जो बाहर से सुन्दर बोले, अंदर दोष रखे उसका नाम पूतना : आचार्य ममगाईं

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देहरादून। मथुरा में अवतार गोकुल में वास मथुरा शरीर है गोकुल इन्द्रियां है। भगवान् इन्द्रियों की पवित्र भाव रखने वाले के पास अनुकूल परिस्थिति धन सम्पति के रूप में रहना पसंद करते है। अष्ठमी को भगवान का प्राकट्य, नवमी नन्दोत्सव, चतुदर्शी को पूतना का वध किया। हमारे शरीर के चौदह स्थानों में पूतना का वास होता है। जो बाहर से सुन्दर बोले, अंदर से खोट रखे, कथनी करनी में अंतर करें उसका नाम ही पूतना है।
यह बात आज बद्रीपुर जोगीवाला श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन प्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य ममगाई ने कही। आचार्य ने कहा कि जो प्रेमी अपने प्रियतम भगवान के चरणकमलों का अनन्य भाव से दूसरी भावनाओं आस्थाओं वृतियों व प्रवर्तियों को छोड़कर भजन करता है उससे पहली बात तो यह है कि पापकर्म होते नहीं, परन्तु यदि कभी किसी प्रकार हो भी जाये तो परम् पुरुष भगवान श्री हरि उनके हृदय में बैठकर वह सब धो बहा देते हैं और उसके हृदय को शुद्ध कर देते हैं। जहाँ दुख तो व्यर्थ हो ही गए सुख भी व्यर्थ हो गए जहाँ सारी प्रकृति व्यर्थ प्रतीत होने लगी, सब सांसारिक सुख देखे और व्यर्थ पाए तो धर्म की खोज प्रारम्भ होने लगी। क्योंकि प्रकृति के बाहर और जब बाहर से कोई व्यर्थता का अनुभव करता है तो भीतर की ओर आना शुरू होता है। अतएव प्रकृति की ही मांग के लिए यदि आप परमात्मा की ओर जाते हैं तो जानना कि अभी गये नही हैं। जिस दिन आप परमात्मा के लिए ही परमात्मा की ओर जाते हैं उसी दिन जानना कि धर्म का प्रारंभ हुआ है।


इस अवसर पर मुख्य रूप से जखोली क्षेत्र पंचायत प्रमुख प्रदीप थपलियाल पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख अर्जुन सिंह गहरवार वीरेंद्र मियां वीना जोशी डॉ श्ौलेन्द्र ममगाईं संजय ममगाईं विमल ममगाईं देवेन्द्र ममगाईं वीरेंद्र ममगाईं रविंद्र ममगाईं दिवाकर ममगाईं राकेश ममगाईं रत्नमणी ममगाईं परमेश्वरी देवी विजयलक्ष्मी ममगाईं रजनी नीलम ममगाईं आदि भत्तQ गण भारी संख्या में उपस्थित रहे।

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