August 19, 2026देहरादून। सड़क दुर्घटना में आज सुबह एक इको वाहन के सड़क किनारे खड़े लोडर वाहन से टकरा जाने से जहंा दो लोगों की मौत हो गयी वहीं पांच लोग घायल हुए है। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंच कर मृतक व घायलों को अस्पताल पहुंचाया जहंा तीन की हालत चितंाजनक बनी हुई है।सड़क दुर्घटना का यह मामला डोईवाला टोल प्लाजा के समीप का है। यहंा आज सुबह सड़क हादसे में दो लोगों की मौत हो गई है। जबकि पांच घायल हैं। इनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। वाहन में कुल सात लोग सवार थे। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत—बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लिया। वहीं घायलों का अस्पताल में उपचार चल रहा है।जानकारी के अनुसार देहरादून—हरिद्वार रोड पर मणिमाई मंदिर के पास आज सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। टोल के पास सड़क किनारे खड़े लोडिंग वाहन से एक इको गाड़ी टकरा गई। हादसे के वक्त इको में सात लोग सवार थे। टक्कर इतनी भीषण थी कि आगे बैठे दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल हो गए। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। हर्रावाला चौकी प्रभारी कमलेश गौड ने बताया कि इको गाड़ी देहरादून से हरिद्वार की ओर जा रही थी। इसी दौरान उसके आगे चल रहे लोडिंग वाहन का अचानक टायर निकल गया। टायर निकलने के बाद लोडिंग वाहन अनियंत्रित होकर इको गाड़ी से टकरा गया और इको भी लोडिंग वाहन से जा भिड़ी।हादसे में इको में आगे बैठे दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, पांच अन्य लोग घायल हो गए, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत—बचाव कार्य शुरू किया।
August 19, 2026बसंत विहार क्षेत्र की चेन लूट मामले में चल रहा था फरार देहरादून। बंसत विहार क्षेत्र में हुई चेन लूट मामले में फरार चल रहे बदमाश की देर रात पुलिस से मुठभेड़ हो गयी। मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से बदमाश घायल हो गया। जिसे गिरफ्तार कर अस्पताल पहुंचाया गया जहंा उसका उपचार जारी है। आरोपी के कब्जे से पुलिस ने एक तमंचा, दो कारतूस, स्कूटी तथा लूटी गयी चेन बरामद की है।जानकारी के अनुसार बसंत विहार क्षेत्र में देर रात्रि हरबंसवाला बैरियर पर चेकिंग के दौरान पुलिस ने बिना नम्बर प्लेट की एक स्कूटी सवार को रोकने का प्रयास किया। लेकिन स्कूटी चालक चेकिंग प्वाईंट पर न रुककर टी एस्टेट की तरफ भागने लगा। इस पर पुलिस टीम द्वारा बदमाश का पीछा किया गया, बदमाश द्वारा पुलिस पर पीछा करने के दौरान फायरिंग की गई, पुलिस टीम द्वारा बदमाश का पीछा करते हुए जवाबी कार्यवाही की गयी। जिसके चलते बदमाश पैर में गोली लगने से घायल हो गया। घटना की सूचना मिलने पर तत्काल अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और मुठभेड़ में घायल बदमाश को तत्काल उपचार हेतु प्रेमनगर चिकित्सालय भेजा गया जिसे उच्च उपचार हेतु जिला अस्पताल रेफर किया गया। अधिकारियो द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण कर चिकित्सालय में जाकर अधिकारियों से घटना के बारे में जानकारी ली गयी। पुलिस के अनुसार घायल हुआ बदमाश बीती 14 अगस्त को बसंत विहार इलाके में हुई वृद्ध महिला के साथ चेन स्नैचिंग की घटना में आरोपी है। जिसके पास से एक तमंचा, दो कारतूस, घटना में प्रयुक्त स्कूटी व लूटी गयी चेन बरामद हुई है। गिरफ्तार बदमाश का नाम आकाश उर्फ तमंचा पुत्र जगदीश लाल निवासी शिवाजी एनक्लेव जैन प्लॉट थाना रायपुर देहरादून बताया जा रहा है। जिसके खिलाफ जिले के विभिन्न थानों में एक दर्जन से अधिक मुकदमें दर्ज है।
