त नकल विरोधी कानून बनाकर अब तक सौ से अधिक लोगों को जेल पहुंचा दिया है तथा 25 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराई हैं। लेकिन युवाओं का भला हो यह कुछ लोगों को अच्छा नहीं लग रहा है। उनका कहना है कि उनकी सरकार युवाओं का अहित नहीं होने देगी तथा नकल जिहादियों को मिटृी में मिला देगी।
उधर देहरादून के पुलिस कप्तान का कहना है कि उन्हें अब तक गिरफ्तार किए गए लोगों से जो भी जानकारियां मिली हैं उसमें पेपर लीक होने जैसी स्थिति का कोई संकेत नहीं मिला है। हरिद्वार के पथरी स्थित जिस सेंटर से खालिद ने पेपर के तीन पेज का स्क्रीनशॉट बाहर भेजा उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया है। उसकी बहन साबिया और एक असिस्टेंट प्रोफेसर जिसने पेपर आउट होने की जानकारी सार्वजनिक की उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
जो युवा बीते तीन दिनों से इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर जमे हुए हैं उनका कहना है कि सीएम से लेकर आयोग के अध्यक्ष और पुलिस अधिकारियों तक सब इस संवेदनशील मुद्दे पर सख्त कार्यवाही करने की बजाय युवाओं और मामले का खुलासा करने वालों पर कार्रवाई करने का डर दिखा रहे हैं। उन्हें गिरफ्तार कर रहे हैं। लेकिन हम न डरने वाले हैं न झुकने वाले हैं। हमारा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार इस परीक्षा को रद्द कर पुनः परीक्षा नहीं कराएगी तथा इसकी सीबीआई जांच नहीं कराएगी व प्रोफेसर से मुकदमा वापस नहीं लगी।

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