बद्रीनाथ मंदिर के सिंह द्वार मेंं आई दरार का ट्रीटमेंट जरूरी

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  • एएसआई का सुझाव, 5 करोड़ खर्च होंगे

चमोली। बद्रीनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार में आई दरारों को लेकर भले ही ए एस आई और अन्य संस्थाओं के लोगों के मतों में भारी भिन्नता दिखती हो और सरकार भी चाहे इन दरारों को मामूली मान रही हो लेकिन ए एस आई द्वारा उनकी मरम्मत के काम को लेकर असंतुष्टि जाहिर करते हुए इसके उचित ट्रीटमेंट का सुझाव सरकार को दिया है जिसमें 5 करोड रुपए खर्च आने की बात कही गई है।
उल्लेखनीय है कि अभी कुछ हफ्ते पूर्व बद्रीनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार जिसे सिंह द्वारा कहा जाता है, में दरार आने की बात सामने आई थी जिस पर संज्ञान लेते हुए इसके ट्रीटमेंट का काम शुरू हुआ था। मंदिर के प्रवेश द्वार में आई इन दरारों के मामले को जोशीमठ जो बद्रीनाथ से महज 40 किलोमीटर की दूरी पर है, पर हुई बड़ी भू धसांव की घटना से जोड़कर देखे जाने के कारण भी गंभीरता से लिया गया है। इसका सर्वे करने गई टीम ने हालांकि इस बात से इनकार किया था कि इसका कोई संबंध जोशीमठ की भू धसाव की घटना से है। ए एस आई की टीम का कहना है कि बारिश और अन्य पर्यावरणीय बदलावों के कारण यह दरारें आई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि जोशीमठ की भू संरचना और बद्रीनाथ की भू संरचना में बड़ा अंतर है। लेकिन इस ऐतिहासिक धरोहर की हिफाजत और संरक्षण के लिहाज से इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इसके ट्रीटमेंट के लिए लोहे के क्लिप के इस्तेमाल को अनुचित बताते हुए इसके प्रॉपर ट्रीटमेंट की बात भी कही गई थी और इसकी दीवारों के पुराने पत्थरों को बदलने का सुझाव दिया गया है।
उधर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि यह कोई विशेष समस्या नहीं है तथा इस पर हमारी नजर है। पहाड़ में इस तरह की दरारें आने की घटनाएं सामान्य है और अगर कुछ गड़बड़ दिखेगी तो उसका ट्रीटमेंट किया जाएगा। यहंा यह भी उल्लेखनीय है कि बद्रीनाथ क्षेत्र में 20 भूस्खलन और 17 भू धसांव क्षेत्र (जोन) चिन्हित किए गए हैं।

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