August 19, 2026अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव व्यवस्था और खासकर मतदाता पहचान-पत्र की व्यवस्था को अमेरिका के लिए उदाहरण के तौर पर पेश किया है। अमेरिकी चुनावों में सख्त पहचान व्यवस्था की वकालत करते हुए ट्रंप ने भारत का हवाला दिया। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि देश की चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता और मजबूती वैश्विक स्तर पर स्थापित है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत में चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को केवल अमेरिका के राष्ट्रपति की ओर से भारत की तारीफ के रूप में देखना अधूरा होगा। असली सवाल यह है कि जिस चुनावी व्यवस्था को दुनिया का सबसे शक्तिशाली लोकतंत्र अपने लिए उदाहरण बता रहा है, उसी व्यवस्था को लेकर भारत के भीतर इतने सवाल क्यों उठ रहे हैं? लोकतंत्र में चुनाव केवल मतदान की मशीन, मतदाता पहचान पत्र और मतदान केंद्रों की व्यवस्था का नाम नहीं है। चुनाव की विश्वसनीयता का मतलब है मतदाता सूची पर भरोसा, निष्पक्ष प्रक्रिया, राजनीतिक दलों के लिए समान अवसर, पारदर्शिता, शिकायतों का समयबद्ध समाधान और चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता। भारत की चुनाव व्यवस्था की ताकत निश्चित रूप से कम नहीं है। करोड़ों मतदाताओं वाले देश में चुनाव कराना अपने आप में दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक अभियानों में से एक है। मतदाता पहचान पत्र से लेकर इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन और व्यापक चुनावी प्रशासन तक भारत ने एक विशाल चुनावी तंत्र खड़ा किया है। लेकिन किसी व्यवस्था की मजबूती का प्रमाण केवल बाहर से मिलने वाली तारीफ नहीं होती। उसकी असली परीक्षा तब होती है जब सत्ता पक्ष और विपक्षकृदोनों उसके फैसलों को समान रूप से स्वीकार करें। यहीं से ट्रंप की टिप्पणी भारत के लिए एक असहज लेकिन जरूरी सवाल खड़ा करती है। अगर अमेरिका भारत के मतदाता पहचान मॉडल से सीखना चाहता है, तो भारत को भी अपनी चुनावी संस्थाओं को लेकर उठने वाले सवालों से सीखने की जरूरत है। लोकतंत्र में हमारी व्यवस्था दुनिया में सबसे अच्छी है कहना आसान है, लेकिन यह सुनिश्चित करना मुश्किल है कि देश का हर नागरिक भी यही महसूस करे। हाल के दिनों में भारत में मतदाता सूची, मतदाता पहचान और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। विपक्ष ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार और चुनाव आयोग चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता का बचाव करते रहे हैं। कांग्रेस ने ट्रंप की टिप्पणी को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी राजनीतिक तंज कसा। यह स्थिति लोकतंत्र के लिए स्वस्थ तभी होगी जब आरोप और बचाव दोनों तथ्यों के आधार पर हों। चुनाव आयोग को भी आलोचना से घबराने की जरूरत नहीं है। उलटे, जितने