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जोहड़ी गांव जंगल मिटाने की तैयारी!

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  • रिजर्व फॉरेस्ट में पोल लगाने पहुंचा बिजली विभाग-सवालों में सिस्टम!
  • जंगल की जमीन पर कब्जे किसकी शह पर
  • मुकदमा क्या जंगल की सुरक्षा की गारंटी

देहरादून। हंगामा बरपा, विरोध प्रदर्शन हुआ तब जाकर टूटी शासन—प्रशासन और वन विभाग की नींद। अपनी नाकामी और लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने की अवैध कब्जा धारक व बिजली विभाग के खिलाफ मुकदमे की कार्रवाई। सवाल यह है कि बड़ी संख्या में हुए पेड़ों के अवैध कटान और वन भूमि पर कब्जे को लेकर शासन—प्रशासन व वन विभाग के यह अधिकारी कहां कुंभकर्णी नींद में सोए हुए थे। सालों से चल रहे इन प्रयासों की जानकारी उन्हें क्यों नहीं लग सकी?
पेड़ गिराये जाते रहे, जमीन साफ की गई और फिर संरक्षित वन भूमि पर निर्माण कार्य होने से लेकर बिजली लाइन तक पहुंचाने का काम हो रहा था तब तक क्या इसकी भनक भी जंगलात के अफसरों को नहीं थी अगर जानकारी थी तो यह सारा खेल किसके इशारे पर हो रहा था? 2020—22 तक जोहड़ी गांव क्षेत्र का जो भूभाग घने जंगलों से आच्छादित था, 2025—26 तक जगह—जगह कैसे खाली हो गया? सैटेलाइट तस्वीरों में यह साफ देखा जा सकता है। सांध्य दैनिक ट्टदून वैली मेल’ द्वारा ड्रोन से ली गई इन तस्वीरों में इसे साफ देखा जा सकता है। पर्यावरण संरक्षण के सरोकारों के तहत अखबार द्वारा जब इसे उजागर किया गया तब क्षेत्र वासियों का ध्यान इस पर गया जिसके बाद हंगामा हुआ तथा विरोध प्रदर्शन के लिए लोग सड़कों पर आ गए। विघुत लाइन बिछाये जाने का विरोध कर रहे क्षेत्र वासियों ने यहां से बिजली कर्मियों को खदेड़े जाने के बाद वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और उनकी मजबूरी बन गई कि अवैध कब्जा और बिजली लाइन बिछाने वाले ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कराया जाए। अब यह मीडिया संस्थानों की खबर तो बननी ही थी।
जोहड़ी के जंगलों पर अतिक्रमण कि यह खबर अब सुर्खियों में है। प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ सोशल मीडिया व नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं तथा इस पर तमाम सवाल पूछे जा रहे हैं। इतना सब हो गया या हो रहा था जंगलात विभाग के अधिकारी अब तक कहां सोए थे? यह पहला सवाल है?
संरक्षित वन क्षेत्र से सैकड़ो पेड़ों का कटान जिनकी संख्या 3—4 सौ बताई जा रही है की अनुमति किसने दी? तथा बिजली की लाइन बिछाने को एनओसी कहां से मिली? ऐसे अनेक सवाल है। क्या यह पूरा खेल शासन—प्रशासन की मिली भगत से चल रहा था? जाखन के जंगलों को खोखला बनाने का काम कौन कर रहा है? इसके अलावा सबसे अहम सवाल यह है कि क्या वन विभाग की मुकदमे की कार्रवाई के बाद यह खेल रोका जाएगा? इन सवालों के ठोस जवाब मिलने तक पर्यावरण की सुरक्षा के लिए लड़ने वालों की लड़ाई भी जारी रहेगी। क्योंकि अब क्षेत्र की जनता भी इसके खिलाफ सड़कों पर आ चुकी है।

वन क्षेत्र की सुरक्षा प्राथमिकता में शामिलः ग्राम प्रधान
देहरादून। जंगल क्षेत्र में कथित अतिक्रमण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस पूरे मामले में अब ग्राम प्रधान सागर लामा का बयान सामने आया है। प्रधान ने स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने इस अतिक्रमण के मामले में वन विभाग को पहले ही लिखित शिकायत दी हुई है। उनका कहना है कि क्षेत्र में जो फेंसिंग लगाई गई है, वह भी उनके कहने पर ही लगाई गई थी, ताकि जंगल की जमीन को सुरक्षित रखा जा सके।
ग्राम प्रधान सागर लामा के अनुसार, उनका उद्देश्य केवल वन क्षेत्र की सुरक्षा और अतिक्रमण को रोकना है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कहीं भी अवैध गतिविधि हो रही है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल, मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर हलचल बनी हुई है और वन विभाग की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।

मामले की हो उच्च स्तरीय जांच : सुजाता पाल
देहरादून। इस प्रकरण में जन प्रहार संस्था की संयोजक सुजाता पाल का कहना है कि यह मामला बेहद गंभीर है जहंा एक ओर सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि राज्य के मुख्य सचिव ट्टडीम फारेस्ट’ की सूची तैयार कर प्रस्तुत करें, वहीं दूसरी ओर जोहड़ी गांव के बीचों—बीच आरक्षित वन क्षेत्र में खुलेआम पेड़ों की कटाई और निर्माण सामग्री ले जाने का काम शुरू हो चुका है। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि 4 मार्च 2025 के उच्चतम न्यायालय के मुख्य सचिव को दिए आदेशों की सीधी अवहेलना है। इसके अलावा और भी चिंताजनक यह है कि बिना वैध अनुमति के बिजली विभाग द्वारा वहां पोल लगाने की कार्रवाई की जा रही है, जिससे वन विभाग और प्रशासनिक मिलीभगत दिखती हैं। हम मांग करते हैं कि इस पूरे प्रकरण की तत्काल उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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