मौनी अमावस्या के महापर्व पर लाखों लोगों ने लगाई गंगा में डुबकी

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हरिद्वार। आज मौनी अमावस्या के महापर्व पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। महापर्व पर अपार भीड़ की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए थे।
पंडित हरिहर शास्त्री के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने और गंगा में स्नान करने से जीवन में आस्था का मार्ग प्रशस्त होता है तथा इस दिन गुड़ का दान करने से मनुष्य जीवन के समस्त कष्टों का नाश हो जाता है। उनका कहना है कि मौनी अमावस्या का सनातनी धर्म में विशेष महत्व है उसके गूढ़ रहस्यों को कोई भी व्यक्ति तभी समझ सकता है जब वह वास्तव में मौन हो सके। मौन का अर्थ सिर्फ मुंह से कुछ न बोलना नहीं होता है जब आपके विचार भी मौन हो जाते हैं तब वास्तव में आप मौन में होते हैं। और जब कोई मौन में होता है तो उसके अंततह मेंं अध्यात्म का उदय होता है। मौनी अमावस्या पर हमें जीवन में मौन साधना का संकल्प लेना चाहिए।
मौनी अमावस्या पर हरिद्वार जिला प्रशासन द्वारा जहां यातायात सुरक्षा को लेकर तमाम इंतजाम किए गए थे वहीं श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो इसके लिए 15 अतिरिक्त घाट भी बनाए गए थे। सुबह 5—6 बजे से श्रद्धालुओं का गंगा घाटों पर आना शुरू हो गया था। भले ही इस समय मौसम कितना भी सर्द क्यों न सही लेकिन सर्दी का कोई प्रभाव आस्था की डुबकी को नहीं रोक सका। जैसे जैसे दिन दोपहर की ओर बढ़ता गया घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ भी बढ़ती गई। लोगों द्वारा गंगा में डुबकी लगाकर तथा दीपदान व वास्तु दान कर श्रद्धा से मौनी अमावस्या का महापर्व मनाया गया। समाचार लिखे जाने तक स्नान जारी था और श्रद्धालुओं का आना—जाना भी जारी था।

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