ज्यादा सवाल उठें, उतनी ही अधिक पारदर्शिता दिखाई जानी चाहिए। मतदाता सूची में बदलाव हो तो उसके कारण सार्वजनिक हों। किसी मतदाता का नाम जुड़ता या हटता है तो प्रक्रिया स्पष्ट हो। राजनीतिक दलों की शिकायतों पर समयबद्ध जवाब मिले। चुनावी आंकड़े और प्रक्रियाएं जितनी संभव हों, उतनी पारदर्शी हों। क्योंकि लोकतंत्र में विश्वास मांगा नहीं जाता, बनाया जाता है। ट्रंप की तारीफ को लेकर भारत में राजनीतिक दल अपने-अपने अर्थ निकालेंगे। सत्ता पक्ष इसे भारतीय चुनावी व्यवस्था की वैश्विक स्वीकृति बताएगा और विपक्ष इसे अपने सवालों के संदर्भ में देखेगा। लेकिन इन राजनीतिक व्याख्याओं से ऊपर एक बड़ी बात हैकृभारत के मतदाता का भरोसा। आखिर चुनाव किसी सरकार, किसी पार्टी या किसी नेता के लिए नहीं होते। चुनाव उस नागरिक के लिए होते हैं जो मतदान केंद्र तक जाता है और अपने एक वोट से सत्ता का भविष्य तय करता है। इसलिए ट्रंप भारत की चुनाव व्यवस्था के मुरीद हुए हैं तो अच्छी बात है। लेकिन भारतीय लोकतंत्र को इससे भी ज्यादा खुशी तब होनी चाहिए जब भारत का हर मतदाता अपनी चुनावी व्यवस्था पर बिना किसी संदेह के भरोसा कर सके। विदेशी प्रशंसा लोकतंत्र की उपलब्धि हो सकती है, मगर जनता का अटूट विश्वास ही लोकतंत्र की असली कसौटी है।
August 18, 2026देहरादून। युवा कल्याण एवं प्रान्तीय रक्षक दल विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में “खेल महाकुम्भ-2026- मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी” के अन्तर्गत प्रतियोगिताओं के आयोजन की रूपरेखा निर्धारित की गई है। खेल महाकुम्भ का आयोजन न्याय पंचायत, विधानसभा क्षेत्र, संसदीय क्षेत्र एवं राज्य स्तर पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से किया जाएगा। न्याय पंचायत स्तर की स्थानीय जनप्रतिनिधि खेलकूद प्रतियोगिताएं 01 से 10 सितम्बर 2026 तक, विधानसभा स्तर की विधायक चैम्पियनशिप ट्रॉफी प्रतियोगिताएं 11 से 20 सितम्बर 2026 तक, संसदीय क्षेत्र स्तर की सांसद चैम्पियनशिप ट्रॉफी प्रतियोगिताएं 21 से 30 सितम्बर 2026 तथा तथा राज्य स्तर की मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी प्रतियोगिताएं 10 सितम्बर से 30 अक्टूबर 2026 तक आयोजित की जाएंगी। न्याय पंचायत स्तर पर अण्डर-14 एवं 19 बालक-बालिका वर्ग में कबड्डी, एथलेटिक्स, खो-खो एवं मुर्गा झपट जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। विधानसभा स्तर पर वॉलीबाल एवं पिट्टू सीधे तथा न्याय पंचायत स्तर से चयन के आधार की प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। संसदीय क्षेत्र स्तर पर मलखम्ब, रस्साकसी, गोली (कंचा), फुटबाल एवं बैडमिंटन सीधे तथा विधान सभा स्तर से चयन के आधार की विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।