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दंगा कराने वालों के लिए सजा का प्रावधान होता तो अच्छा थाः माहरा

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  • आपदा प्रभावितों की सहायता जरूरी थी कि अपने वेतन-भत्ते बढ़ाना

देहरादून। कांगे्रस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा का कहना है कि सरकार ने दंगों के दौरान निजी और सार्वजनिक सम्पत्तियों को होने वाले नुकसान की वसूली दंगाईयों से करने के लिए जो कानून लाया गया है कांग्रेस उसका स्वागत करती है लेकिन सरकार को दंगा कराने वालों के लिए इस कानून में सजा का प्रावधान करना चाहिए था।
उनका कहना है कि दंगा बेवजह नहीं होता है। दंगों के पीछे कुछ खास वजह भी होती है। किन परिस्थितियो के कारण दंगों की स्थिति पैदा हुई और यह परिस्थितियां किसने पैदा की? यह भी एक अहम सवाल है। उन्होने कहा कि जिस वनभूलपुरा दगें का जिक्र बार—बार किया जाता है तथा जिसके बाद सरकार द्वारा यह कानून लाया गया है। उसका मूल कारण 1943 और 1947 के पट्टों का वैध न माना जाना ही था। जिसे लेकर इस पर हिन्दू—मुस्लिम किया गया। उन्होने कहा कि यह अच्छा है कि सरकार दंगाईयों से नुकसान की वसूली करे लेकिन दंगा करने वालों के साथ दंगा कराने वालों के लिए भी सजा का प्रावधान करना चाहिए था।
उल्लेखनीय है कि सरकार के इस कानून संशोधन विधेयक पर राजभवन की मोहर लगने के बाद इसे धरातल पर उतारा जायेगा। इस कानून के तहत अब दंगाईयों से दंगा नियंत्रण पर होने वाले खर्च को दंगाईयों से ही वसूला जाने का प्रावधान किया गया है। यही नहीं दंगे में होने वाली मृत्यू पर सात लाख जुर्माना वसूला जायेगा। अगर कोई दंगाई जुर्माना नहीं चुकायेगा तो उसकी सम्पत्ति को कुर्क किया जायेगा। संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल का कहना है कि इसके लिए अलग से ट्रिब्यूनल बनाया जायेगा जिसमें पीड़ित पक्ष अपील कर सकेगें।
उधर राजभवन द्वारा विधायकों के वेतन भत्ते बढ़ाये जाने संबधी विधेयक को भी राजभवन से मंजूरी दे दी गयी है। जिससे उत्तराखण्ड के विधायको को अब एक लाख के आस पास अधिक वेतन मिलेगा। इस पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा का कहना है कि जब राज्य के लोग मानसूनी आपदा से जूझ रहे है ऐसे समय में सरकार में बैठे लोग अपने कल्याण पर तो ध्यान दे रहे है आपदा प्रभावितों पर उनका ध्यान नहीं है। सत्ता में बैठे लोग अपने वेतन भत्ते तो जब चाहे बढ़ा सकते थे लेकिन इस समय सरकार को लोगों की परेशानियों पर ध्यान देना चाहिए था।

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