कलश यात्रा के साथ शिवपुराण कथा प्रारम्भ

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कलश यात्रा के साथ शिवपुराण कथा प्रारम्भ

देहरादून। आज भद्रकाली मन्दिर प्राँगण अनार वाला में अनार वाला जोहडी गांव गुचूपाना नाई वाला की जन्ता की ओर से शिवपुराण पुराण कथा से पहले कलश यात्रा निकाली गई महिलाओं नें शिरपर कलश लेकर अनार वाला चौक से पीत वस्त्र शिर पर कलश लिए ऊं नमःशिवाय नाद घोष करते हुए मन्दिर मे आकर भोले का जलाभिषेक किया गया। कथा का प्रारम्भ करते हुए प्रसिद्ध कथावाच आचार्य शिवप्रसाद ममगांई ने कहा कलियुग में कथा श्रवण करनें से होती सबकामना पूर्ण होती है आध्यात्मिक ।के साथ हिंदू धर्म कोश के अनुसार स्मृतियों में धर्म के स्वरूप का साधारण क्रम यह है कि पहले साधारण धर्म का वर्णन किया गया है। जिसका जगत के सभी प्राणियों द्वारा अनुपालन करना उचित है। जिसके पालन से समाज की रक्षा होती है। यह धर्म आस्तिक और नास्तिक दोनों पक्षों को मान्य होता है। फिर समाज की स्थिति के लिए जीवन के विविध व्यापारों और अव्यवस्थाओं वर्णों आश्रमों के कर्तव्यों का धर्म के रूप में निर्देश किया जाता है। इसको ही विशिष्ट धर्म कहते हैं ।जिससे मनुष्य संयमी होजाता है संयमी जीवन ही संस्कारों को सम्पन्न करता है और संस्कारों का फल होता है शरीर और आत्मा का उत्तरोत्तर विकास। धर्म सन्मार्ग का प्रथम उपदेश है अभ्युदय लिए नियम है, संयम उस आदेश का नियम पालन है संस्कार उन संयमों का सामूहिक फल है और किसी देश काल और और नियमित में विशेष प्रकार को उन्नत अवस्था में प्रवेश करने का द्वार है आज विषेस रूप से नलिन प्रधान, पुष्कर केंथोला ,सरस्वती प्रधान, उर्मिला, रुचि, अंजू ,कृष्ण बहादुर शाही ,मुक्ता ,प्रीतम छेत्री, नवीन छेत्री ,हितेंद्र राय ,मनोरमा, अजय लामा, पार्वती, विनोद थापा, रमा थापा,राहुल प्रसाद, अंकित भट्ट,तरुण सती, जय प्रसाद,और अन्य लोग उपस्थित रहे।

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