राज्य स्तर पर जूडो, बॉक्सिंग, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, कराटे, बास्केटबाल, हॉकी, हैण्डबाल, योगासन, तैराकी, तीरंदाजी, फैन्सिंग, कुश्ती, पेंचक सिलाट, पावर लिफ्टिंग, वेट लिफ्टिंग, बेसबाल एवं लॉन टेनिस सीधे तथा विधानसभा स्तर से चयन के आधार की अनेक खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। महिला ओपन वर्ग तथा दिव्यांगजन महिला-पुरुष ओपन वर्ग के लिए भी विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं निर्धारित की गई हैं। इस संबंध में निदेशक, युवा कल्याण एवं प्रान्तीय रक्षक दल, उत्तराखण्ड दीप्ति सिंह विस्तृत कार्ययोजना जारी की गई है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों से आयोजन को सफल बनाने में सहयोग की अपेक्षा भी की है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि खेल महाकुम्भ के आयोजन का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना, ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों की प्रतिभाओं को बेहतर मंच उपलब्ध कराना तथा खिलाड़ियों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने का अवसर प्रदान करना है।
August 18, 2026प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तंज से निकली नई सियासी कहानी बयान अब समर्थकों और विरोधियों की राजनीतिक पहचान संसद से निकलकर राजनीति अब सोशल मीडिया में शिफ्ट विरोधी पक्ष ऐसे बयानों को सत्ता के खिलाफ आक्रामक मुद्दा देहरादून। भारतीय राजनीति में तंज, विशेषण और राजनीतिक जुमलों का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया के दौर में यही शब्द कभी-कभी सत्ता के खिलाफ नए राजनीतिक नैरेटिव का आधार भी बन जाते हैं। काकरोच जैसे राजनीतिक तंज के बाद अब दिमागी नक्सल शब्द भी इसी तरह चर्चा में है। प्रधानमंत्री की ओर से किए गए तंज के बाद इस नाम से एक राजनीतिक मंच/समूह के गठन और उससे बड़ी संख्या में लोगों के जुड़ने के दावे ने सियासी बहस को नया मोड़ दे दिया है। यह घटनाक्रम अपने आप में इस बात का संकेत है कि आज की राजनीति केवल संसद, रैलियों और चुनावी सभाओं तक सीमित नहीं रही। सोशल मीडिया पर बोले गए एक शब्द को समर्थक अपने तरीके से राजनीतिक पहचान में बदल सकते हैं और विरोधी उसी शब्द को सत्ता के खिलाफ हथियार बना सकते हैं।राजनीति में किसी विरोधी को निशाना बनाने के लिए दिए गए विशेषण अक्सर कुछ समय के लिए सुर्खियां बनते हैं। लेकिन जब वही शब्द विरोध करने वाले समूह की पहचान बन जाए तो मामला दिलचस्प हो जाता है। दिमागी नक्सल को लेकर सामने आए राजनीतिक प्रयोग को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है। समर्थकों का दावा है कि प्रधानमंत्री के तंज के बाद बड़ी संख्या में लोग इस मंच से जुड़े हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संगठन की वास्तविक सदस्य संख्या को अलग-अलग तरीके से देखना जरूरी है। सवाल यह है कि क्या यह महज सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया है या फिर आने वाले समय में इसका कोई संगठित राजनीतिक रूप भी दिखाई देगा?भारतीय राजनीति में कई बार किसी दल या नेता को दिए गए विरोधी के विशेषण ने ही उसकी पहचान को मजबूत किया है। राजनीतिक विरोधियों के आरोपों को पलटकर अपने पक्ष में इस्तेमाल करना चुनावी रणनीति का हिस्सा रहा है। दिमागी नक्सल को लेकर भी यही प्रयोग दिखाई देता है, जिस शब्द का इस्तेमाल आलोचना या तंज के रूप में किया गया, उसी को समर्थक राजनीतिक व्यंग्य और प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में पेश कर रहे हैं। यह सोशल मीडिया राजनीति के उस नए दौर को दिखाता है जहां नकारात्मक प्रचार भी कभी-कभी राजनीतिक ब्रांडिंग में बदल सकता है।