पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार पर सरकार को अंतिम चेतावनी

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सरकार को अपना पक्ष रखने को 4 सप्ताह दिए

नैनीताल। पहाड़ी क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के मामले में सरकार को लापरवाही के लिए लताड़ लगाते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने 4 सप्ताह का समय देते हुए कहा कि अपना पक्ष रखने के लिए अदालत की ओर से यह अंतिम चेतावनी है।


उल्लेखनीय है कि जुलाई 2021 में कांग्रेस नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अभिनव थापर द्वारा एक जनहित याचिका दायर करते हुए मैदानी क्षेत्रों की तरह पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता द्वारा अपनी याचिका में आवास विभाग के अस्पताल, नर्सिंग होम और स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले संस्थानों के वन टाइम सेटेलमेंट ओटीएस 2021 में खामियों व क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट से संबंधित मुद्दे उठाए गए थे। कोरोना काल में पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में स्थिरता का मुद्दा उठाया गया था। लेकिन इस याचिका को दायर किए जाने से लेकर अब तक राज्य सरकार ने डेढ़ साल में एक बार भी अपना पक्ष रखने की जरूरत नहीं समझी है। सरकार के इस रवैए पर नाराजगी जताते हुए आज मुख्य न्यायधीश जस्टिस विपिन सांघी व जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की पीठ ने सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुए 4 सप्ताह का समय अपना पक्ष रखने के लिए दिया गया है। इस मामले की अंतिम सुनवाई के लिए अदालत ने अब 14 जून 2023 की तारीख तय की है। सरकार भले ही पहाड़ पर स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में कुछ भी दावा करें लेकिन सरकार का यह रवैया यही बताता है कि उसे खराब स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कोई चिंता नहीं है।

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