इस नए राजनीतिक मंच से लाखों लोगों के जुड़ने का दावा किया जा रहा है। अगर यह संख्या वास्तविक और सक्रिय राजनीतिक समर्थन में बदलती है तो निश्चित तौर पर यह मुख्यधारा की पार्टियों के लिए विचार करने का विषय होगा। लेकिन किसी डिजिटल प्लेटफार्म पर फालोअर या सदस्य संख्या और वास्तविक चुनावी समर्थन में बड़ा अंतर होता है। चुनाव बूथ पर लड़ा जाता है, जहां संगठन, उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे और मतदाता का भरोसा निर्णायक होता है। यही इस नए राजनीतिक प्रयोग की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।देश की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबले के बीच कई छोटे राजनीतिक प्रयोग समय-समय पर सामने आते रहे हैं। कुछ आंदोलनों ने राजनीतिक दल का रूप लिया तो कुछ सोशल मीडिया की सीमाओं से आगे नहीं बढ़ पाए। दिमागी नक्सल नाम से सामने आया राजनीतिक प्रयोग भी अब इसी कसौटी पर देखा जाएगा। क्या यह केवल प्रधानमंत्री के बयान की प्रतिक्रिया तक सीमित रहेगा या बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, लोकतांत्रिक संस्थाओं और सामाजिक मुद्दों को लेकर अपना स्वतंत्र राजनीतिक एजेंडा तैयार करेगा? यदि यह मंच केवल एक राजनीतिक तंज का जवाब बनकर रह गया तो इसकी उम्र सीमित हो सकती है। लेकिन यदि यह अपने नाम से आगे निकलकर नीति, संगठन और जमीन से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट कार्यक्रम तैयार करता है, तब इसकी राजनीतिक प्रासंगिकता बढ़ सकती है।इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश शायद यही है कि राजनीति में शब्दों को हल्के में लेना अब आसान नहीं है। सत्ता का एक तंज सोशल मीडिया में हजारों पोस्ट, मीम और अभियान का आधार बन सकता है और वही अभियान किसी दिन राजनीतिक संगठन का रूप लेने का दावा भी कर सकता है। लेकिन लोकतंत्र में अंततः फैसला नारों से नहीं, जनता के वोट से होता है। इसलिए दिमागी नक्सल नाम का यह प्रयोग कितना बड़ा राजनीतिक विकल्प बनता है, यह आने वाला समय बताएगा।फिलहाल इतना जरूर है कि जिस शब्द को राजनीतिक तंज के रूप में इस्तेमाल किया गया, वही अब विरोध की पहचान बनने की कोशिश कर रहा है। काकरोच से लेकर दिमागी नक्सल तक की यह राजनीति बताती है कि भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक भाषा का नया दौर शुरू हो चुका हैकृजहां सत्ता का तंज भी कभी-कभी विपक्ष की नई कहानी लिख देता है।
August 18, 2026देहरादून। प्रस्तावित वीवीआईपी भ्रमण कार्यक्रम के दृष्टिगत 19 व 20 अगस्त को ट्रेफिक प्लान तैयार किया गया जिसके तहत शहर में यातायात डायर्वट किया जायेगा।आज यहां इसकी जानकारी देते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल ने बताया कि प्रस्तावित वीवीआईपी भ्रमण कार्यव्रQम के दृष्टिगत शहर में ट्रेफिक प्लान तैयार किया गया है। जिसके तहत रुट डाइवर्ट का समय 19 अगस्त 2026 को दोपहर एक बजे से साढे तीन बजे तक 20 अगस्त 2026 को प्रातः साढे आठ बजे से साढे दस बजे तक 20 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक ऋषिकेश से देहरादून शहर / मसूरी आने वाले वाहनों के लिये रानीपोखरी भोगपुर — थानों — 06 नम्बर पुलिया — सहस्त्रधारा क्रासिंग — सर्वे चौक होते हुए देहरादून शहर में प्रवेश कराया जायेगा तथा मसूरी हेतु सहस्त्रधारा क्रासिंग आईटी पार्क, साईं मन्दिर से होते हुए मसूरी की ओर भेजा जायेगा। हरिद्वार से देहरादून शहर/मसूरी आने वाले वाहनों के लिये भानियावाला फ्लाई ओवर सर्विस लेन — डोईवाला चौक — दूधली मार्ग की ओर भेजते हुए कारगी चौक से देहरादून शहर की ओर प्रवेश कराया जायेगा तथा मसूरी जाने वाले वाहनों को कारगी चौक — आईएसबीटी — शिमला बाईपास — जीएमएस रोड — कैन्ट — अनारवाला होते हुए मसूरी की ओर भेजा जायेगा। आशारोडी / प्रेमनगर क्षेत्र से से मसूरी जाने वाले वाहनों के लिये आशारोडी / प्रेमनगर क्षेत्र से मसूरी जाने वाले वाहनों को आईएसबीटी — शिमला बाईपास — जीएमएस रोड — बल्लूपुर चौक — कैन्ट अनारवाला होते हुए मसूरी की ओर भेजा जायेगा। देहरादून शहर से हरिद्वार / ऋषिकेश जाने वाले वाहनों के लिये कारगी चौक — दूधली मार्ग — डोईवाला चौक — भानियावाला सर्विस लेन — लालतप्पड — नेपाली फार्म तिराहा होते हुए ऋषिकेश / हरिद्वार की ओर भेजा जायेगा। मसूरी से हरिद्वार / ऋषिकेश जाने वाले वाहनों के लिये जेपी बैंड — बार्लाेगंज — कुठाल गेट — ओल्ड मसूरी रोड — सांई मन्दिर — काठ बंगला पुलिया — किरशाली चौक — आईटी पार्क — सहस्त्रधारा क्रासिंग — 06 नम्बर पुलिया — महाराणा प्रताप चोक— थानो रोड होते हुए अपने गंतव्य की ओर भेजा जायेगा। ईसी रोड से मसूरी जाने वाले वाहनों के लिये सर्वे चौक — सहस्त्रधारा क्रासिंग — आईटी पार्क — साईं मन्दिर होते हुए मसूरी की ओर भेजा जायेगा। घण्टाघर से मसूरी जाने वाले वाहनों के लिये ग्रेट वैल्यू — कैनाल रोड — काठ बंगला पुल — सांई मन्दिर होते हुए मसूरी की ओर भेजा जायेगा। हाथीबडकला / दिलाराम से मसूरी जाने वाले वाहनों के लिये दिलाराम — ग्रेट वैल्यू — कैनाल रोड — काठ बंगला पुल — सांई मन्दिर होते हुए मसूरी की ओर भेजा जायेगा। डायवर्जन प्वाईंट भोगपुर तिराहा (रानीपोखरी), भानियावाला फ्लाई ओवर, डोईवाला थाने से 100 मी0 आगे दूधली रोड, कारगी चौक, शिमला बाईपास चौक, एनेक्सी तिराहा, सहस्त्रधारा क्रासिंग, साईं मन्दिर, राजपुर रोड, दिलाराम चौक, ग्रेट वैल्यू तिराहा, सांई मन्दिर तिराहा, कुठालगेट तिराहा तक किया जायेगा। यातायात पुलिस द्वारा निर्धारित डायवर्जन एवं रूट प्लान का पालन करें तथा अनावश्यक रूप से प्रतिबंधित मार्गों का प्रयोग न करें। किसी भी दशा में अपने वाहन मुख्य मार्ग, सड़क के किनारे अथवा प्रतिबंधित स्थानों पर पार्क न करें, जिससे यातायात बाधित हो। अपने गन्तव्य तक पहुँचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करें और यातायात पुलिस द्वारा दिए जा रहे निर्देशों का पालन करें। अति आवश्यक सेवा (एम्बुलेंस, पुलिस, फायर आदि) के वाहनों को रोका / डायवर्ट नहीं किया जायेगा। इसके अतिरिक्त आवश्यक सेवाएं (पेट्रोल / दूध / गैस / सब्जी) के वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से पास कराया जायेगा। नो पर्किग जोन में वाहन खडा करनें पर ट्रेफिक व्रQेन द्वारा व्हीकल को टो किया जायेगा तथा आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जायेगी। धैर्य रखें, हॉर्न का अनावश्यक प्रयोग न करें, यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करें। किसी भी असुविधा से बचने के लिए यातायात प्लान का पालन करें। ट्रैफिक सम्बन्धी अपडेट्स पाने के लिए देहरादून पुलिस तथा ट्रैफिक पुलिस के सोशल मीडिया पेज को फोलो करें।